इस चर्चा में भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों की चोटों, रिहैब और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) की भूमिका पर बातचीत की गई है। चर्चा के अनुसार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का मुख्य कार्य हाई परफॉर्मेंस ट्रेनिंग, स्किल डेवलपमेंट, टैलेंट पूल तैयार करना और इंजरी मैनेजमेंट के साथ रिहैब कराना है। खिलाड़ियों की सर्जरी के बाद रिहैब प्रक्रिया, फिटनेस टेस्ट और मैच सिमुलेशन टेस्ट पास करने के बाद रिपोर्ट चयनकर्ताओं को सौंपी जाती है। इसके बाद खिलाड़ियों के चयन का अंतिम फैसला चयनकर्ताओं और टीम मैनेजमेंट का होता है। इसके साथ ही इस बात पर भी विचार किया गया कि घरेलू क्रिकेट और अंडर-19 स्तर से भारतीय टीम के लिए खिलाड़ियों का टैलेंट पूल किस तरह तैयार हो रहा है। चर्चा में चयन समिति, टीम मैनेजमेंट और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के बीच समन्वय और जिम्मेदारियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर रोशनी डाली गई है।
क्या सेंटर ऑफ एक्सीलेंस खिलाड़ियों की फिटनेस सुधारने में नाकाम हो रहा है?
इस चर्चा में भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों की चोटों, रिहैब और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) की भूमिका पर बातचीत की गई है। चर्चा के अनुसार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का मुख्य कार्य हाई परफॉर्मेंस ट्रेनिंग, स्किल डेवलपमेंट, टैलेंट पूल तैयार करना और इंजरी मैनेजमेंट के साथ रिहैब कराना है। खिलाड़ियों की सर्जरी के बाद रिहैब प्रक्रिया, फिटनेस टेस्ट और मैच सिमुलेशन टेस्ट पास करने के बाद रिपोर्ट चयनकर्ताओं को सौंपी जाती है। इसके बाद खिलाड़ियों के चयन का अंतिम फैसला चयनकर्ताओं और टीम मैनेजमेंट का होता है। इसके साथ ही इस बात पर भी विचार किया गया कि घरेलू क्रिकेट और अंडर-19 स्तर से भारतीय टीम के लिए खिलाड़ियों का टैलेंट पूल किस तरह तैयार हो रहा है। चर्चा में चयन समिति, टीम मैनेजमेंट और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के बीच समन्वय और जिम्मेदारियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर रोशनी डाली गई है।
SportsTak
अपडेट:

