फ्रेंच ओपन 2026 शुरू होने से पहले अगर कोई कहता कि माया ख्वालिंस्का ग्रैंड स्लैम का फाइनल खेलेंगी तो शायद कोई भी हंस पड़ता, मगर अब वहीं होने जा रहा है, जिसकी कल्पना भी शायद किसी ने नहीं की होगी. इससे पहले तक ज्यादातर लोगों ने उनका नाम तक नहीं सुना था. ख्वालिंस्का को खुद भी यकीन नहीं हो रहा. वह जब इवेंट में उतरी थी तो उन्होंने भी नहीं सोचा था कि उनका सफर फाइनल तक पहुंच जाएगी, इसीलिए उन्होंने पैसे बचाने के लिए पूरे समय के लिए होटल भी बुक नहीं किया था. यहां तक कि सभी को चौंकाते हुए जब उन्होंने सेमीफाइनल में जगह बनाई तो उन्हें होटल का बिल बढ़ने का डर सताने लगा था. उन्हें डर था कि वो बिल कैसे चुका पाएंगी, मगर अब फाइनल में पहुंचने के बाद होटल खर्च को लेकर उनका डर खत्म हो गया है.
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ख्वालिंस्का जब पेरिस पहुंचीं, तो क्ले कोर्ट पर उनके नाम सिर्फ दो टूर-लेवल जीत थीं. उन्हें उम्मीद से ज़्यादा अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा था. आम तौर पर ऐसे रिकॉर्ड वाला खिलाड़ी क्वालिफ़ाइंग राउंड से आगे बढ़ने की कोशिश करता है, न कि किसी ग्रैंड स्लैम की कहानी को नए सिरे से लिखता है.
ग्रैंड स्लैम ट्रॉफ़ी जीतने वाली दूसरी क्वालिफ़ायर बनने से बस एक जीत दूर
लगभग दो सप्ताह बाद ख्वालिंस्का इतिहास रचने के बहुत करीब हैं. वह ओपन एरा में एम्मा राडुकानु के बाद ग्रैंड स्लैम ट्रॉफ़ी जीतने वाली दूसरी क्वालिफ़ायर बनने से बस एक जीत दूर हैं. कुछ महीने पहले ही वह पोलिश टेनिस की दुनिया में एक गुमनाम नाम थीं. यूनाइटेड कप के दौरान कोयले के खादान में काम करने वाले मजदूर की बेटी ख्वालिंस्का को चार बार की रोलैंड गैरोस चैंपियन इगा स्वियातेक के लिए बर्फ पकड़े हुए भी देखा गया था, मगर अब ख्वालिंस्का के लिए सब कुछ बदल गया है.
सेमीफाइनल में ख्वालिंस्का ने दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी एरिना सबालेंका को हराकर अंतिम चार में पहुंचने वाली डायना श्नाइडर को हराया. उन्होंने श्नाइडर को 7-6 (4), 6-4 से मात दी. अब फाइनल में उनका सामना रूस की टीनएजर मीरा आंद्रीवा से होगा.
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