लेस्टरशर पर 27 पॉइंट की पेनल्टी लगाई गई है, जिससे अब काउंटी चैंपियनशिप में उस पर रेलीगेशन का खतरा मंडरा रहा है. लेस्टरशर पर यह पेनल्टी अगस्त में ग्लेमॉर्गन के खिलाफ काउंटी चैंपियनशिप में जीत के दौरान ECB के पिच नियमों का उल्लंघन करने के कारण लगाया गया है. इस पेनल्टी के बाद टीम अब डिवीजन वन से नीचे आ सकती हैं. अब वे इस फैसले के खिलाफ अपील करने पर विचार कर रहे हैं.
असमान उछाल खराब रेटिंग के लिए काफी
यह फ़ैसला लेस्टरशर के सीजन के दूसरे आखिरी मैच (हैम्पशर के ख़िलाफ) के बीच में आया है और इसके कारण वे टेबल में सबसे नीचे हैम्पशर की जगह ले लेंगे. रेगुलेटर ने मुख्य कारण असमान उछाल (अनइवन बाउंस) को बताया, जो खराब रेटिंग के लिए काफी है और यह चलती हुई दरारों और दरारों के जंक्शन पर स्थानीय स्तर पर धंसने के कारण हुआ था. उछाल पर मैच की शुरुआत में बनी गेंद के निशान और घास के कई बड़े गुच्छों का भी असर पड़ा. मैच रेफरी इयान रैमेज ने अपने मैच लॉग में असमान उछाल के 43 उदाहरण दिए. आरोप पर लेस्टरशर की औपचारिक प्रतिक्रिया में माना गया कि पिच खराब स्तर की थी, लेकिन सज़ा की गंभीरता इस बात पर आधारित है कि पहचानी गई कमियां अपनाई गई तैयारी का अनुमानित परिणाम थीं और LCCC की पेशेवर ग्राउंड्स टीम को उचित रूप से इनकी उम्मीद करनी चाहिए थी और इन्हें ठीक करना चाहिए था.
दोनों सिरों पर 3mm घास छोड़ी गई
काउंटी ने वैसी ही पिच तैयार करने की कोशिश की थी जैसी उन्होंने जून में यॉर्कशर के खिलाफ मैच के लिए बनाई थी, जिसमें उन्होंने एक पारी और 39 रनों से जीत हासिल की थी. ग्लेमॉर्गन के साथ हुए मैच के लिए पिच के दोनों सिरों पर 3mm घास छोड़ी गई थी, जबकि बीच का हिस्सा 16mm घास के साथ ज़्यादा हरा-भरा था. जिस पिच को चुना गया था, उस पर पिछले 10 सप्ताह में दो T20 मैच खेले जा चुके थे और वह दो महीने तक तेज गर्मी का सामना कर चुकी थी. इस वजह से यॉर्कशर वाली पिच की तुलना में यह मिट्टी काफ़ी सूखी थी, इसलिए इसमें दरारें पड़ने की संभावना ज़्यादा थी और यह ज़्यादा सख़्त भी थी.
बढ़ जाती है अनियमित उछाल की संभावना
'द रेगुलेटर' के साथ एक इंटरव्यू में लेस्टरशर के हेड ग्राउंड्स मैनेजर कैलम लेविन ने माना कि उन हालात में वे ऐसी पिच तैयार नहीं करते. नमी को लेकर अपनी चिंताओं के कारण उन्होंने कहा कि क्रिकेट डायरेक्टर क्लॉड हेंडरसन और हेड कोच अल्फोंसो थॉमस के साथ बातचीत बहुत मुश्किल रही होगी, क्योंकि उन्होंने यॉर्कशर जैसी पिच की मांग की थी और पिच तैयार करने में आखिरी फैसला उन्हीं का होता है. लेविन ने यह भी कहा कि उन्हें दरारों की वजह से बनने वाले बहुत छोटे टुकड़ों की सामान्य से ज़्यादा संख्या को लेकर भी चिंता थी, जिससे गेंद के अनियमित उछाल (irregular bounce) की संभावना बढ़ जाती है.




