इंग्लैंड के तेज गेंदबाज क्रेग माइल्स ने 32 साल की उम्र में प्रोफेशनल क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है. उन्होंने कहा कि अपनी मानसिक सेहत को बनाए रखने के लिए उन्हें इससे दूर रहने की ज़रूरत है. आखिरी बार जून में 'वाइटैलिटी ब्लास्ट' में खेलने वाले माइल्स ने सभी फॉर्मेट में 500 से ज़्यादा विकेट लेकर अपने 15 साल के करियर का समापन किया. ग्लॉस्टरशर की तरफ से जारी एक ओपन लेटर में माइल्स ने बताया कि क्रिकेट के साथ उनकी हालिया परेशानियां इतनी बढ़ गई थीं कि उन्हें संभालना मुश्किल हो गया था. उन्होंने लिखा कि दुख के साथ-साथ बहुत गर्व के साथ वह प्रोफेशनल क्रिकेट से अपने रिटायरमेंट की घोषणा कर रहे हैं. हालांकि यह फैसला बिल्कुल भी आसान नहीं था, लेकिन हाल के समय में खेल को लेकर उन्होंने जो संघर्ष किए हैं, उन्हें देखते हुए उन्होंने अपनी मानसिक सेहत को प्राथमिकता देने के लिए यह फैसला लिया है.
माइल्स का करियर
क्रेग माइल्स ने 111 फर्स्ट क्लास मैचों में 28.58 की औसत और 3.70 की इकॉनमी से 368 विकेट लिए हैं, जिसमें एक बार 10 विकेट होल और 18 बार फाइफर शामिल है. वहीं 57 लिस्ट ए मैचों में उनके नाम 38.78 की औसत और 6.33 की इकॉनमी से 66 विकेट है. 71 टी20 मैचों में उनके नाम 23.50 औसत औरा 8.79 इकॉनमी से 78 विकेट है.
मेंटल हेल्थ के कारण संन्यास लेने वाले स्टार खिलाड़ियों की लिस्ट में शामिल
इसी के साथ माइल्स उन क्रिकेटर्स की लिस्ट में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने मेंटल हेल्थ का हवाला देकर संन्यास लिया. इस लिस्ट में मार्कस ट्रेस्कोथिक, डेविड बेयरस्टो, जोनाथन ट्रॉट, एंड्रयू फ्लिंटॉफ, सारा टेलर, विल पुकोवस्की, माइकल यार्डी का भी नाम शामिल है.
मार्कस ट्रेस्कोथिक: इंग्लैंड के पास मार्कस ट्रेस्कोथिक के रूप में एक ज़बरदस्त ओपनर था, जिनका करियर मानसिक थकान और डिप्रेशन के कारण छोटा हो गया. ट्रेस्कोथिक ने निक नाइट के साथ मिलकर 'थ्री लायंस' के लिए एक शानदार ओपनिंग पार्टनरशिप बनाई. 32 साल की उम्र में जब उनका करियर अपने पीक पर था, 2006 के भारत दौरे के दौरान ट्रेस्कोथिक घर लौटना चाहते थे. उसी साल उन्होंने खेल से संन्यास की घोषणा की और बताया कि वह डिप्रेशन से जूझ रहे थे.
एंड्रयू फ्लिंटॉफ: हाल के सालों में इंग्लैंड क्रिकेट के सबसे बड़े स्टार्स में से एक ऑलराउंडर एंड्रयू फ्लिंटॉफ को भी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझना पड़ा, जिसके कारण उन्हें 2010 में अपने इंटरनेशनल करियर को अलविदा कहना पड़ा.
सारा टेलर: इंग्लैंड की एक और क्रिकेटर, जिन्हें मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा, वे विकेटकीपर-बल्लेबाज सारा टेलर थीं. उन्होंने अपने देश में 2017 का महिला विश्व कप जीता था. हालांकि टेलर ने एंग्जायटी (चिंता) से जुड़ी समस्याओं का हवाला देते हुए खेल से संन्यास की घोषणा करके इंग्लिश क्रिकेट जगत को चौंका दिया.
विल पुकोव्स्की: ऑस्ट्रेलिया के बेहद टैलेंटेड ओपनर विल पुकोव्स्की का करियर गंभीर और बार-बार होने वाले 'कनकशन' (सिर की चोट) से प्रभावित रहा. अपने करियर के दौरान उन्हें दस से ज़्यादा बार ऐसी चोटें लगीं, जिनमें से कई क्रिकेट के अलावा अन्य स्थितियों में लगी थीं. सिर की इन चोटों का असर उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत पर पड़ा, जिसके कारण आखिरकार उन्हें क्रिकेट छोड़ने का फैसला लेना पड़ा.
माइकल यार्डी: इंग्लैंड के माइकल यार्डी एक अनोखे लेकिन असरदार बाएं हाथ के स्पिनर और निचले क्रम के काबिल बल्लेबाज थे. वे इंग्लैंड की उस टीम का हिस्सा थे जिसने 2010 का T20 वर्ल्ड कप जीता था. हालांकि 2011 वर्ल्ड कप के दौरान यार्डी ने गंभीर डिप्रेशन (मानसिक अवसाद) के कारण टीम से अपना नाम वापस ले लिया. इसके बाद भी उन्होंने घरेलू क्रिकेट खेलना जारी रखा, लेकिन यार्डी कभी इंटरनेशनल क्रिकेट में वापसी नहीं कर पाए.
इन खिलाड़ियों ने मेंटल हेल्थ के कारण लिया था ब्रेक
कुछ बड़े खिलाड़ियों ने संन्यास लेने की बजाय अपने करियर को बचाने के लिए मेंटल हेल्थ के कारण क्रिकेट से ब्रेक लिया और फिर बाद में जोरदार वापसी भी की.
ग्लेन मैक्सवेल: ऑस्ट्रेलिया के इस ऑलराउंडर ने 2019 में मेंटल हेल्थ के लिए ब्रेक लिया था. क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया में उनके इस फ़ैसले की काफी तारीफ हुई.
बेन स्टोक्स: इंग्लैंड के दिग्गज ऑलराउंडर बेन स्टोक्स ने अपनी मानसिक सेहत पर ध्यान देने और उंगली की चोट से उबरने के लिए क्रिकेट के सभी फ़ॉर्मेट से अनिश्चितकालीन ब्रेक लिया था.




