'हल्दी, अदरक, काढ़ा', फीफा वर्ल्ड कप 2026 में कैसे रिकवरी कर हैं हालैंड-हैरी केन जैसे सुपरस्टार ख‍िलाड़ी?

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 इंग्लैंड की टीम मांसपेशियों की सूजन से निपटने के लिए हल्दी वाला काढ़ा पी रही है. (PC: Getty)
इंग्लैंड की टीम मांसपेशियों की सूजन से निपटने के लिए हल्दी वाला काढ़ा पी रही है. (PC: Getty)

Story Highlights:

इंग्लैंड की टीम मांसपेशियों की सूजन से निपटने के लिए हल्दी वाला काढ़ा पी रही है.

रिकवरी के लिए खास तौर पर लेजर रूम बनाए गए हैं.

हैरी केन, एर्लिंग हालैंड जैसे सुपरस्टार ख‍िलाड़ी फीफा वर्ल्ड कप 2026 में छाए हुए हैं. हर मैच में ये ख‍िलाड़ी कमाल पर कमाल कर रहे हैं. हर मैच में ये बिल्कुल तरोताजा नजर आ रहे हैं. थकान, चोट, दर्द न तो इनके चेहरे पर द‍िख रहा है और न ही इनके खेल में, बल्क‍ि जैसे- जैसे टूर्नामेंट आगे बढ़ रहा है, खिलाड़‍ियों की एनर्जी और ज्यादा बढ़ गई है. उनकी इस एनर्जी और तेजी से रिकवरी के पीछे का असली राज हल्दी, अदरक, काढ़ा, कच्चा दूध है. जिसका इस्तेमाल वह वर्ल्ड कप में रिकवरी के लिए कर रहे हैं. 

रिकवरी के लिए पूरा एक दिन

इस मैच में कम समय में लगातार मैच खेले गए और ज्यादातर मुकाबलों का नतीजा आखिरी पलों तक तय नहीं हो पाता था, इसलिए खिलाड़ियों को रिकवरी के लिए पूरा एक दिन लग जाता था. एनर्जी की कमी को पूरा करने के लिए कार्ब्स और प्रोटीन लेने के अलावा, हैरी केन और उनके साथी खिलाड़ी के लिए सालों तक एप्सम सॉल्ट का इस्तेमाल करने के बाद अब आइस बाथ एक रूटीन बन गया है. इंग्लिश टीम इन्फ्रारेड थेरेपी के लिए लेजर भी साथ ले जाती है. 

रिकवरी के लिए लेजर रूम

इसके अलावा रिकवरी के लिए 8 डिग्री तक ठंडे आइस टब के अलावा एक और नई चीज अपनाई जा रही है और वो है  90 डिग्री वाले सॉना में बैठना. हालैंड जैसे खिलाड़ी ऐसा करते हैं, जिन्होंने अपने घर में £50,000 (64 लाख रुपये) का क्रायोथेरेपी चैंबर भी लगवाया हुआ है. वर्ल्ड कप के दौरान टीमों के साथ खाने-पीने की चीजों की तरह ही आइस बाथ यूनिट्स भी लेकर जाते हैं. रिकवरी के लिए खास तौर पर लेजर रूम बनाए गए हैं. हालैंड कुछ ऐसा ही मैनचेस्टर सिटी में भी कर रहे हैं. इन्फ्रारेड रूम में समय बिताने से शरीर का तापमान सीधे बढ़ता है और मांसपेशियों को आराम मिलता है. हालैंड की डाइट में पालक और कच्चे दूध का मिश्रण, टोमाहॉक स्टेक और बीफ का दिल और लिवर शामिल हैं. 


टेक्नोलॉजी से मदद

स्पेन ने र‍िकवरी के लिए EMTT (एक्स्ट्राकॉर्पोरियल मैग्नेटो ट्रांसडक्शन थेरेपी) और NESA (न्यूरोमस्कुलर इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन) जैसी एडवांस्ड थेरेपी को बहुत पहले ही अपना लिया था. EMTT में शरीर के अंदर तेजी से मैग्नेटिक वेव सिग्नल भेजे जाते हैं. इसे 'स्पीड बैटरी चार्जर' जैसा माना जाता है, जो दर्द के सिग्नल को रोकने और टिश्यू रिपेयर की प्रक्रिया को तेज करने में मदद करते हैं. NESA में इलेक्ट्रिक माइक्रो-करंट इम्पल्स का इस्तेमाल होता है, जो नर्वस सिस्टम को दर्द कम करने और सूजन घटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए प्रेरित करते हैं.