बांग्लादेश ने साल की शुरुआत में भारत-श्रीलंका की मेजबानी में हुए टी20 वर्ल्ड कप 2026 में नहीं खेलने का फैसला किया था. अब एक जांच रिपोर्ट में इस फैसले को लेने वाले के नाम का खुलासा हुआ है. बांग्लादेश सरकार की जांच में पूर्व खेल सलाहकार आसिफ नजरुल को दोषी ठहराया गया है. कहा गया है कि उन्होंने अकेले यह फैसला किया. तीन सदस्यीय कमिटी ने 15 सितंबर को जांच रिपोर्ट जारी की. इसमें कहा गया है कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड में बड़े मामलों का सामना करते समय स्वतंत्र रणनीतिक नेतृत्व, संकट के समय कूटनीतिक काबिलियत और दीर्घकालिक योजना की कमी थी.
बीसीसीआई के बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल 2026 से हटाने पर बांग्लादेश ने टी20 वर्ल्ड कर भारत में नहीं खेलने का फैसला किया था. उसने सुरक्षा को वजह बताया. इस मसले की बांग्लादेश बोर्ड स्तर पर चर्चा तक नहीं हुई. नजरूल ने फेसबुक के जरिए कह दिया कि उनकी टीम भारत में नहीं खेलेगी. बांग्लादेशी बोर्ड ने बात में अपनी टीम के मैच श्रीलंका शिफ्ट करने की मांग की. लेकिन आईसीसी ने इससे इनकार कर दिया. तीन सप्ताह तक चली बातचीत के बाद 24 जनवरी को आईसीसी ने बांग्लादेश को हटाकर स्कॉटलैंड को वर्ल्ड कप में शामिल कर लिया.
मई 2026 में हुआ था जांच कमिटी का ऐलान
मई 2026 में जब बांग्लादेश में नई सरकार बनी तब खेल मंत्री अमिनुल हक ने ऐलान किया था कि टीम के टी20 वर्ल्ड कप में नहीं खेलने की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमिटी बनाई गई है. इस कमिटी ने बांग्लादेश के टी20 कप्तान लिटन दास, टेस्ट कप्तान नजमुल हुसैन शांतो, असिस्टेंट कोच मोहम्मद सलाहुद्दीन, बीसीबी के वर्तमान प्रेसीडेंट तमीम इकबाल और सीईओ निजामुद्दीन चौधरी से बात की. इन सभी के बयान दर्ज किए गए. सबने टीम के हटने के फैसले के लिए नजरूल का नाम लिया. शांतो और लिटन ने बताया कि उन्होंने मीटिंग में कहा था कि खिलाड़ी वर्ल्ड कप में हिस्सा लेना चाहते हैं.
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेशी टीम के टी20 वर्ल्ड कप न खेल पाने के जिम्मेदार आसिफ नजरूल और तत्कालीन सरकार है. बांग्लादेश को निश्चित तौर पर वर्ल्ड कप में खेलना चाहिए था.




