खेल मंत्री मनसुख मंडाविया के दखल के बाद वुशु खिलाड़ी दिव्यांशी चौधरी ने खेल के राष्ट्रीय महासंघ के प्रति अपना गुस्सा कम कर दिया है. घुटने की चोट के कारण भारत की एशियन गेम्स की टीम से बाहर किए जाने के बाद दिव्यांशी ने एक वीडियो मैसेज में आत्महत्या करने की धमकी दी थी. हालांकि मंत्रालय के दखल के बाद इस युवा खिलाड़ी ने महासंघ की आलोचना करने के मामले में अपना रुख नरम कर लिया है. उन्होंने कहा है कि महासंघ ने उन्हें चोट से उबरने के महत्व को समझने में मदद की है.
दिव्यांशी ने उठाए थे सवाल
दिव्यांशी ने पहले एक वीडियो में इस फैसले पर सवाल उठाए थे और दावा किया था कि चोट के बावजूद डॉक्टरों ने उन्हें एशियन गेम्स में हिस्सा लेने की मंजूरी दे दी थी. हालांकि एक नए वीडियो में 18 साल की दिव्यांशी ने कहा कि अब वह फेडरेशन के फैसले को मानती हैं और प्रतियोगिता में लौटने से पहले ठीक होने पर ध्यान देंगी. दिव्यांशी ने एक नए वीडियो में कहा कि फेडरेशन ने उन्हें समझाया कि सेहत सबसे ज़रूरी है ताकि वह भविष्य में भारत के लिए मेडल जीत सकें. उन्हें लग रहा था कि फेडरेशन उनके साथ नहीं है, लेकिन अब उन्हें समझ आ गया है कि वे उनके साथ हैं और 2030 एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने के लिए अपना सपोर्ट देंगे. उन्होंने आगे कहा कि फेडरेशन चाहता है कि वह अपनी चोट से पूरी तरह ठीक हो जाएं और फिर खेल में वापसी करें.उन्हें यह बात समझ नहीं आ रही थी. यहां तक कि खेल मंत्री (मनसुख मंडाविया) ने भी उन्हें चोट से उबरने की अहमियत समझाई.
रोशिबिना पर आरोप
हालांकि दिव्यांशी ने फेडरेशन के खिलाफ अपना रुख थोड़ा नरम कर लिया है, लेकिन उन्होंने रोशिबिना पर लगाए गए आरोपों को वापस नहीं लिया है. दिव्यांशी ने उन पर खुद को और अपने परिवार को परेशान करने का आरोप लगाया और कहा कि यह सब कई महीनों से चल रहा था.




