रणजी ट्रॉफी 2026-27 सीजन में क्यों नहीं हो रहा है DRS का इस्तेमाल, क्या नॉकआउट में होगी वापसी? जानें पूरी कहानी

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जम्मू एंड कश्मीर टीम के खिलाड़ी
जम्मू एंड कश्मीर टीम के खिलाड़ी

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रणजी ट्रॉफी 2026-27 सीजन की शुरुआत 11 अक्टूबर से हुई

लीग स्टेज के मुकाबलों में DRS की सुविधा उपलब्ध नहीं है

रणजी ट्रॉफी 2026-27 सीजन का आगाज हो चुका है. इसके पहले दिन टेस्ट टीम इंडिया से खेलने वाले बल्लेबाज केएल राहुल और यशस्वी जायसवाल जहां फ्लॉप रहे, वहीं टीम इंडिया से बाहर चल रहे शमी ने अपनी गेंदबाजी से कहर बरपा दिया. बंगाल की टीम से खेलने वाले शमी ने चार विकेट चटकाए और दिल्ली को 240 रन पर ही रोक दिया. अब रणजी ट्रॉफी के 2026-27 सीजन का आगाज हो चुका है, तो सभी के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर रणजी ट्रॉफी के मैचों में डिसीजन रिव्यू सिस्टम (DRS) क्यों नहीं है और इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण क्या है. जबकि रणजी ट्रॉफी के लीग स्टेज के मुकाबले समाप्त होने के बाद क्या क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल जैसे मैचों में इसका इस्तेमाल होगा? इन सभी सवालों के जवाब सामने आ गए हैं.

रणजी ट्रॉफी के लीग स्टेज में अब DRS की बात करें, तो इसकी व्यवस्था नहीं है. यानी रणजी ट्रॉफी के लीग स्टेज मुकाबलों में अगर एक बार अंपायर ने आपको आउट दे दिया, तो बल्लेबाज को हर हाल में पवेलियन जाना होगा और उसकी एक भी नहीं सुनी जाएगी. वहीं, अगर अंपायर ने आउट नहीं दिया, तो गेंदबाजों के पास भी अपील करने का दूसरा विकल्प नहीं है. इसके चलते DRS घरेलू क्रिकेट में एक बड़ा सवाल बना हुआ है.

रणजी ट्रॉफी में क्यों नहीं है DRS?

अब रणजी ट्रॉफी के दौरान एक दिन में एक या दो नहीं, बल्कि कुल मिलाकर 18 से 19 मैच एक साथ होते हैं. इसके चलते लीग स्टेज में हर एक मैच का प्रसारण संभव नहीं हो पाता, तो DRS की सुविधा देना काफी दूर की बात है. क्योंकि DRS आसानी से सेट नहीं होता है. यह उन मैचों में थोड़ा आसान हो जाता है, जिनका प्रसारण हो रहा होता है. लेकिन रणजी ट्रॉफी के बहुत ही कम चुनिंदा मैचों का प्रसारण संभव हो पाता है. इस लिहाज से DRS का इस्तेमाल नहीं हो पाता.

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यह तकनीक काफी महंगी भी है और आर्थिक कारणों के चलते एक साथ 18 से 19 मैदानों पर DRS का सेटअप लगाना मुश्किल है. इसमें बॉल ट्रैकिंग, स्निकोमीटर और हॉट स्पॉट जैसी सुविधाएं शामिल होती हैं. इन सभी चीजों को इंस्टॉल करने में बहुत अधिक खर्च होता है, जिसके चलते बीसीसीआई रणजी ट्रॉफी के सभी मुकाबलों में DRS का इस्तेमाल नहीं करती है. हालांकि, साल 2020 के बाद से इस टूर्नामेंट के नॉकआउट मैचों में DRS का इस्तेमाल होते देखा गया है.

इसके बाद 2022-23 रणजी ट्रॉफी सीजन में पूर्ण DRS का इस्तेमाल हुआ, तो फिर बाद में साल 2023-24 सीजन में दोबारा सीमित DRS का इस्तेमाल किया गया था. इसके अलावा, पिछले सीजन के एक सेमीफाइनल में पूरी तरह से DRS का इस्तेमाल हुआ, लेकिन दूसरे में तकनीकी खामी आ गई थी. इसके चलते एक मैच में ऐसा नहीं हो सका और विवाद भी हुआ था.

हालांकि, इतना कहा जा सकता है कि बीते छह सालों से रणजी ट्रॉफी के नॉकआउट यानी सेमीफाइनल और फाइनल जैसे मैचों में DRS का इस्तेमाल होता आ रहा है.

क्या रणजी ट्रॉफी 2026-27 के नॉकआउट में होगा DRS?

रणजी ट्रॉफी 2026-27 सीजन को लेकर अभी तक बीसीसीआई ने कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया है. लेकिन माना जा रहा है कि रणजी ट्रॉफी के लीग स्टेज के मैच समाप्त होने के बाद नॉकआउट मैचों, जैसे कि सेमीफाइनल और फाइनल में सीमित DRS या फिर पूर्ण DRS का इस्तेमाल किया जा सकता है.

रणजी ट्रॉफी 2026-27 के नॉकआउट मैच कब शुरू होंगे?

रणजी ट्रॉफी अब एक साथ नहीं, बल्कि दो चरणों में खेली जाती है. पहला चरण 11 अक्टूबर यानी आज से लेकर 5 नवंबर तक खेला जाएगा. इसके बाद सैयद मुश्ताक अली टी20 ट्रॉफी और फिर विजय हजारे लिस्ट ए ट्रॉफी खेली जाएगी.

इसके बाद रणजी ट्रॉफी का दूसरा चरण 17 जनवरी से लेकर 4 फरवरी तक खेला जाएगा. वहीं, क्वार्टर फाइनल मुकाबलों की शुरुआत 9 फरवरी से होगी, जबकि फाइनल मुकाबला 27 फरवरी से लेकर 3 मार्च तक खेला जाएगा. इस लिहाज से सेमीफाइनल और फाइनल में फैंस को DRS देखने को मिल सकता है.

रणजी ट्रॉफी पिछले सीजन कौन जीता और अभी तक सबसे अधिक बार कौन जीत चुका है?

रणजी ट्रॉफी 2025-26 सीजन का खिताब पहली बार जम्मू-कश्मीर की क्रिकेट टीम ने जीता था. भारतीय क्रिकेट के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ, जब जम्मू-कश्मीर की क्रिकेट टीम ने भारत का सबसे प्रतिष्ठित घरेलू क्रिकेट टूर्नामेंट अपने नाम किया.

वहीं, सबसे अधिक 42 बार रणजी ट्रॉफी का खिताब मुंबई की टीम जीत चुकी है. इसके बाद आठ बार कर्नाटक और सात बार दिल्ली की टीम रणजी ट्रॉफी जीत चुकी है.

अब 2026-27 सीजन में एलीट ग्रुप में 32 टीमें खेल रही हैं, तो प्लेट ग्रुप में भी छह टीमें शामिल हैं. इस तरह देखा जाए, तो रणजी ट्रॉफी के जरिए एक साथ 38 टीमें क्रिकेट के महाकुंभ में उतरती हैं. इस ट्रॉफी को भारतीय क्रिकेट की बैकबोन यानी रीढ़ की हड्डी माना जाता है.

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