भारत अकेला ऐसा देश नहीं है जहां हाल ही में नेशनल स्पोर्टिंग कलर में बदलाव चर्चा का विषय बना है.जहां एक तरफ हॉकी इंडिया नीली जर्सी की जगह केसरिया रंग की जर्सी लाने को लेकर विवाद से जूझ रहा है,वहीं दूसरी तरफ चीन में भी पिछले सोमवार को जीत के समारोह के लिए नीली यूनिफ़ॉर्म सामने आने के बाद बहस छिड़ गई है. ये यूनिफ़ॉर्म पारंपरिक लाल और पीले रंग के कपड़ों की जगह लेंगी, जिन्होंने दशकों से देश की खेल पहचान को बनाए रखा है.
लाल रंग को छोड़ने के फ़ैसले पर सवाल
चीनी ओलिंपिक समिति ने इस हफ़्ते की शुरुआत में स्पोर्ट्सवियर बनाने वाली कंपनी ली-निंग के साथ मिलकर यह डिज़ाइन लॉन्च किया. इस लॉन्च के साथ महिला एथलीटों को मेडल सेरेमनी के लिए ट्राउजर और स्कर्ट में से किसी एक को चुनने की सुविधा भी दी गई. इस कदम पर ऑनलाइन लोगों की राय जल्द ही बंट गई.
SCMP के अनुसार कई यूज़र्स ने नेशनल ध्वज और दशकों की खेल सफलताओं से जुड़े पारंपरिक लाल रंग को छोड़ने के फ़ैसले पर सवाल उठाए, जबकि दूसरों ने नीले डिजाइन को ज़्यादा आधुनिक और शानदार बताते हुए उसकी तारीफ की. SCMP के अनुसार 1990 के बीजिंग एशियाई खेलों के बाद से चीन की पोडियम यूनिफ़ॉर्म में लाल और पीले जैसे रंगों का इस्तेमाल किया जाता रहा है. लाल रंग राष्ट्रीय ध्वज और जोश का प्रतीक है, जबकि पीला रंग सम्मान और गौरव को दर्शाता है. सोशल मीडिया यूजर्स अक्सर इस कॉम्बिनेशन का मजाक उड़ाते हुए इसे 'टमाटर के साथ स्क्रैम्बल्ड एग्स' (अंडे की भुर्जी) कहते थे, जो चीन में घर पर बनने वाला एक लोकप्रिय व्यंजन है.
हॉकी इंडिया के अध्यक्ष को बिना बताए लिया गया जर्सी का रंग केसरिया करने का फैसला




