भारतीय बल्लेबाज इंग्लैंड दौरे पर बुरी तरह से जूझ रहे हैं. इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों के सामने वे लगातार रनों के लिए संघर्ष कर रहे हैं. वैभव सूर्यवंशी हो या इशान किशन या तिलक वर्मा, सबके सब इंग्लिश पिचों पर ऐसे खेल रहे हैं जैसे खेलना ही नहीं जानते. सीरीज के चार मैच में वे बैटिंग कर चुके हैं और श्रेयस अय्यर व कुछ हद तक अभिषेक शर्मा को छोड़कर बाकी के रन नहीं आए हैं. स्ट्राइक रेट भी गर्त में जा रही है. आईपीएल में धूम मचाने वाले बल्लेबाजों के अचानक से इस तरह के खेल ने सभी को हैरानी में डाल दिया है. लेकिन एक पैटर्न है जिसके आगे भारतीय बल्लेबाज हथियार डाल रहे हैं और इंग्लिश टीम लगातार इसका फायदा ले रही है.
जोफ्रा आर्चर के नेतृत्व वाले इंग्लिश पेस बॉलिंग अटैक ने शॉर्ट पिच गेंदबाजी के जरिए भारतीय बैटिंग की पोल खोल दी. अभी तक की सीरीज में हार्ड लैंथ व बाउंसर के जरिए 11 विकेट लिए गए हैं. इस तरह की बॉलिंग से न केवल रन बनाना मुश्किल हो गया है बल्कि स्ट्राइक रेट भी डूब गई है. इस सीरीज में हार्ड लैंथ यानी आठ से 10 मीटर की लैंथ पर भारत के सात विकेट गिरे हैं. इन गेंदों पर 14.57 की औसत और 134.21 की स्ट्राइक रेट रही है. कुल 76 गेंद इस तरह की रही है जिन पर 102 रन बने हैं.
बाउंसर के सामने बेबस टीम इंडिया
इंग्लिश तेज गेंदबाजों की बाउंसर यानी 10 मीटर या इससे ऊपर की लैंथ पर चार विकेट गिरे हैं. इन गेंदों पर भारतीय बल्लेबाजों की रन बनाने की औसत 17.25 और स्ट्राइट रेट 164.28 की रही है. इंग्लैंड की ओर से 42 गेंद इस तरह की फेंकी गई जिन पर 69 रन बने हैं. कुल मिलाकर देखा जाए तो इंग्लैंड की ओर से 118 गेंद हार्ड लैंथ व बाउंसर डाली गई. भारतीय बल्लेबाजों ने इन पर 171 रन बनाए हैं. 11 विकेट गिरे हैं और 15.54 की औसत रही है. स्ट्राइक रेट 144.9 की है.
वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा, इशान किशन, तिलक वर्मा, अक्षर पटेल लगातार इस तरह की गेंदों पर आउट हुए हैं. जब भी उनके सामने छोटी लैंथ की गेंद गिरी तो उन्होंने समय लेने के बजाए बल्ला भांजने पर ध्यान दिया और विकेट गंवाए. सूर्यवंशी ने तीन मैच खेले हैं और 14, 13 और 15 रन बना सके हैं. तिलक ने 13, नाबाद 24, 3 व 11, अभिषेक ने 59, 43, 10 व 16, इशान 0, 40, 13 व 4 और शिवम नाबाद 42, 5, 2 व 22 रन बना पाए हैं.




