पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने माना कि पाकिस्तान सुपर लीग के लिए जिम्बाब्वे के तेज गेंदबाज ब्लेसिंग मुजरबानी को कभी कोई औपचारिक कॉन्ट्रेक्ट नहीं भेजा गया था, लेकिन फिर भी बोर्ड उन्हें सजा देने पर अड़ा हुआ है. बोर्ड ने दो साल का बैन लगाने के अपने फैसले का बचाव करते हुए जोर दिया कि उनके बीच एक साफ मौखिक समझौता हुआ था, इस रुख ने चल रहे विवाद को और तेज कर दिया है.
भरोसा तोड़ने की सजा
PCB ने पहले मुजरबानी पर दो साल का बैन लगा दिया. उन पर आरोप लगाया कि उन्होंने PSL के प्रति अपनी प्रतिबद्धता तोड़ी है, क्योंकि उन्होंने KKR में एक रिप्लेसमेंट खिलाड़ी के तौर पर शामिल होने का फैसला किया था.हालांकि बोर्ड के सूत्रों ने यह माना कि कोई औपचारिक कॉन्ट्रैक्ट नहीं था. सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव स्पष्ट था और जरूरी शर्तों को बिना किसी हिचकिचाहट के स्वीकार कर लिया गया था. सूत्रों ने आगे कहा कि एक बार जब पारिश्रमिक और ढांचे पर सहमति बन जाती है, भले ही वह लिखित में हो तो यह एक बाध्यकारी दायित्व बन जाता है. बोर्ड का पक्ष इस दावे पर आधारित है कि मुजरबानी ने IPL के लिए इस आपसी समझ की अनदेखी की.ऐसा करके उन्होंने भले ही कोई हस्ताक्षरित कॉन्ट्रैक्ट न तोड़ा हो, लेकिन विश्वास जरूर तोड़ा है.
मुजरबानी के एजेंट ने किया था खुलासा
इससे पहले मुजरबानी के एजेंट रॉब हम्फ्रीज ने इन बैन को बहुत ज़्यादा और गलत बताया था.वर्ल्ड स्पोर्ट्स एक्सचेंज के जरिए इस तेज गेंदबाज का प्रतिनिधित्व करते हुए हम्फ्रीज ने ज़ोर देकर कहा कि कोई औपचारिक कॉन्ट्रैक्ट कभी जारी ही नहीं किया गया था, इसलिए उनके क्लाइंट के लिए किसी भी समझौते का उल्लंघन करना नामुमकिन था. हम्फ्रीज़ ने कहा कि वह सार्वजनिक तौर पर चुप रहे हैं,लेकिन हालात को देखते हुए स्पष्टीकरण देना ज़रूरी था और बताया कि इस्लामाबाद यूनाइटेड के साथ बातचीत इस शर्त पर आधारित थी कि उन्हें ज़िम्बाब्वे क्रिकेट से 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) मिल जाए.उन्होंने आगे कहा कि PSL से कॉन्ट्रैक्ट मिले बिना NOC नहीं मिल सकता. सार्वजनिक घोषणा के बावजूद कोई कॉन्ट्रैक्ट कभी दिया ही नहीं गया था.

