भारत की अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स में देश के लिए पहला जूडो गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया.उन्होंने ग्लास्गो में महिलाओं के 48 किग्रा फाइनल में कनाडा की हेइडी क्वाच को एक रोमांचक 'गोल्डन स्कोर' मुकाबले में हराकर जीत हासिल की. त्रिपुरा की रहने वाली 23 साल की अस्मिता फ़ाइनल की शुरुआत में पिछड़ गई थीं.उन्हें एक 'यूको' (yuko) अंक गंवाना पड़ा और फिर एक पेनल्टी भी मिली, जिससे क्वाच ने मुक़ाबले पर अपनी पकड़ बना ली.
एलिजिबिलिटी को लेकर विवाद
अपनी जीत के कुछ दिनों बाद भारतीय जूडो खिलाड़ी अस्मिता उत्तर प्रदेश के राज्य एथलीट लाभों के लिए अपनी एलिजिबिलिटी को लेकर विवाद में घिर गई हैं. दरअसल त्रिपुरा की रहने वाली अस्मिता जूडो प्रतियोगिताओं में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करती हैं.ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या वह अगस्त 2024 के आदेश के अनुसार वह यूपी के राज्य पुरस्कारों की हकदार हैं? अगर अस्मिता को मंज़ूरी मिल जाती है, तो उन्हें ग्लास्गो गेम्स में अपनी उपलब्धि के लिए 1.5 करोड़ रुपये की बड़ी राशि मिलेगी.
खिलाड़ियों की पात्रता के लिए तीन शर्तें
अगस्त 2024 में जारी यूपी सरकार के आदेश में राज्य के पुरस्कारों के लिए खिलाड़ियों की पात्रता के लिए तीन शर्तें तय की गई हैं.खिलाड़ी को उत्तर प्रदेश का वास्तविक निवासी होना चाहिए और इंटरनेशनल खेल आयोजनों में राज्य का प्रतिनिधित्व करने के अलावा कम से कम दो साल तक यूपी के किसी मान्यता प्राप्त कॉलेज या यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया होना चाहिए. असल में अस्मिता के मामले में पात्रता के मानदंडों का आकलन करना मुश्किल हो जाता है. हालांकि यह जुडोका त्रिपुरा की रहने वाली है, लेकिन वह नेशनल प्रतियोगिताओं में यूपी का प्रतिनिधित्व करती है.वह 2023 से यूपी पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के तौर पर भी काम कर रही है.
UP सरकार की ओर से सम्मानित किए जाने वाले खिलाड़ियों की लिस्ट के बारे में बात करते हुए राज्य के स्पोर्ट्स डायरेक्टर RP सिंह ने मंगलवार को कहा कि वे ग्लास्गो में होने वाले CWG 2026 के सभी विजेताओं और हिस्सा लेने वालों की लिस्ट को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं.




