राष्ट्रमंडल खेलों के जूडो स्पर्धा में भारत ने ऐतिहासिक सफलता हासिल करते हुए पहला स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। विजेता खिलाड़ी ने रनिंग ट्रायल से खेल की शुरुआत की थी, जिसके बाद उनका चयन स्पोर्ट्स स्कूल में हुआ। उन्होंने आठ वर्षों की कड़ी मेहनत और भोपाल में प्रशिक्षण के बाद यह मुकाम हासिल किया। उत्तर प्रदेश पुलिस में उप-निरीक्षक के पद पर कार्यरत इस खिलाड़ी ने अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को संभालते हुए और शुरुआती वित्तीय कठिनाइयों के बावजूद खेल को जारी रखा। इस सफलता के पीछे पिता के अटूट सहयोग और त्याग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कई प्रतियोगिताओं में हार का सामना करने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और आखिरकार देश का तिरंगा सबसे ऊपर लहराया। आने वाले मुकाबलों में भी अन्य भार वर्गों से पदक जीतने की उम्मीद जताई गई है।
CWG 2026 के जूडो में भारत को मिला पहला स्वर्ण पदक, जानिए एथलीट के संघर्ष का पूरा सफर
राष्ट्रमंडल खेलों के जूडो स्पर्धा में भारत ने ऐतिहासिक सफलता हासिल करते हुए पहला स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। विजेता खिलाड़ी ने रनिंग ट्रायल से खेल की शुरुआत की थी, जिसके बाद उनका चयन स्पोर्ट्स स्कूल में हुआ। उन्होंने आठ वर्षों की कड़ी मेहनत और भोपाल में प्रशिक्षण के बाद यह मुकाम हासिल किया। उत्तर प्रदेश पुलिस में उप-निरीक्षक के पद पर कार्यरत इस खिलाड़ी ने अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को संभालते हुए और शुरुआती वित्तीय कठिनाइयों के बावजूद खेल को जारी रखा। इस सफलता के पीछे पिता के अटूट सहयोग और त्याग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कई प्रतियोगिताओं में हार का सामना करने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और आखिरकार देश का तिरंगा सबसे ऊपर लहराया। आने वाले मुकाबलों में भी अन्य भार वर्गों से पदक जीतने की उम्मीद जताई गई है।
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