अगर देखा जाए तो मुझे यह किताब नहीं लिखनी चाहिए थी. मुझे सीढ़ियों में मृत पड़ मिलना चाहिए था. यहा कार में पैसेंजर सीट पर मरा पड़ा होता. या दोस्तों व परिवार से दूर ड्रेसिंग रूम में एक लकड़ी की एक ठंडी बेंच पर पड़ा होता.
जेम्स टेलर की ऑटोबायॉग्राफी 'Cut Short' के ये शुरुआती वाक्य हैं. टेलर इंग्लैंड के क्रिकेटर रहे हैं. 2012 से 2016 तक पांच साल का उनका इंटरनेशनल करियर रहा. यह अवधि बहुत छोटी सी है लेकिन इस दौरान जेम्स टेलर अपनी उपस्थिति क्रिकेट के मंच पर दर्ज करा गए. कद लंबाई में छोटा था लेकिन उपलब्धियों से भरा हुआ था. तभी तो पांच साल के करियर में ही उन्हें इंग्लैंड के अगले कप्तान के तौर पर देखा जा रहा था. वे बन भी जाते. मगर दिल ने साथ नहीं दिया.
जिस दिल की पसंद का काम जेम्स टेलर कर रहे थे उसी ने साथ नहीं दिया. नतीजतन 26 साल की उम्र में संन्यास लेना पड़ा. वह उम्र जिसमें बहुत से करियर शुरू होते हैं. कुछ अरमान इस उम्र में जगते हैं. उस 26 साल की उम्र में जेम्स टेलर का करियर ढल गया. क्रिकेट खेलना छूट गया. अस्पतालों के चक्कर शुरू हो गए. साथी खिलाड़ियों से मदद लेनी पड़ी. बीमारी से उबरे लेकिन क्रिकेटर से आगे पूर्व लिखा जाने लगा. बल्ला छूट गया.
छोटी कदकाठी का बड़ा खिलाड़ी
जेम्स की कदकाठी छोटी थी. लगभग पांच फीच 4 इंच के करीब. इस वजह से उन्हें टिच कहकर पुकारा जाने लगा. लेकिन जेम्स ने इसे कमजोरी नहीं माना. उन्होंने कहा कि खेल में उनकी लंबाई बाधा नहीं थी. वह अच्छे से हुक शॉट खेल सकते थे. बढ़िया तरीके से गैप निकाल सकते थे. तेज रन ले सकते थे. वह चुस्त और फुर्तीले फील्डर थे. 2012 में वह इंटरनेशनल क्रिकेट में उतरे लेकिन 2015 वह साल था जब जेम्स के खेल ने छाप छोड़ दी.
2015 वर्ल्ड कप जो इंग्लैंड के लिए किसी भयानक सपने जैसा था. उसमें इकलौती चमकती रोशनी जेम्स थे. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के सामने पहले ही मैच में 98 रन की पारी खेली. वह आराम से शतक पूरा कर लेते लेकिन कुमार धर्मसेना के गलत फैसले से ऐसा हो न सका. भले ही इंग्लिश टीम हार गई हो लेकिन जेम्स ने अपनी पारी से सबका ध्यान खींचा. 92 पर छह विकेट गिरने के बाद छठे नंबर पर बैटिंग करते हुए जेम्स ने वह पारी खेली थी. इससे 15 दिन पहले भारत के खिलाफ नंबर तीन पर आकर 82 रन बनाए और तब हाथ से निकले मैच में टीम को जीत दिलाई थी.
जेम्स टेलर ने संन्यास के बाद क्या किया
जेम्स जो बतौर क्रिकेटर करियर में आगे जाने का सपना देख रहे थे. उन्हें अब बीमारी के इलाज के लिए मदद की दरख्वास्त करनी पड़ रही थी. इंग्लिश टीम के उनके साथियों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया और 25 हजार पाउंड जुटाए. इससे जेम्स ठीक हो गए लेकिन बतौर खिलाड़ी करियर खत्म हो गया. वे 2018 में इंग्लिश टीम के सेलेक्टर बने. उनके नेतृत्व में 2019 में वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम चुनी गई. 2022 तक वे इस पद पर रहे. बाद में लेस्टरशर के बैटिंग कोच बने.
जब जेम्स को हार्ट की बीमारी के चलते क्रिकेट से दूर होना पड़ा तब वे इंग्लैंड के कप्तान बनने के करीब थे. सब सही रहता तो शायद 2019 वर्ल्ड कप में वे इंग्लिश कप्तान होते.
Duleep Trophy के लिए नॉर्थ जोन स्क्वॉड का ऐलान, 24 साल का सूरमा बना कप्तान




