भारत ने पिछले एशियन गेम्स यानी हांगझोऊ 2022 में 28 गोल्ड मेडल जीते थे, जिसके चार साल बाद सवाल यह था कि भारत आइची-नागोया में उनमें से कितने खिताब बचा पाएगा. जिसका जवाब अब मिल गया है. आइची नागोया में भारत का अभियान बीते दिन खत्म हो गया है और इसी के साथ उस सवाल का जवाब भी मिल गया, जो इवेंट शुरू होने से पहले उठ रहा था. भारत 28 में से आठ खिताब बचाने में कामयाब रहा. यानी 20 खिताब भारत ने गंवा दिए. पिछले एशियाड में जीते शूटिंग के सभी सात गोल्ड मेडल नागोया में भारत के हाथ से निकल गए, जबकि एथलेटिक्स के सभी छह खिताब भी छिन गए. इतना ही नहीं, भारत अपने दोनों व्यक्तिगत कंपाउंड आर्चरी गोल्ड मेडल भी नहीं बचा पाया. भारत ने नागोया ने कुल 21 गोल्ड जीते
हालांकि भारत ने कंपाउंड टीम आर्चरी के तीनों खिताब, कबड्डी के दोनों गोल्ड, क्रिकेट के दोनों खिताब और पुरुषों की हॉकी का खिताब बचाए रखा. बाकी गोल्ड मेडल अलग-अलग इवेंट्स और खिलाड़ियों से भारत के खाते में जुड़े. कुछ खिलाड़ियों ने हांगझोऊ में सिल्वर या ब्रॉन्ज मेडल जीता था और जापान में गोल्ड जीता. दूसरों ने उन इवेंट्स में खिताब जीते, जहां भारत पिछले एशियन गेम्स में पोडियम तक भी नहीं पहुंच पाया था.
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शूटिंग: सात गोल्ड से तीन गोल्ड तक
शूटिंग में भारत ने पिछले एशियाड में सात गोल्ड समेत 22 मेडल जीते थे, वहीं आइची-नागोया में कुल मेडल की संख्या घटकर 15 रह गई. गोल्ड भी घ्टकर सात से तीन हो गए, जबकि सिल्वर नौ से आठ और ब्रॉन्ज छह से चार हो गए. पिछले एशियाड में जीते गए भारत के सात गोल्ड मेडल में से कोई भी उसी इवेंट में दोबारा नहीं जीत सका. हालांकि इसके बजाय भारत ने दूसरे इवेंट्स में गोल्ड जीते. नीरू ढांडा ने महिलाओं का ट्रैप इंडिविजुअल टाइटल जीता और फिर कीनन चेनाई के साथ मिलकर मिक्स्ड ट्रैप इवेंट जीता. कमलजीत और सुरुचि सिंह ने मिक्स्ड 10 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड मेडल जीता.
पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल और पुरुषों की 50 मीटर राइफल 3-पोजीशन अपना खिताब बचाने से चूक गई और सिल्वर के साथ लौंटी. मिक्स्ड स्कीट में भी एक नया मेडल मिला. अनंतजीत सिंह नरुका और परिनाज धालीवाल ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीता, जिससे भारत को इस इवेंट में अपना पहला एशियाई खेलों का मेडल मिला.
एथलेटिक्स: गोल्ड हुए कम
हांगझोऊ में भारत ने एथलेटिक्स में छह गोल्ड समेत 29 मेडल जीते थे, जबकि इस बार भारत के एथलेटिक्स में मेडलों की संख्या 24 रही. गोल्ड की संख्या भी घटकर एक हो गई. यह इकलौता गोल्ड मेडल महिलाओं की 4x400 मीटर रिले टीम ने जीता, जबकि चार साल पहले हांगझोऊ में भारत की पुरुष रिले टीम ने गोल्ड जीता था. सिल्वर 14 से घटकर नौ हो गए, जबकि ब्रॉन्ज़ मेडल नौ से बढ़कर 14 हो गए. हांगझोऊ में गोल्ड जीतने वाले तेजिंदरपाल सिंह तूर को इस बार सिल्वर मेडल मिला. डेकाथलॉन में तेजस्विन शंकर सिल्वर से ब्रॉन्ज पर आ गए. गुलवीर सिंह ने 10,000 मीटर दौड़ में हांगझोऊ के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया और ब्रॉन्ज से सिल्वर मेडल तक पहुंचे. उन्होंने 1500 मीटर में सिल्वर और 5000 मीटर में ब्रॉन्ज़ मेडल भी जीता.
आर्चरी: अलग-अलग इवेंट्स में उतने ही मेडल
भारत ने पिछले एशियाड में पांच गोल्ड, दो सिल्वर और दो ब्रॉन्ज समेत कुल नौ मेडल जीते थे. इस बार भी भारत ने पांच गोल्ड, दो सिल्वर और दो ब्रॉन्ज जीते. यानी भारत ने आर्चरी में हांगझोऊ वाली अपनी संख्या को दोहराया, लेकिन मेडल अलग- अलग इवेंट में जीते. कंपाउंड टीम इवेंट में तीन गोल्ड मेडल बरकरार रहे और इन इवेंट्स के अलावा आइची-नागोया में भारत का मेडल जीतने का प्रदर्शन अलग रहा, खासकर महिलाओं के रिकर्व इवेंट्स में. कुमकुम मोहोद ने व्यक्तिगत रिकर्व गोल्ड जीता, जबकि महिलाओं की रिकर्व टीम हांगझोऊ में ब्रॉन्ज जीतने के बाद जापान में गोल्ड जीतने में सफल रही. व्यक्तिगत कंपाउंड इवेंट्स में भी बदलाव देखने को मिला. हांगझोऊ में भारत ने पुरुषों और महिलाओं दोनों के व्यक्तिगत कंपाउंड इवेंट्स में दो गोल्ड, एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज जीता था, जबकि आइची-नागोया में व्यक्तिगत कंपाउंड इवेंट में सिर्फ एक मेडल आया. टीजी मणिरत्नम ने पुरुषों इंडिविजुअल में ब्रॉन्ज जीता.
बॉक्सिंग: आइची-नागोया में तीन गोल्ड
बॉक्सिंग का सफर शूटिंग और एथलेटिक्स से बिल्कुल उलट रहा. पिछले एशियाड में भारत ने एक सिल्वर और तीन ब्रॉन्ज समेत चार मेडल जीते थे, लेकिन कोई गोल्ड नहीं मिला था. वहीं इस बार कुल मेडल की संख्या बढ़कर छह हो गई, जिसमें तीन गोल्ड मेडल शामिल है.
लवलीना बोरगोहेन ने 2023 में महिलाओं के 75 किग्रा कैटेगरी में जीते अपने सिल्वर मेडल को चार साल बाद गोल्ड में बदल दिया. वहीं परवीन हुड्डा और अंकुश पंघाल ने उन कैटेगरी में दो और खिताब जीते, जिनमें भारत ने पिछली बार गोल्ड नहीं जीता था. ब्रॉन्ज मेडल की संख्या तीन ही रही.
रेसलिंग: इस बार दो गोल्ड
भारत को इस बार भी रेसलिंग में पिछली बार के बराबर छह ही मेडल मिले. 2022 में भारत ने एक सिल्वर और पांच ब्रॉन्ज मेडल जीते थे, लेकिन कोई गोल्ड नहीं मिला था. आइची-नागोया में यह संख्या दो गोल्ड, दो सिल्वर और दो ब्रॉन्ज मेडल हो गई. अमन सहरावत और सुजीत कलकल ने फ्रीस्टाइल में दो गोल्ड मेडल दिलाए, जबकि नितेश ने ग्रीको-रोमन में एक ऐतिहासिक सिल्वर मेडल जीता. ब्रॉन्ज मेडल की संख्या पांच से घटकर दो (सुनील कुमार और दीपक पूनिया) रह गई, लेकिन भारत ने दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल अपने नाम किए.
स्क्वॉश: दो गोल्ड हाथ से निकले
हांगझोऊ और आइची-नागोया दोनों जगह स्क्वॉश में भारत ने पांच-पांच मेडल जीते, लेकिन 2022 वाले दोनों गोल्ड इस बार नहीं मिल पाए.
भारत के मेडल का हिसाब दो गोल्ड, एक सिल्वर और दो ब्रॉन्ज़ से बदलकर दो सिल्वर और तीन ब्रॉन्ज हो गया.अभय सिंह ने पुरुषों के सिंगल्स में सिल्वर मेडल बरकरार रखा और अनाहत सिंह ने महिलाओं के सिंगल्स में एक मेडल और जोड़ा. हांगझोऊ में पुरुषों की टीम और मिक्स्ड डबल्स में जो खिताब जीते थे , वे जापान में ब्रॉन्ज में बदल गए.
कबड्डी और क्रिकेट में खिताब बरकरार
भारत ने क्रिकेट और कबड़डी दोनों में गोल्ड बरकरार रखा. पुरुषों और महिलाओं के क्रिकेट खिताब और पुरुषों और महिलाओं के कबड्डी खिताब जापान में भी बरकरार रहे.
हॉकी: 44 साल बाद खिताब
आइची-नागोया में हॉकी में पुरुषों ने अपना गोल्ड मेडल बरकरार रखा, जबकि महिलाओं पिछले एशियाड के ब्रॉन्ज को इस बार गोल्ड में बदला. इसी के साथ दोनों टीमों ने 2028 लॉस एंजिलिस ओलिंपिक के लिए भी क्वालिफाई कर लिया है. जापान में भारतीय महिला टीम ने मौजूदा चैंपियन चीन को 1-0 से हराकर 1982 के बाद पहली बार एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीता.इस जीत ने गोल्ड मेडल के लिए 44 साल का इंतज़ार खत्म किया.
गोल्फ: नई उपलब्धि
पिछले एशियाड में अदिति अशोक ने सिल्वर मेडल जीता, जिससे भारत को एशियन गेम्स में महिलाओं का पहला गोल्फ मेडल मिला. चार साल बाद प्रणवी उर्स ने इससे भी बेहतर प्रदर्शन किया और व्यक्तिगत गोल्ड मेडल जीता. वह एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला गोल्फर बनीं.
सेलिंग: फिर से तीन मेडल
भारत ने सेलिंग में एक बार हांगझोऊ के बराबर तीन मेडल जीते. जापान में दो नए स्किफ़ इवेंट्स में भारत ने पोडियम फ़िनिश किया, जिन्होंने हांगझोऊ के पुरुषों के विंडसर्फर और पुरुषों के डिंगी मेडल की जगह ली.
बैडमिंटन: मेडल घटे
आइची-नागोया में बैडमिंटन में भारत का प्रदर्शन काफी निराशजनक रहा. पिछले एशियाड की तुलना में इस बार मेडल की संख्या तीन से घटकर एक रही. 2022 में भारत ने सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी का मेन्स डबल्स गोल्ड, मेन्स टीम का सिल्वर और एचएस प्रणय का सिंगल्स ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था् चार साल बाद मेन्स टीम ही भारत के लिए पोडियम तक पहुंचने वाली एकमात्र टीम रही, लेकिन उस मेडल का रंग भी सिल्वर से ब्रॉन्ज में बदल गया.
रोइंग: सिर्फ एक मेडल
हांगझोऊ में भारत ने रोइंग में पांच मेडल जीते थे, मगर आइची-नागोया में भारत सिर्फ एक ब्रॉन्ज ही जीत पाया. जापान में सिर्फ़ सतनाम सिंह और सलमान खान की मेन्स डबल स्कल्स जोड़ी ही पोडियम तक पहुंच पाई. हांगझोऊ में जिन पांच इवेंट्स में मेडल मिले थे, उनमें से किसी में भी दोबारा मेडल नहीं मिला.
टेनिस: 36 साल का सिलसिला टूटा
टेनिस में हांगझोऊ के दो मेडल के मुकाबले आइची-नागोया में कोई मेडल नहीं मिला. इसी के साथ एशियन गेम्स में भारत का 36 साल से मेडल जीतने का सिलसिला टूट गया. सुमित नागल सिंगल्स क्वार्टरफाइनल में बाहर हो गए, जबकि भारत की ओर से विमेंस सिंगल्स में कोई एंट्री नहीं थी. नतीजा यह हुआ कि 1986 के बाद एशियन गेम्स में टेनिस में भारत को कोई मेडल नहीं मिला.
घुड़सवारी: भारत खाली हाथ रहा
घुड़सवारी में भारत को हांगझोऊ में दो मेडल मिले थे, लेकिन आइची-नागोया में कोई मेडल नहीं मिला. 2022 में भारत ने एक गोल्ड और एक ब्रॉन्ज मेडल जीता था. इस बार कोई भी खिलाड़ी पोडियम तक नहीं पहुंच सका.
MMA और सॉफ्ट टेनिस: दो नए मेडल
आइची-नागोया ने भारत की एशियन गेम्स की मेडल लिस्ट में दो नए खेल भी जोड़े. सुचिका तरियाल ने महिलाओं के ट्रेडिशनल MMA 60kg कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीता, जिससे मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में भारत को अपना पहला एशियाई खेलों का मेडल मिला. जय मीना ने सॉफ्ट टेनिस में पुरुषों के सिंगल्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता.
वेटलिफ़्टिंग: मीराबाई को पहली बार मेडल
वेटलिफ़्टिंग में महिलाओं के 49 किग्रा वर्ग में मीराबाई चानू का सिल्वर मेडल 1998 में बैंकॉक में कर्णम मल्लेश्वरी के सिल्वर मेडल के बाद एशियाई खेलों में भारत का पहला वेटलिफ़्टिंग मेडल था. चानू के पास ओलिंपिक और वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडल और कॉमनवेल्थ गेम्स के खिताब तो थे, लेकिन एशियाई खेलों का मेडल उनके कलेक्शन में नहीं था. नागोया में मिले सिल्वर मेडल ने इस कलेक्शन को पूरा कर दिया.
कुराश: पोडियम पर वापसी
भारत ने पिछले एशियन गेम्स में कुराश में कोई मेडल नहीं जीता था. पिंकी बल्हारा ने आइची-नागोया में महिलाओं के -78 किग्रा वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इस खेल को भारत की मेडल लिस्ट में फिर से शामिल किया.
वुशु, टेबल टेनिस, सेपक टकरा: अलग-अलग खेलों से मेडल
- वुशु में रोशिबिना देवी ने फिर से मेडल जीता. उन्होंने महिलाओं के 60 किग्रा सांडा में सिल्वर मेडल हासिल किया.
- टेबल टेनिस में मिक्स्ड डबल्स में दिया चितले और मानुष शाह ने ब्रॉन्ज मेडल जीता, जबकि पुरुषों की विश्व नंबर 3 जोड़ी मानुष शाह और मानव ठक्कर उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे.
- भारत ने सेपक टकरा में भी अपना ब्रॉन्ज़ मेडल बरकरार रखा और पुरुषों की क्वाड्रेंट टीम फिर से पोडियम पर रही.
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