भारत की स्टार टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा को इस साल होने वाले एशियन गेम्स की टीम से बाहर कर दिया गया है.है. टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया के तय किए गए सेलेक्शन मानदंडो पर खरे नहीं उतरने की वजह से उन्हें टीम से बाहर किया गया. अब मनिका ने सेलेक्शन पर सवाल खड़े किए गए है और बयान जारी करके सेलेक्शन में पारदर्शिता की मांग की है. 2018 एशियन गेम्स में भारत के लिए ऐतिहासिक ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली मनिका का कहना है कि उन्होंने कभी स्पेशल ट्रीटमेंट के लिए नहीं कहा, मगर उन्होंने बस यही उम्मीद की है कि हर खिलाड़ी पर एक जैसे नियम और स्टैंडर्ड लगातार लागू हों.
एथलीट को साफ तौर पर समझाया जाए
उन्होंने कहा कि पब्लिकली रिपोर्ट की गई जानकारी के अनुसार सिलेक्शन फ्रेमवर्क को वर्ल्ड रैंकिंग, नेशनल रैंकिंग और सिलेक्शन कमिटी के फैसले के कॉम्बिनेशन पर आधारित माना जाता है. अगर सच में ऐसा है तो ट्रांसपेरेंसी के लिए ज़रूरी है कि हर कम्पोनेंट और उसके एप्लीकेशन को संबंधित एथलीट को साफ तौर पर समझाया जाए. भारतीय स्टार ने आगे कहा कि उन्होंने यह भी देखा है कि पिछले एशियन गेम्स के सिलेक्शन साइकिल के दौरान जो खिलाड़ी वर्ल्ड रैंकिंग (टॉप 50 से बाहर) और नेशनल रैंकिंग (टॉप 10 से बाहर) दोनों में समान रैंकिंग से बाहर थे, उन्हें भी खास बातों के आधार पर टीम में शामिल किया गया था और उन्हें खास सुविधाएं दी गई थी. उन्होंने मांग की है कि उन्हें मौजूदा सिलेक्शन में बताया जाए कि उनके मामले में वही या मिलते-जुलते नियम कैसे लागू किए गए हैं या नहीं किए गए हैं.
रोलिंग सिस्टम पर काम
मनिका वर्ल्ड रैंकिंग में 51 पर हैं. उन्होंने कहा कि वह हाल में टॉप 50 से थोड़ी बाहर हो हुई हैं. अंतर बहुत कम है और वह उस ब्रैकेट के बहुत करीब हैं. मनिका के लिए यह समझना मुश्किल हो रहा है कि यह अकेला कैसे सबसे ऊंचे लेवल पर लंबे समय से चले आ रहे परफॉर्मेंस से ज़्यादा अहमियत रखता है. उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल रैंकिंग पॉइंट्स एक रोलिंग सिस्टम पर काम करते हैं, जहां साइकिल के हिस्से के तौर पर पुराने पॉइंट्स को बदला और हटाया जाता है. इसलिए रैंकिंग हमेशा मौजूदा फॉर्म की पूरी तस्वीर नहीं दिखाती। यदि रैंकिंग को एक मुख्य मानदंड के रूप में उपयोग किया जा रहा है, तो रैंकिंग में बदलाव की समयसीमा और स्थिरता पर भी विचार किया जाना चाहिए.
मनिका ने 2018 एशियन गेम्स में मिक्स्ड डबल्स में ब्रॉन्ज मेडल और एशियन कप में विमेंस सिंगल्स में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता है. साथ ही कई कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल भी जीते हैं. वह ओलिंपिक सिंगल्स राउंड ऑफ 16 में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला और एशियन गेम्स में सिंगल्स क्वार्टर फ़ाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय टेबल टेनिस प्लेयर बनकर भी इतिहास रचा है. मनिका का कहना है कि उनकी ये उपलब्धि भारत के खेल रिकॉर्ड का हिस्सा हैं और सिलेक्शन में इनका लगातार और ट्रांसपेरेंट तरीके से हिसाब होना चाहिए.


