फीफा वर्ल्ड कप 2026 जीतने के बाद स्पेन के जश्न ने दुनिया भर के फ़ुटबॉल फैंस का ध्यान खींचा. खुशी, गले मिलने, चीयर करने और ट्रॉफी के साथ जश्न मनाने जैसे नज़ारों के अलावा मेटलाइफ स्टेडियम में एक पल काफी खास रहा. एक्स्ट्रा टाइम में अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर अपना दूसरा वर्ल्ड कप खिताब जीतने के बाद स्पेन के कई खिलाड़ियों को गोल नेट के टुकड़े काटते और उन्हें यादगार के तौर पर घर ले जाते हुए देखा गया.
कहां से शुरू हुई यह परंपरा?
बास्केटबॉल में नेट काटने की परंपरा बहुत पुरानी है और इसकी शुरुआत अमेरिका के इंडियाना राज्य से हुई थी. 20वीं सदी की शुरुआत में जीतने वाली टीमें चैंपियनशिप की जीत को याद रखने के लिए नेट को यादगार चीज के तौर पर अपने साथ ले जाने लगीं. यह परंपरा 1947 में तब मशहूर हुई, जब नॉर्थ कैरोलिना स्टेट के कोच एवरेट केस ने अपनी टीम की 'सदर्न कॉन्फ्रेंस टूर्नामेंट' की जीत का जश्न मनाने के लिए अपने खिलाड़ियों के कंधों पर चढ़कर बास्केट के नेट का एक हिस्सा काट दिया. केस ने 1946 में नॉर्थ कैरोलिना स्टेट से जुड़ने से पहले अपने गृह राज्य इंडियाना में हाई स्कूल बास्केटबॉल को कोचिंग देते हुए 23 साल बिताए और चार स्टेट चैंपियनशिप जीतीं.
1947 में NC स्टेट को सदर्न कॉन्फ्रेंस टूर्नामेंट का खिताब जिताने के बाद केस ने जीत की यादगार निशानी के तौर पर नेट को काट दिया. यह काम जल्द ही बास्केटबॉल की सबसे मशहूर चैंपियनशिप परंपराओं में से एक बन गया और अब NCAA टूर्नामेंट और अन्य बड़े मुकाबलों के दौरान अक्सर ऐसा होते देखा जाता है. स्पेन के खिलाड़ियों ने फ़ुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर इस परंपरा को निभाया और 2026 के फाइनल में अर्जेंटीना को हराने के बाद मेटलाइफ स्टेडियम में गोल नेट को अपनी वर्ल्ड कप जीत की एक यादगार निशानी में बदल दिया.




