भारतीय एथलीट तेजस्विन शंकर ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में डेकाथलॉन में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. इस ऐतिहासिक मेडल से चार दिन पहले वह स्टेडियम के एक कोने में घुटनों के बल बैठे अपने आंसुओं को रोकने की कोशिश कर रहे थे, क्योंकि हाई जम्प में पहले ही प्रयास के बाद उनके घुटने की पुरानी चोट फिर उभर आई थी और ऐसा लग रहा था कि उनका अभियान शुरू होने से पहले ही किसी बुरे सपने में बदल गया, लेकिन शुक्रवार शाम उसी स्टेडियम में उनके गले में ब्रॉन्ज मेडल चमक रहा था.
कुछ ही दिनों में निराशा से अविश्वास और फिर ऐतिहासिक सफलता तक का यह सफर उनके चेहरे की मुस्कान में साफ झलक रहा था. डेकाथलॉन में कॉमनवेल्थ गेमस में मेडल जीतने वाले पहले भारतीय बने 27 साल के तेजस्विन ने मिक्स्ड जोन में प्रवेश करते हुए मुस्कुराकर कहा कि आज मैं नहीं रोऊंगा.
पुरानी घुटने की चोट उभरी
तेजस्विन ऊंची कूद में भी पदक जीतने के इरादे से ग्लास्गो पहुंचे थे, मगर पहले ही प्रयास के बाद पुरानी घुटने की चोट उभर आई और उन्हें प्रतियोगिता से हटना पड़ा. उस समय उनकी आंखों से निकले आंसू दर्द से ज्यादा हार मान लेने की भावना के थे. उन्होंने कहा कि अगर वह उस समय अकेला होते, तो शायद सब कुछ छोड़ देते. तेजस्विन ने बताया कि जब वह वहां रो रहे थे, तब उन्हें लग रहा था कि एक साल बर्बाद हो गया है. कॉमनवेल्थ गेम्स खत्म हो गए, शायद एशियाई खेल भी हाथ से निकल जाएंगे. वह पूरी तरह नकारात्मक सोच में डूब गए थे. महज चार दिन बाद वही खिलाड़ी इतिहास रचकर पदक के साथ मुस्कुराता नजर आया. उन्होंने कहा कि दो दिनों में भावनाएं किस तरह बदल सकती हैं. उन्होंने खुद महसूस किया. आज उनके गले में मेडल हैं.
निराशा में डूबे थे तेजस्विन
इस ऐतिहासिक उपलब्धि से पहले एक ऐसा पल भी आया था, जिसने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया था. हाई जम्प से बाहर होने के बाद जब तेजस्विन निराशा में डूबे थे, तब लंबी कूद के स्टार खिलाड़ी मुरली श्रीशंकर उनके पास पहुंचे गंभीर चोटों से जूझकर वापसी कर चुके श्रीशंकर अच्छी तरह समझते थे कि वह किस मानसिक स्थिति से गुजर रहा है. तेजस्विन ने कहा कि ऊंची कूद के बाद जब वह पूरी तरह टूट चुके थे, तब उनके पास आने वाले एकमात्र व्यक्ति श्रीशंकर थे.उस समय अगर वह किसी की सलाह सुनने वाले थे, तो वह सिर्फ वही थे.उन्हें भी यही चोट लगी थी, बल्कि उनसे कहीं ज्यादा गंभीर.




