एशियन गेम्स 2026 के लिए जापान जाने से पहले भारतीय एथलीट्स कंटेनर में रात बिता रहे हैं. 13 मीटर लंबे और 3 मीटर चौड़े कंटेनर में सभी बुनियादी सुविधाएं रखी गई हैं. इसमें दो खिलाड़ियों के हिसाब से दो बेड लगाए गए हैं. भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) ने पटियाला और बेंगलुरु स्थित अपने सेंटर्स पर ये कंटेनर लगाए हैं. दरअसल यह कदम जापान में होने वाले एशियन गेम्स के लिए खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए उठाया गया है. आयची-नगोया में होने वाले खेलों में अबकी बार खेल गांव नहीं है. खिलाड़ियों को कंटेनर, क्रूज शिप जैसी जगहों पर ठहराया जाएगा.
SAI चाहती है कि भारतीय एथलीट एशियन गेम्स में जाने से पहले ही वहां के अकॉमडेशन के लिए तैयार हो जाए. इससे कि उन्हें किसी तरह का झटका और हैरानी न हो. ऐसे में एथलीट्स बारी-बारी से SAI की ओर लगाए गए कंटेनर में रात बिता रहे हैं और इनके अभ्यस्त हो रहे हैं. हाल ही में खेल मंत्रालय और SAI की एक टीम जापान गई थी और वहां एकॉमडेशन की व्यवस्था देखकर आई थी. उसने वहां महिला व पुरुष एथलीट के लिए बनाए गए कमरों की रैकी की थी.
एथलीट्स के लिए तैयार किए गए कंटेनर में क्या-क्या सुविधाएं हैं
SAI ने 28 अगस्त से एथलीट्स के लिए कंटेनर में रात बिताने का अभियान छेड़ा था. अभी तक आठ एथलीट इनमें ठहर चुके हैं. इनमें शॉट पुट एथलीट तजिंदरपाल सिंह तूर, डिस्कस थ्रोअर सीमा कालीरमन शामिल हैं. एथलीट्स के लिए तैयार किए गए कंटेनर में दो किनारों पर दो बेडरूम बनाए गए हैं. इनके बीच एक छोटी सी जगह है. दो स्प्लिट एसी, वॉशिंग मशीन वाला एक छोटा सा लॉन्ड्री एरिया (कपड़े धोने की जगह), एक फ्रीज, सिंक और छोटा सा किचन इसमें दिया गया है. बाथरूम को वॉश बेसिन, टॉयलेट और शॉअर के लिए बांटा गया है. खिलाड़ियों के बेड के नीचे सामान रखने के लिए जगह छोड़ी गई है.
SAI अधिकारी ने कंटेनर की व्यवस्था पर क्या कहा
नेताजी सुभाष नेशनल खेल संस्थान, पटियाला के डेप्युटी डायरेक्टर जनरल विनीत कुमार ने इस व्यवस्था के बारे में पत्रकारों से कहा कि दो साल पहले जब पता चला था कि एशियन गेम्स में खेल गांव नहीं होगा. खिलाड़ी कंटेनर व क्रूज वगैरह में ठहराए जाएंगे तब खेल मंत्री ने फैसला किया था कि खिलाड़ियों को उन हालात में ढलने के लिए तैयार किया जाए. उन्हें घुटन महसूस न हो और वे बिना किसी दबाव के खेल सके. कंटेनर बाहर से छोटे दिखते हैं लेकिन इनके अंदर सारी सुविधाएं दी गई हैं. अगर खिलाड़ी बिना इनमें रहे जापान जाते तो उन्हें वहां की स्थिति में ढलने में समय लगता. एथलीट्स के कंटेनर्स में रुकने के लिए रोस्टर बनाया गया है. वे बारी-बारी से आएंगे.




