भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारतीय क्रिकेटरों की इंजरी मैनेजमेंट, रिकवरी और चयन प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा की है. किसी खिलाड़ी के चोटिल होने के बाद उसकी पहचान, पुनर्वास और दो आरटीपी (रिटर्न टू प्ले) मैच खेलने के बाद ही उसे पूरी तरह फिट घोषित किया जाता है. चयन समिति द्वारा टीम का चयन दौरे से तीन से चार हफ्ते पहले किए जाने के कारण 'सब्जेक्ट टू फिटनेस' टैग का इस्तेमाल होता है, ताकि खिलाड़ियों को फिटनेस साबित करने का समय मिल सके. खिलाड़ियों के फिटनेस आकलन के लिए यो-यो टेस्ट के साथ-साथ नए ब्रोंको टेस्ट की शुरुआत की गई है, जो एनेरोबिक क्षमता और कंडीशनिंग की जांच करता है. इसके अलावा, तेज गेंदबाजों और ऑलराउंडरों के वर्कलोड मैनेजमेंट के लिए जीपीएस तकनीक और साप्ताहिक मॉनिटरिंग का उपयोग किया जा रहा है.
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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारतीय क्रिकेटरों की इंजरी मैनेजमेंट, रिकवरी और चयन प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा की है. किसी खिलाड़ी के चोटिल होने के बाद उसकी पहचान, पुनर्वास और दो आरटीपी (रिटर्न टू प्ले) मैच खेलने के बाद ही उसे पूरी तरह फिट घोषित किया जाता है. चयन समिति द्वारा टीम का चयन दौरे से तीन से चार हफ्ते पहले किए जाने के कारण 'सब्जेक्ट टू फिटनेस' टैग का इस्तेमाल होता है, ताकि खिलाड़ियों को फिटनेस साबित करने का समय मिल सके. खिलाड़ियों के फिटनेस आकलन के लिए यो-यो टेस्ट के साथ-साथ नए ब्रोंको टेस्ट की शुरुआत की गई है, जो एनेरोबिक क्षमता और कंडीशनिंग की जांच करता है. इसके अलावा, तेज गेंदबाजों और ऑलराउंडरों के वर्कलोड मैनेजमेंट के लिए जीपीएस तकनीक और साप्ताहिक मॉनिटरिंग का उपयोग किया जा रहा है.
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