युवराज सिंह ने भारत को 2027 वर्ल्ड कप की स्क्वॉड को लेकर चेताया है. उनका कहना है कि अगर अगले साल होने वाले आईसीसी इवेंट में सफलता हासिल करनी है तो सबसे अच्छी टीम चुननी होगी. फिर उन्हें लगातार खेलने के मौके देने चाहिए. भारत की 2011 वर्ल्ड कप जीत के हीरो ने कहा कि आखिर में जाकर बड़े बदलाव करना भारी पड़ सकता है. ऐसा पहले हो चुका है. 2027 वर्ल्ड कप साउथ अफ्रीका, नामीबिया और जिम्बाब्वे की मेजबानी में अक्टूबर-नवंबर में होना है.
भारत ने आखिरी बार 2011 में वनडे वर्ल्ड कप जीता था. इसके बाद दो एडिशन में उसका सफर सेमीफाइनल में समाप्त हुआ तो 2023 में घर पर खेले गए एडिशन में भारत फाइनल में हारा. भारतीय क्रिकेट टीम इस महीने के अंत में वेस्ट इंडीज के साथ वनडे सीरीज खेलेगी. इसके बाद उसे न्यूजीलैंड, श्रीलंका, जिम्बाब्वे, एशिया कप 2027 में 50 ओवर के मुकाबले खेलने हैं. भारतीय टीम में हालिया समय में रोहित शर्मा के सेलेक्शन को लेकर संदेह रहा है. हालांकि इस बल्लेबाज ने इंग्लैंड में खेले गए आखिरी वनडे में शतक जमाया था.
युवराज सिंह ने भारतीय टीम के सेलेक्शन पर क्या कहा
44 साल के युवराज ने साफ किया कि जिन खिलाड़ियों को चुना जाए उन्हें लगातार मौके मिले. वे वर्ल्ड कप तक खेलते रहे. उन्होंने रोहित और विराट कोहली का नाम लिए बिना कहा कि खिलाड़ियों का सपोर्ट करना और उन पर भरोसा करना जरूरी है. युवी ने Cricinfo से बात करते हुए कहा,
उन्हें एक साल बाद खेलने के लिए अभी से वैसी ही टीम बनाने पर ध्यान देना चाहिए. आप आखिरी समय में बड़े बदलाव नहीं करना चाहेंगे. तुम्हारे खिलाड़ी चाहे 16 हों या 20, यह ज़रूरी है कि सभी को बराबर खेलने का मौका मिले क्योंकि अब T20 ज्यादा खेले जा रहे हैं और वनडे मुकाबले कम. जो भी मैच हो उनमें खिलाड़ियों को वर्ल्ड कप की तैयारी के लिए खेलने के लिए पर्याप्त समय मिलना ज़रूरी है. जब भी भारतीय टीम लड़खड़ाई है तो ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि आखिरी समय में या टूर्नामेंट के दौरान टीम में बड़े बदलाव किए गए. इसलिए मुझे लगता है कि यह जरूरी है कि हम उस टीम पर भरोसा बनाए रखें जो 2027 का वर्ल्ड कप जीत सकती है. चाहे वे सफल हों या असफल उस समय तक उन खिलाड़ियों को सपोर्ट करें. टीम पर भरोसा होना बहुत ज़रूरी है.
युवराज बोले- टीम में होने चाहिए 11 मैच विजेता
युवराज ने सलाह दी है कि जो भी खिलाड़ी टीम को मैच जिता सकते हैं उन पर ध्यान दिया जाए. सिर्फ यह न देखा जाए कि वह ऑलराउंडर है या नहीं. हर देश की अपनी ताकत है. टीम में 11 मैच विजेता होने चाहिए फिर चाहे वह स्पिनर हो या बल्लेबाज या ऑलराउंडर. ऑस्ट्रेलिया इसका एक उदाहरण है. उनके पास मैच विजेता होते हैं जो अपने दम पर मैच को निकाल ले जाते हैं.




