हर्षित राणा ने रिहैब में की लापरवाही, ओवरवेट होकर टीम का बने हिस्सा, 5 मैच बाद ही दोबारा हो गए चोटिल

SportsTak

SportsTak

अपडेटेड:

google-icon
 हर्षित राणा घरेलू क्रिकेट में दिल्ली के लिए खेलते हैं. (photo: BCCI)
हर्षित राणा घरेलू क्रिकेट में दिल्ली के लिए खेलते हैं. (photo: BCCI)

Story Highlights:

हर्षित राणा ने दो मैच आयरलैंड के सामने खेले और तीन मुकाबले इंग्लैंड के खिलाफ.

हर्षित राणा ने वापसी के बाद पांच मैच में सात विकेट लिए थे.

तेज गेंदबाज हर्षित राणा को इंग्लैंड के साथ टी20 सीरीज के दौरान चोट की वजह से खेल से दूर होना पड़ा. उन्हें हैमस्ट्रिंग इंजरी हुई. वे लगभग पांच महीने बाद टीम में वापस आए थे और केवल पांच मैच खेलने के बाद ही बाहर हो गए. अब सामने आया है कि हर्षित राणा ने बढ़े हुए वजन के साथ वापसी की. इससे उन्हें फिर से चोट लगी. अभी यह पेसर बेंगलुरु में बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में है. उनके दोबारा चोटिल होने से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के फिटनेस सर्टिफिकेट पर भी सवाल उठे हैं.

पीटीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि 24 साल के हर्षित ने बढ़े हुए वजन के साथ वापसी की. उन्होंने रिहैब के दौरान वजन बढ़ा लिया था. इसके बाद भी उन्हें फिट घोषित कर दिया गया. साथ ही सेलेक्टर्स ने भी उन्हें चुन लिया. फिर टीम मैनेजमेंट ने खेलने का मौका भी दे दिया. वे दो मैच आयरलैंड के सामने खेले और तीन मुकाबले इंग्लैंड के खिलाफ खेले. ये पांचों मैच टी20 फॉर्मेट में थे और इनमें से चार में ही हर्षित ने बॉलिंग की. इंग्लिश टीम के साथ तीसरे मैच के दौरान ही उन्हें चोट लगी थी.

पीटीआई ने एक सूत्र के हवाले से लिखा है, 2027 वर्ल्ड कप के लिहाज से हर्षित काफी अहम खिलाड़ी हैं. उन्हें नंबर आठ पर बैटिंग करने वाले के तौर पर देखा जा रहा है जो 140 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बॉलिंग भी कर सकता है. लेकिन उसे अपनी फिटनेस पर ध्यान देना होगा. हाल ही में जब वह फिर से टीम में आया तो उसका वजन बढ़ा हुआ था. जो तेज गेंदबाजी करता है अगर उसका वजन बढ़ा हुआ होगा तो फिर शरीर के वजन से हैमस्ट्रिंग फटने का खतरा बढ़ जाता है.

हर्षित की इंजरी से साफ होता है कि उन्हें रिहैब पूरा करने के बाद फिटनेस सर्टिफिकेट मिला. लेकिन इस दौरान उन्होंने वजन पर ध्यान नहीं दिया. इसका नतीजा बॉलिंग के दौरान दिखा. आमतौर पर जब पेस बॉलर बॉलिंग करता है तो उसके पैरों पर कुल वजन का 6 से 8 गुना बोझ पड़ता है. ज्यादा वजन होने से पैरों को ज्यादा बोझ उठाना पड़ता है.