मोना अग्रवाल ने भारत को शूटिंग में दिलाया कांस्य पदक, कभी बच्चे जीपीएस की मदद से घर लौट आने की लगाते थे गुहार

मोना अग्रवाल ने भारत को शूटिंग में दिलाया कांस्य पदक, कभी बच्चे जीपीएस की मदद से घर लौट आने की लगाते थे गुहार

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पोलियो से पीड़ित मोना ने खेल में करियर बनाने के लिए 2010 में घर छोड़ दिया था.

7 साल की मोना ने 30 अगस्त को महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल में कांस्य पदक जीता.

दो बच्चों की मां मोना अग्रवाल हर दिन निशानेबाजी परिसर में उस समय भावुक हो जाती थी जब उनके बच्चे वीडियो कॉल पर मासूमियत से यह समझते थे कि वह घर वापस आने का रास्ता भूल गई हैं और उन्हें वापस लौटने के लिए जीपीएस की मदद लेनी होगी. पहली बार पैरालिंपिक खेलों में भाग ले रही 37 साल की मोना ने 30 अगस्त को महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल में कांस्य पदक जीता. वह काफी समय तक स्वर्ण पदक की दौड़ में बनी हुई थी जो अंततः भारत की अवनि लेखरा के पास गया.

मोना ने बाकी बाधाओं के बीच वित्तीय कठिनाइयों का सामना करने को भी याद किया. उन्होंने कहा, ‘वह मेरा सबसे मुश्किल समय में से एक था, वित्तीय संकट एक और बड़ी समस्या थी. मैंने यहां तक पहुंचने के लिए वित्तीय तौर पर काफी संघर्ष किया है. मैं आखिरकार सभी संघर्षों और बाधाओं से पार पाकर पदक हासिल करने में सक्षम रही. मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा है. यह मेरा पहला पैरालिंपिक है, मैंने ढाई साल पहले ही निशानेबाजी शुरू की थी और इस अवधि के अंदर पदक जीतना शानदार रहा.’

पोलियो से पीड़ित मोना ने कहा कि उन्होंने खेल में अपना करियर बनाने के लिए 2010 में घर छोड़ दिया था लेकिन 2016 तक उन्हें नहीं पता था कि पैरालिंपिक जैसी प्रतियोगिताओं में उनके लिए कोई गुंजाइश है. उन्होंने कहा, ‘मुझे 2016 से पहले पता नहीं था कि हम किसी भी खेल में भाग ले सकते हैं. जब मुझे अहसास हुआ कि मैं कर सकती हूं, तो मैंने खुद को यह समझने की कोशिश की कि मैं अपनी दिव्यांगता के साथ खेलों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकती हूं. मैंने तीन-चार खेलों में हाथ आजमाने के बाद निशानेबाजी को चुना.’