भारत और पाकिस्तान के बीच खेलों को लेकर खेल मंत्रालय अपने फैसले पर पूरी तरह से अटल है. पिछले साल ही खेल मंत्रालय ने इस बात का ऐलान किया था कि किसी भी खेल में भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय (बाइलेटरल) मैच नहीं होंगे. हालांकि, वैश्विक स्तर पर होने वाले टूर्नामेंट के लिए पाकिस्तान के खिलाड़ियों को भारत आने से रोका नहीं जाएगा. इतना ही नहीं, मंत्रालय ने खिलाड़ियों, टीम अधिकारियों, तकनीकी कर्मचारियों और अंतरराष्ट्रीय खेल संचालन संस्थाओं के पदाधिकारियों के लिए वीजा प्रक्रिया को आसान बनाने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई है, ताकि भारत को एक ‘पसंदीदा खेल स्थल’ के रूप में स्थापित किया जा सके.
वहीं अंतरराष्ट्रीय और वैश्विक टूर्नामेंट की बात करें, तो चाहे वे भारत में हों या विदेश में, भारत अंतरराष्ट्रीय खेल संचालन प्रणाली में हस्तक्षेप नहीं करेगा, क्योंकि ये खिलाड़ियों के हित में होते हैं. भारतीय टीमें या व्यक्तिगत खिलाड़ी उन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते रहेंगे, जिनमें पाकिस्तान की टीमें या खिलाड़ी भी शामिल होते हैं.
खेल मंत्रालय ने क्यों उठाया था सख्त नियम ?
इस तरह की योजना का ऐलान सबसे पहले पिछले साल अगस्त में हुआ था. इसके बाद से खेल मंत्रालय ने पाकिस्तान के साथ खेल संबंधों पर सख्त रुख बनाए रखा है. यह फैसला उस समय सामने आया था, जब यूएई में होने वाले एशिया कप में भारत के भाग लेने को लेकर काफी विवाद हुआ था. इस टूर्नामेंट में पाकिस्तान भी खेल रहा था और इसका आयोजन पहलगाम में हुए आतंकी हमले के कुछ महीने बाद ही हुआ था, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी.
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