भारतीय क्रिकेट टीम को हालिया समय में खिलाड़ियों की चोटों ने काफी परेशान किया है. खिलाड़ी चोटों से उबरने के बाद फिर से अनफिट हो रहे. तेज गेंदबाज हर्षित राणा, ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी और जसप्रीत बुमराह इसके उदाहरण हैं. ऐसे में बीसीसीआई ने अब फिटनेस टेस्ट में एक मानक बनाने का फैसला किया है. खिलाड़ियों को फिट करार देने से पहले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ब्रोंको टेस्ट और दो किलोमीटर की दौड़ होगी. इसमें पास होने पर ही फिटनेस सर्टिफिकेट दिया जाएगा.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ब्रोंको और दो किलोमीटर की दौड़ को बुनियादी फिटनेस पैरामीटर बनाने की कोशिश कर रहा है. यह सामने आया है कि अभी इस तरह की प्रक्रिया नहीं है जिससे फिटनेस स्टेंडर्ड में गिरावट देखने को मिली है. एड्रियन लेरू के स्ट्रेंथ व कंडीशनिंग कोच बनने के बाद से भारतीय टीम की फिटनेस टेस्टिंग में बदलाव आया है. लेकिन टीम मैनेजमेंट और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस मिलकर काम नहीं कर पाए हैं. लेरू का जोर ब्रोंको टेस्ट पर रहता है जबकि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में यो यो टेस्ट के जरिए फिटनेस जांच जा रही थी.
टाइम्स ऑफ इंडिया रिपोर्ट कहती है कि बीसीसीआई मेडिकल टीम ने 5.15-5.20 मिनट को ब्रोंको टेस्ट का बुनियादी पैरामीटर तय किया है. इतने समय में टेस्ट पूरा करने पर ही फिटनेस टेस्ट में पास किया जाएगा. अभी तक ब्रोंको टेस्ट का कोई बुनियादी पैरामीटर भी नहीं था. इसके साथ ही दो किलोमीटर की दौड़ को 9-10 मिनट में पूरा करने का मानक तय हुआ है. इससे पहले तक यो यो टेस्ट में बीसीसीआई ने 16.5 को मानक तय किया था. यह टेस्ट विराट कोहली के कप्तान रहते अनिवार्य किया गया था.
भारत को हालिया समय में निराशाजनक नतीजे मिले हैं. उसे आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर लिमिटेड ओवर्स सीरीज में हार मिली. इस दौरान लगातार खिलाड़ी चोटिल होते रहे. नतीजतन बीसीसीआई को फिटनेस के मसले पर कदम उठाना पड़ा है.




