सुपरस्टार टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो गए. उन्होंने 31 मार्च को कोलकाता में इस पार्टी की सदस्यता ली. वे इससे पहले ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा थे. 2021 में गोवा चुनाव से पहले वे इस पार्टी में शामिल हुए थे. तब उन्होंने 2022 चुनावों के दौरान इस पार्टी के लिए प्रचार भी किया था. तब ममता ने उन्हें अपना छोटा भाई कहा था. अब लिएंडर पेस बंगाल में ममता की पार्टी के खिलाफ प्रचार के लिए उतर सकते हैं.
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पेस के बीजेपी में आने से उनके ऑल इंडिया टेनिस एसोसिएशन (AITA) के मुखिया बन सकते हैं. वे हाल ही में बंगाल टेनिस एसोसिएशन के प्रेसीडेंट बने हैं. AITA को नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट के तहत नए सिरे से चुनाव कराने हैं. इसमें पेस उतर सकते हैं.
पेस 30 साल तक भारतीय टेनिस की पहचान रहे. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्टेज पर काफी सफलता हासिल की. वे इकलौते भारतीय टेनिस खिलाड़ी हैं जिन्होंने ओलिंपिक मेडल जीत रखा है. उन्होंने 1996 में अटलांटा ओलिंपिक में पुरुष एकल में कांसा जीता था. इसके बाद महेश भूपति के साथ उन्होंने पुरुष युगल में जोड़ी बनाई और काफी सफलता हासिल की. इस जोड़ी को इंडियन एक्सप्रेस के नाम से जाना जाता था. पेस ने करियर में कुल 18 ग्रैंड स्लैम जीते. इनमें से आठ पुरुष युगल और 10 मिक्स्ड डबल्स में आए.
लिएंडर पेस से पहले ये बड़े खेल सितारे राजनीति के मैदान में उतरे
मोहम्मद अजहरुद्दीन (क्रिकेट)- भारतीय टीम के पूर्व कप्तान 2009 में कांग्रेस में शामिल हुए थे. फिर यूपी की मुरादाबाद सीट से लोकसभा सांसद बने. 2014 में लोकसभा और 2023 में विधान सभा चुनाव में उन्हें हार मिली. वे अभी तेलंगाना के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री हैं.
नवजोत सिंह सिद्धू (क्रिकेट)- भारत का यह पूर्व क्रिकेटर कई पार्टियों का हिस्सा रहा. वे पहले बीजेपी में रहे. फिर कांग्रेस में चले गए. उनके आम आदमी पार्टी में जाने की भी अटकलें रहीं. नवजोत सिंह सिद्धू ने 2004 व 2009 का लोकसभा चुनाव लड़ा और जीता. 2017 में वे कांग्रेस की टिकट पर विधायक बने. अभी वे राजनीति से दूर हैं.
राज्यवर्धन सिंह राठौड़ (निशानेबाजी)- 2004 ओलिंपिक में निशानेबाजी में सिल्वर जीतने वाले इस शूटर ने 2013 में बीजेपी जॉइन की. वे जयपुर ग्रामीण सीट से 2014 में सांसद बने. 2019 में फिर से जीते. राज्यवर्धन 2023 में विधानसभा चुनाव लड़े और जीतने के बाद राजस्थान सरकार में मंत्री बने.
साइना नेहवाल (बैडमिंटन)- पूर्व नंबर एक खिलाड़ी और लंदन ओलिंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली इस शटलर ने 2020 में बीजेपी का हाथ थामा. हालांकि अभी तक वह चुनावी राजनीति से दूर रही हैं.
गौतम गंभीर (क्रिकेट)- भारत के पूर्व क्रिकेटर और वर्तमान में टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर 2019 में बीजेपी में शामिल हुए. फिर पूर्वी दिल्ली से सांसद बने. लेकिन 2024 में उन्होंने राजनीति से दूरी बना ली.
कीर्ति आजाद (क्रिकेट)- 1983 वर्ल्ड कप जीतने वाले क्रिकेटर ने पहले बीजेपी और फिर कांग्रेस व तृणमूल कांग्रेस का हाथ थामा. वे बीजेपी की टिकट पर दरभंगा सीट से सांसद बने. अभी टीएमसी की तरफ से सांसद हैं.
विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया (कुश्ती)- दोनों बड़े पहलवान 2024 में कांग्रेस का हिस्सा बने. विनेश हरियाणा से विधायक बनी. वहीं बजरंग ऑल इंडिया किसान कांग्रेस के मुखिया बनाए गए.
विजेंदर सिंह (मुक्केबाजी) - बीजिंग ओलिंपिक के कांस्य पदक विजेता 2019 में कांग्रेस में गए. दक्षिणी दिल्ली से लोक सभा चुनाव में उतरे लेकिन हार गए. 2024 में वे बीजेपी का हिस्सा बन गए.
बाइचुंग भाटिया (फुटबॉल)- भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान 2014 में तृणमूल कांग्रेस में गए. दार्जिलिंग से लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन हार गए. 2021 बंगाल चुनाव में उन्होंने वामपंथी दलों का समर्थन किया. फिर उन्होंने हमारो सिक्किम नाम से पार्टी बनाई.
हरभजन सिंह (क्रिकेट)- भारतीय टीम का पूर्व क्रिकेटर 2022 में आम आदमी पार्टी में शामिल हुए. वे इस पार्टी के राज्य सभा सांसद हैं.
चेतन चौहान (क्रिकेट)- भारतीय टीम के पूर्व कप्तान बीजेपी के जरिए पॉलिटिक्स में उतरे. वे 1991 व 1998 में यूपी की अमरोहा सीट सांसद चुने गए. 1996, 1999 और 2004 में उन्हें हार मिली. 2017 में नौगांवा सीट से विधायक बने.
योगेश्वर दत्त (कुश्ती)- हरियाणा से आने वाले इस पहलवान ने लंदन ओलिंपिक में कांसा जीता था. वे 2019 में बीजेपी में गए. चुनाव लड़े लेकिन जीत नहीं सके.
दिलीप टिर्की (हॉकी)- भारतीय टीम के पूर्व कप्तान 2012 में बीजू जनता दल में शामिल हो गए. उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया गया. 2024 में लोकसभा चुनाव लड़े लेकिन हार गए.
कल्याण चौबे (फुटबॉल)- भारत के पूर्व फुटबॉलर 2015 में बीजेपी के जरिए राजनीति में आए. 2019 में महुआ मोइत्रा के सामने चुनाव लड़ा लेकिन हार गए. 2021 व 2024 में विधानसभा चुनाव में उतरे मगर सफलता नहीं मिली. अभी भारतीय फुटबॉल फेडरेशन के प्रेसीडेंट हैं.
ज्योतिर्मय सिकदर (एथलेटिक्स)- 1998 एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली यह एथलीट सीपीएम की टिकट पर 2004 में लोकसभा सांसद बनी. 2009 में उन्हें हार मिली. 2019 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का समर्थन किया लेकिन फिर बीजेपी में चली गई.
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