भारत में हमेशा से एक कहावत काफी प्रचलित रही है कि 'पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे कूदोगे बनोगे खराब'. लेकिन जब भी भारत का कोई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करता है तो इस लाइन को सोशल मीडिया में झूठ बताकर काफी ट्रेंड किजा जाता है. जबकि अब युवा पीढ़ी स्पोर्ट्स को लेकर काफी जागरूक हो चली है. भारत में अब स्पोर्ट्स का मतलब सिर्फ क्रिकेट ही नहीं बल्कि ये हॉकी से होते हुए जैवलिन थ्रो तक जा चुका है. भारत की मिट्टी ने हॉकी के जादूगर मेजर ध्यान चंद, सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली, और नीरज चोपड़ा जैसे तमाम दिग्गज दिए. जिनके बूते स्पोर्ट्स अब धीरे-धीरे भारतीयों की जीवनशैली बनता जा रहा है. ऐसे में चलिए जानते हैं कि 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस क्यों मनाया जाता है और इसका हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यान चंद से क्या कनेक्शन है.
साल 2012 से हुई थी शुरुआत
राष्ट्रीय खेल दिवस की बात करें तो साल 2012 में इसका ऐलान किया गया था. जिसके बाद से हर साल इस दिन राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है. साल 2019 में इस दिन ही फिट इंडिया मूवमेंट का आगाज हुआ और ये भी भारतवासियों में फिटनेस के प्रति जागरूकता को लेकर एक मील के पत्थर के तरह साबित हुआ.
साल 2025 की क्या है थीम ?
साल 2025 के राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर खेल मंत्रालय ने ऐलान किया कि फिट इंडिया मिशन ही राष्ट्रीय खेल दिवस का नेतृत्व करेगा. 29 अगस्त से लेकर 31 अगस्त तक 'एक घंटा खेल के मैदान में' नेशनल कैंपेन को लांच किया गया. जिसका मकसद हर दिन नागरिकों को एक घंटा तक अपनी शारीरिक गतिविधि को भी टाइम देना है. सका प्रमुख उद्देश स्वास्थ्य को बढ़ावा देना और बीमारियों को दूर रखना है. इतना ही नहीं 31 अगस्त को पूरे भारत में साइकिलिंग कार्यक्रम भी होगा.