Paris Olympic 2024: तीसरी बार पेरिस में लगेगा खेलों का महाकुंभ, जानिए भारत का फ्रांस में कैसा रहा प्रदर्शन

Shakti Shekhawat

Shakti Shekhawat

अपडेटेड:

पेरिस में तीसरी बार ओलिंपिक खेल हो रहे हैं.
पेरिस में तीसरी बार ओलिंपिक खेल हो रहे हैं.

Story Highlights:

पेरिस ने अभी तक दो बार 1900 और 1924 में ओलिंपिक मेजबानी की है.

भारत ने ओलिंपिक का अपना पहला मेडल पेरिस में ही जीता था.

फ्रांस की राजधानी पेरिस में 2024 ओलिंपिक खेल होने जा रहे हैं. जुलाई-अगस्त के महीने में दुनियाभर के खिलाड़ी खेलों के महाकुंभ के लिए इस यूरोपीय देश में डेरा डालेंगे. इसके बाद मेडल्स के लिए रस्साकशी होगी. पेरिस तीसरी बार ओलिंपिक खेलों की मेजबानी करने जा रहा है. यहां पर 100 साल बाद फिर से यह आयोजन हो रहा है. पेरिस ने आखिरी बार 1924 में ओलिंपिक खेलों की मेजबानी की थी. इससे पहले साल 1900 में यहां पर यह खेल हुए थे. इस तरह से पेरिस तीसरी बार ओलिंपिक होंगे. इसके साथ ही यह शहर संयुक्त रूप से सर्वाधिक बार ओलिंपिक मेजबानी करने में पहले पायदान पर आ जाएगा. पेरिस के अलावा ब्रिटेन की राजधानी ब्रिटेन में ही अभी तक तीन बार ओलिंपिक खेल हुए हैं. जल्द ही अमेरिका का लॉस एंजलिस भी इस लिस्ट में शुमार हो जाएगा. वहां 1928 के ओलिंपिक्स होंगे.

पेरिस ओलिंपिक्स तो भारत का कैसा रहा प्रदर्शन


पेरिस ने जब भी ओलिंपिक की मेजबानी की है तो यह भारत के लिए मिलेजुले नतीजों वाले रहे हैं. भारत को ओलिंपिक इतिहास के सबसे पहले मेडल इसी शहर में मिले थे. साथ ही यहां से वह खाली हाथ भी आया था. अब जब पेरिस फिर से मेजबानी कर रहा है तो उम्मीद कर रहा है कि भारत अब तक का अपना सबसे अच्छा प्रदर्शन यहीं पर करने जा रहा है. आगे देखिए 1900, 1924 में भारतीय खिलाड़ियों का पेरिस ओलिंपिक्स में कैसा प्रदर्शन रहा है.

1900 पेरिस ओलिंपिक्स


भारत ने 1900 में पहली बार ओलिंपिक्स में हिस्सा लिया था. तब उसे दो मेडल मिले थे. ये दोनों ही नॉर्मन प्रिचार्ड ने जीते थे. उन्होंने एथलेटिक्स में दो सिल्वर मेडल जीतकर भारत का खाता खोला था. प्रिचार्ड ने पुरुषों की 200 मीटर रेस और 200 मीटर हर्डल्स में चांदी हासिल की थी. प्रिचार्ड ने तब 60 मीटर, 100 मीटर और 110 मीटर हर्डल्स में भी हिस्सा लिया था. लेकिन इन तीनों में वे नाकाम रहे थे. दिलचस्प बात है कि प्रिचार्ड 1900 ओलिंपिक्स में खेलने वाले इकलौते भारतीय थे. वे ब्रिटिश मूल के थे लेकिन उनका जन्म कलकत्ता में हुआ था. वे ओलिंपिक में पदक जीतने वाले पहले एशिया में जन्मे खिलाड़ी भी थे. हालांकि कई इतिहासकार उन्हें ब्रिटिश मानते हैं लेकिन इंटरनेशनल ओलिंपिक काउंसिल उन्हें भारतीय मानते हुए उनके जीते हुए दो सिल्वर मेडल को भारत के खाते में ही दर्ज मानता है.