बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड की महिला समिति के चेयरमैन रफीकुल इस्लाम बाबू ने एशिया कप के सेमीफाइनल में भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर से हाथ न मिलाने के निगार सुल्ताना के फैसले का बचाव किया,लेकिन साफ किया कि यह बोर्ड का फैसला नहीं था.पिछले साल पुरुषों के एशिया कप के बाद से दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनाव के कारण भारतीय कप्तानों ने अपने पाकिस्तानी समकक्षों से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया है. अचानक गुरुवार को निगार ने भी इसी राह पर चलने का फैसला किया.बाबू ने कहा कि बेशक यह उनका अपना फैसला था. हमारा मानना है कि खेल दुनिया को एक साथ लाते हैं. हम सभी देशों के साथ दोस्ताना रिश्ते चाहते हैं, न कि सिर्फ भारत के साथ, इसलिए उन्होंने जो कुछ भी किया, वह पूरी तरह से उनका निजी फैसला था.
एशियन गेम्स के बाद फैसला
क्रिकबज के अनुसार बाबू ने कहा कि हमने बोर्ड प्रेसिडेंट के साथ इस मामले (परफॉर्मेंस और शिकायत) पर पूरी चर्चा की है और चूंकि वे अभी एशियन गेम्स में व्यस्त हैं, इसलिए हम गेम्स खत्म होने के बाद स्थिति का आकलन करेंगे.सबसे पहले देखेंगे कि टीम एशियन गेम्स में कैसा प्रदर्शन करती है. फिर तय करेंगे कि आगे क्या करना है. उन्होंने आगे कहा कि टीम में कई कमियां हैं.बड़ी टीमों को हरा नहीं पाए हैं. वर्ल्ड कप में भी अच्छा खेला,लेकिन छोटी-छोटी गलतियों की वजह से हार गए. उन्होंने कहा कि हम टीम को और मजबूत और कॉम्पिटिटिव बनाने के लिए काम कर रहे हैं. एशियन गेम्स के बाद तय करेंगे कि क्या किया जा सकता है.
भारत ने सेमीफाइनल में बांग्लादेश को हराकर फाइनल में जगह बनाई, जहां 13 सितंबर को उसका मुकाबला डिफेंडिंग चैंपियन श्रीलंका से होगा, जिसने पाकिस्तान को चार विकेट से खिताबी मुकाबले में एंट्री की.




