फीफा वर्ल्ड कप 2026 का रोमांच इन दिनों अमेरिका और मैक्सिको की भयानक गर्मी के बीच चरम पर है. मैदान के अंदर से लेकर बाहर तक वर्ल्ड कप खेलने वाले खिलाड़ियों को हीट वेव का सामना करना पड़ रहा है. इससे निजात पाने के लिए वर्ल्ड कप के पहले ही मैच में साउथ अफ्रीका के खिलाड़ी एक स्पेशल स्पेस जैकेट पहने नजर आए थे. जिसके बारे में जानकारी सामने आई कि इस स्पेस जैकेट का इस्तेमाल गर्मी से निजात पाने के लिए किया जा रहा है. इसके अलावा एक स्पेशल तरह के जूते भी एडिडास ने बनाए हैं, जो तुरंत पैरों को ठंडा कर देते हैं. ऐसे में चलिए जानते हैं कि कौन-कौन सी बड़ी टीमें इन स्पेस जैकेट्स का इस्तेमाल कर रही हैं और कैसे इनका इजाद हुआ.
साल 2012 से जारी रिसर्च
एडिडास ने साल 2012 से ही खिलाड़ियों के लिए कूलिंग वेस्ट पर काम करना शुरू कर दिया था. साल 2016 के रियो ओलंपिक से पहले कंपनी ने पहला कूलिंग वेस्ट तैयार कर लिया था. इसके बाद भी यूनिवर्सिटी और लैब्स में कई सालों तक रिसर्च चलती रही. जिसके अनुसार अलग-अलग मौसम में खिलाड़ियों का वेस्ट के साथ परीक्षण भी किया गया. करीब 12 साल तक रिसर्च चलने के बाद सबसे असरदार कूलिंग वेस्ट और जैकेट तैयार किया गया और इसका पहली बार इस्तेमाल फॉर्मूला वन रेसिंग में हुआ.
फॉर्मूला वन में पहली बार हुआ इस्तेमाल
फॉर्मूला वन में मिडिल ईस्ट की भीषण गर्मी में होने वाली रेस के दौरान कूलिंग वेस्ट का इस्तेमाल सबसे पहले मर्सिडीज के ड्राइवर जॉर्ज रसेल और किमी एंटोनेली ने किया. इन दोनों ने रेस शुरू होने से पहले कूलिंग वेस्ट के ऊपर यह जैकेट पहनी. इससे रेस के दौरान भीषण गर्मी के बावजूद उनके शरीर का तापमान ठीक रहा और एडिडास को सकारात्मक रिव्यू भी मिले. साल 2025 में फॉर्मूला वन में सफलता मिलने के बाद अब साल 2026 में भी तमाम ड्राइवर इसका इस्तेमाल कर रहे हैं.
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अर्जेंटीना जैसी टीम भी कर रही है इसका इस्तेमाल
वर्ल्ड कप में भाग लेने वाली 48 में से 14 देशों की टीमें इन जैकेट्स, वेस्ट और ओवरशू का इस्तेमाल कर रही हैं. इनमें अर्जेंटीना, स्पेन, जर्मनी और मैक्सिको जैसी टीमें प्रमुख रूप से शामिल हैं. स्पेन की टीम के फिजियो क्रूज ने बताया कि ये जैकेट्स खिलाड़ियों के शरीर का तापमान तेजी से कम कर रही हैं. जिससे खिलाड़ी इनका इस्तेमाल ट्रेनिंग के बाद, वॉर्म-अप से पहले और हाफ टाइम के दौरान भी कर रहे हैं.
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