क्रिकेट के खेल की शुरुआत जब 16वीं सदी से हुई तो शुरुआत में तेज गेंदबाजों का काफी बोलबाला रहता था. बल्लेबाजों के पास सुरक्षा के लिए हेलमेट और पर्याप्त किट नहीं होती थी. इसके चलते गेंदबाजों की रफ्तार का खौफ हमेशा बैटर्स के जेहन में रहता था. इतना ही नहीं, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका की तेज पिचों पर तो गेंदबाज अपने आगे किसी को टिकने नहीं देते थे. लेकिन जैसे-जैसे क्रिकेट का खेल सफेद कपड़ों से रंगीन कपड़ों और लाल गेंद से सफेद गेंद की तरफ शिफ्ट हुआ, तो 21वीं सदी में यह खेल पूरी तरह से बदल गया. अब बल्लेबाजों के पास तेज गेंदबाजों से बचने के लिए मजबूत हेलमेट, पैड्स और तमाम वो सारी चीजें हैं, जिनसे तेज गेंद अगर लगे तो बचा जा सकता है. इतना ही नहीं, पिच भी ऐसी हो गई हैं कि गेंदबाजों के लिए कुछ बचा नहीं. वेस्ट इंडीज के खिलाफ दो वनडे मैचों की सीरीज में जब यही नजारा देखने को मिला और गेंदबाज विकेट को तरसते नजर आए तो टीम इंडिया के कोच गौतम गंभीर ने जियोस्टार से बातचीत में कहा कि ये कोई क्रिकेट नहीं है, ये सिर्फ बैटिंग है.
एक पारी में वेस्ट इंडीज के तीन गेंदबाजों ने शतक जड़े
अब पहले वनडे के बाद दूसरा मैच गुवाहाटी के बरसापारा मैदान में खेला गया. इस मैच में गुवाहाटी की पिच पर गेंदबाजों के लिए कुछ भी नहीं था. भारत के लिए डेब्यू करने वाले आकिब नबी की किस्मत खराब रही कि उनको ऐसी पिच पर डेब्यू का मौका मिला, जिस पर गेंदबाजों के लिए जरा भी मदद नहीं थी. गुवाहाटी के मैदान पर वेस्ट इंडीज की टीम पहले खेलने उतरी तो इस बार उसके बैटर्स ने पिच का पूरा फायदा उठाया. भारतीय गेंदबाज ऐसा लगा जैसे कि किसी नेट्स सेशन की पिच पर गेंदबाजी कर रहे हैं और लगातार शॉट्स लगते चले जा रहे हैं. वेस्ट इंडीज के ओपनर जॉन कैंपबेल ने 68 गेंद में 101 रन तो शे हॉप ने 94 गेंद में आठ चौके और तीन छक्के से 104 रन की पारी खेली. इसके अलावा 77 गेंद में 13 चौके और तीन छक्के से 114 रन की पारी खेली. यानी वेस्ट इंडीज की एक पारी में तीन बैटर्स ने शतक जड़े और उनकी टीम ने 405 रन का विशाल टोटल खड़ा किया. भारत के लिए डेब्यू करने वाले आकिब नबी 8.5 ओवर में 84 रन देकर एक भी विकेट नहीं ले सके तो कृष्णा के नाम एक विकेट और गुरनूर ने 10 ओवर में 96 रन देकर दो विकेट झटके.
क्या रवींद्र जडेजा को भारतीय ODI टीम से शॉल-श्रीफल देने का समय आ गया है?
दूसरे वनडे में गिल ने दोहरा तो रोहित ने शतक जड़ा
इस तरह गेंदबाजों की कब्रगाह पिच पर जब भारत के ओपनर रोहित शर्मा और शुभमन गिल बैटिंग करने आए तो रन बरसाने के साथ तमाम रिकॉर्ड भी अपने नाम कर डाले. गिल और रोहित ने ओपनिंग में 255 रन की भारत के लिए दूसरी सबसे बड़ी वनडे क्रिकेट की साझेदारी निभाई. सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली के नाम 258 रन की रिकॉर्ड साझेदारी है तो इसके बाद अब रोहित और गिल की जोड़ी का नाम आ गया है. रोहित शर्मा तभी 75 गेंद में 10 चौके और छह छक्के से 101 रन बनाकर चलते बने. जबकि गिल ने मोर्चा संभाले रखा और अंत तक जीत दिलाते हुए 233 गेंद में 26 चौके व आठ छक्के से 223 रन की विशाल पारी खेली. गिल ने अपने करियर का पहला व वनडे क्रिकेट के इतिहास का सबसे तेज दोहरा शतक 117 गेंद में ही जड़ दिया. इन दोनों की पारी से भारत ने 406 रन का मजाक बनाते हुए उसे 43.3 ओवर में दो विकेट पर ही हासिल कर लिया और गेंदबाज पूरे मैच में सिर्फ रन लुटाते व बेदम नजर आए.
गौतम गंभीर ने क्यों जताई नाराजगी?
गंभीर ने गेंदबाजों के बेदम होने और सिर्फ बैटिंग पिच बनाने पर नाराजगी जताई. गंभीर का मानना है कि क्रिकेट वही है, जिसमें गेंद और बल्ले के बीच संतुलन हो. वेस्ट इंडीज के खिलाफ सीरीज के दूसरे वनडे के बाद गंभीर ने जियोस्टार से बातचीत में कहा कि ये कोई क्रिकेट नहीं है. ये तो सिर्फ एक तरह से बैटिंग ही रही. ईमानदारी से कहूं तो मैं कभी ऐसी विकेट का सपोर्ट नहीं कर सकता. एक युवा खिलाड़ी गेंदबाजी कर रहा है और टीम 400 बना रही है. फिर हम आसानी से 400 का पीछा कर रहे हैं. जाहिर है कि फैंस के लिए, रिकॉर्ड के लिए ये सब कुछ शानदार हो सकता है. लेकिन अगर आप मुझसे कहेंगे तो एक असली क्रिकेट फैन होने के नाते और एक कोच होने के नाते मुझे ऐसा गेम नहीं पसंद है. क्योंकि गेंदबाजों के प्रति भी हमदर्दी दिखानी होगी और इस तरह के विकेट पर गेंदबाजी करना गेंदबाज के लिए सही नहीं होता है. हमें गेंदबाजों को भी कुछ देना होगा, वरना ऐसे मैच होते रहेंगे.




