इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) वैश्विक कैलेंडर में बड़े बदलावों के बारे में सोच रही है. इसके तहत दो से ज्यादा टीमों की सीरीज, एशिया कप की तरह महाद्वीपीय चैंपियनशिप, टी20 फ्रेंचाइज का वर्ल्ड कप, हरेक फॉर्मेट के लिए एक तय विंडो और वनडे मैचों की लंबाई में कटौती पर विचार-विमर्श किया जाएगा. इस बिंदुओं पर 8 जुलाई को एडिनबर्ग में आईसीसी जनरल काउंसिल की मीटिंग में बात हो सकती है. इस बारे में कंसल्टिंग फर्म मैकिंसी से मदद ली जा रही है.
ब्रिटिश अखबार गार्जियन की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह प्रक्रिया अभी शुरुआती स्टेज में है. आईसीसी तीनों फॉर्मेट के भविष्य को लंबे समय तक सुरक्षित करने के लिए बदलाव करना चाहता है. फ्रेंचाइज लीग्स के उभार के चलते इंटरनेशनल क्रिकेट पर खतरा मंडराया है. आईसीसी का फ्यूचर टूर्स प्रोग्राम अगले साल तक तय है. वहीं 2031 तक के लिए आईसीसी इवेंट और भारत, इंग्लैंड व ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमों का शेड्यूल तय हो रखा है. ऐसे में कोई भी बदलाव कुछ साल बाद ही लागू हो सकेगा.
रिपोर्ट में कहा गया है कि आईसीसी ऐसे फ्रेमवर्क बनाना चाह रही है जिससे कि तीनों फॉर्मेट इंटरनेशनल लेवल पर आगे बढ़ सके. इसके तहत हर फॉर्मेट के लिए एक तय विंडो रखी जा सकती है. वहीं वनडे क्रिकेट की लंबाई को कम किया जा सकता है. आईसीसी चाह रही है कि उसके पास ज्यादा इवेंट रहे. ऐसा इसलिए क्योंकि भारत, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमों के बिना होने वाली द्विपक्षीय सीरीज से आर्थिक लाभ नहीं हो रहा.
आईसीसी चाह रहा ज्यादा टूर्नामेंट
आईसीसी अभी महिला व पुरुष दोनों कैटेगरी में वनडे और टी20 वर्ल्ड कप कराता है. अब पुरुषों की तरह ही महिला क्रिकेट में चैंपियंस ट्रॉफी भी होगी जो अगले साल से शुरू की जाएगी. वहीं पुरुष क्रिकेट में टेस्ट फॉर्मेट में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप होती है जिसका फाइनल दो साल में एक बार होता है. आईसीसी कोशिश कर रहा है कि वह एशिया कप की तरह हर महाद्वीप का एक टूर्नामेंट कराए. साथ ही टी20 लीगों में खेल रही टीमों की वर्ल्ड क्लब चैंपियनशिप भी कराए. अभी तय नहीं है कि इस पर भारत का रुख क्या होता है.




