Asian games 2026: भारतीय टेन‍िस टीम में बदलाव पर बवाल, पांच ख‍िलाड़‍ियों को लेकर क्यों मच गया हंगामा?

भारत के महान टेनिस खिलाड़ी और दो बार एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतने वाले रोहन बोपन्ना ने टेनिस टीम में किए गए बदलावों पर सवाल उठाए हैं.

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Rohan Bopanna’s retirement draws touching nod from former doubles partner: "Welcome to the other side"

एश‍ियन गेम्स के लिए 12 ख‍िलाड़‍ियों को भारतीय टेन‍िस टीम में चुना गया. (Image via Getty)

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एश‍ियन गेम्स के लिए 12 ख‍िलाड़‍ियों को भारतीय टेन‍िस टीम में चुना गया.

टेन‍िस टीम में बदलाव की रोहन बोपन्ना ने आलोचना की.

एश‍ियन गेम्स 2026 के आगाज में अब एक महीने से भी कम समय बचा है.इसके लिए 492 भारतीय ख‍िलाड़‍ियों के नाम पर भी मुहर लग गई है.हालांकि भारतीय दल के ऐलान के बाद टेन‍िस टीम को लेकर बवाल मच गया है. भारत के महान टेनिस खिलाड़ी और दो बार एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतने वाले रोहन बोपन्ना ने टेनिस टीम में किए गए बदलावों पर सवाल उठाए हैं. बोपन्ना का मानना ​​है कि जिन खिलाड़ियों ने अपने इंटरनेशनल प्रदर्शन के दम पर जगह बनाई थी, उन्हें जापान में होने वाले एश‍ियन गेम्स में खेलने का मौका मिलना चाहिए था. 

एश‍ियन गेम्स के लिए क्वालिफाई करने वाले भारतीय ख‍िलाड़ी, यहां देखें पूरी लिस्ट

खेल मंत्रालय के उस नियम के कारण पांच क्वालिफाई करने वाले खिलाड़ी इन बदलावों से प्रभावित हुए, जिसमें सिर्फ एशिया के टॉप आठ खिलाड़ियों को ही हिस्सा लेने की इजाजत थी. लिंक्डइन पर जारी एक बयान में बोपन्ना ने इस फैसले की आलोचना की और खिलाड़ियों, उनके परिवारों और स्पॉन्सर पर इसके असर पर सवाल उठाए. उन्होंने लिखा कि वह उन टेनिस खिलाड़ियों के हक में बात करना चाहते हैं, जो बेहतर सुविधाओं के हकदार हैं. उन्होंने दया की भीख नहीं मांगी. उन्होंने बस एक मौका मांगा.धामने, अडकर, यमलपल्ली, वैदेही, थोम्बरे ये पांच खिलाड़ी, जिनमें महिला सिंगल्स में भारत की नंबर 1 और नंबर 2 खिलाड़ी भी शामिल हैं, अपनी रैंकिंग तक कड़ी मेहनत से पहुंचे हैं. कोई शॉर्टकट नहीं, कोई एहसान नहीं. उन्होंने इंटरनेशनल लेवल पर मुकाबला किया, क्वालीफाई किया और साबित किया कि वे किस स्तर पर है. 

पांच एथलीटों तक सीमित नहीं फैसला

उन्होंने लिखा कि अब एक ऐसी कमिटी ने, जो कभी उन खिलाड़ियों की जगह नहीं रही, बिना एक भी बॉल खेले ही कागज पर उनका भविष्य तय कर दिया है. अगर नतीजे पहले ही तय हो चुके हैं, तो क्वालिफ़िकेशन क्यों? रैंकिंग क्यों? पूर्व वर्ल्ड नंबर एक डबल्स खिलाड़ी ने यह भी कहा कि यह फैसला सिर्फ उन पांच एथलीटों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर इस बात पर भी पड़ सकता है कि माता-पिता और स्पॉन्सर देश के स्पोर्ट्स सिस्टम को किस नजरिए से देखते हैं.उन्होंने आगे कहा कि यह फैसला सिर्फ पांच एथलीटों के बारे में नहीं है. यह हर उस माता-पिता और स्पॉन्सर के लिए एक मैसेज है जिन्होंने देश से पहले उनका साथ दिया, जिन्होंने मेरिट और नतीजों पर भरोसा किया, न कि पहले से मंजूरी मिलने पर. इन खिलाड़ियों को यह कहना कि वे मेडल जीतने की उम्मीद नहीं हैं', असल में उन सभी माता-पिता और स्पॉन्सर से यह कहने जैसा है कि यहां आपकी राय कोई मायने नहीं रखती. 


सेलेक्शन प्रोसेस पर सवाल 

बोपन्ना ने इस बात पर ज़ोर दिया कि खेल के नतीजे हमेशा रैंकिंग या खिलाड़ियों के कोर्ट पर उतरने से पहले की भविष्यवाणियों से तय नहीं किए जा सकते.उन्होंने कहा कि खेल एक ऐसा क्षेत्र है जहां भरोसा भविष्यवाणियों से आगे निकल जाता है, जहां जिन्हें कमज़ोर समझा जाता है, वे नई कहानी लिखते हैं. आप सिर्फ़ बोर्डरूम में यह तय करके कि किसे खेलने की इजाज़त है, कोई स्पोर्ट्स नेशन या स्पोर्ट्स इकॉनमी नहीं बना सकते. सेलेक्शन का यह व‍िवाद सहजा यमलापल्ली, वैष्णवी अडकर, मानस धामने, प्रार्थना थोम्बरे और वैदेही चौधरी को लेकर है. 

भारत की एशियन गेम्स टेनिस टीम

भारत की फ़ाइनल टेनिस टीम में पुरुष और महिला दोनों वर्गों में तीन-तीन सिंगल्स खिलाड़ी और हर कैटेगरी में तीन-तीन डबल्स खिलाड़ी शामिल हैं. इसके अलावा तीन पुरुष रिज़र्व और दो महिला रिजर्व खिलाड़ी भी हैं. 

मैंस टीम 

सिंगल्स: सुमित नागल, मानस धामने, दक्षिणेश्वर सुरेश
डबल्स: युकी भांबरी, एन श्रीराम बालाजी, अनिरुद्ध चंद्रशेखर
रिजर्व: करण सिंह, ऋत्विक बोल्लिपल्ली, निकी पूनाचा


विमेंस टीम 

सिंगल: सहजा यमलापल्ली, वैष्णवी अडकर, वैदेही चौधरी
युगल: रुतुजा भोसले, प्रार्थना थोम्बरे, अंकिता रैना
रिजर्व: ज़ील देसाई, श्रुति अहलावत

 

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