अफगानिस्तान की टीम भारत के खिलाफ साल 2026 का पहला टेस्ट मैच खेलने के लिए पूरी तरह तैयार है. हालांकि, हाल ही में अफगानिस्तान के हेड कोच बने रिचर्ड पायबस ने फुल मेंबर राष्ट्र होने के बावजूद टीम के टेस्ट शेड्यूल को लेकर आईसीसी पर सवाल उठाए हैं. उनका मानना है कि जब कोई देश फुल मेंबर बन चुका है, तो उसके टेस्ट मैचों का नियमित कार्यक्रम होना चाहिए. अगर एक टेस्ट मैच के बाद अगले मुकाबले के लिए छह महीने तक इंतजार करना पड़े, तो इसका जवाब आईसीसी को देना चाहिए.
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अफगानिस्तान ने कब खेला पहला टेस्ट?
दरअसल, अफगानिस्तान को साल 2017 में आईसीसी की फुल मेंबरशिप मिली थी. इसके बाद टीम ने साल 2018 में बेंगलुरु में भारत के खिलाफ अपना पहला टेस्ट मैच खेला था. हालांकि, तब से लेकर अब तक अफगानिस्तान की टीम सिर्फ 12 टेस्ट मैच ही खेल सकी है. इनमें उसे 5 मैचों में जीत मिली है, जबकि 7 मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा है. इतना ही नहीं, साल 2026 में भी अफगानिस्तान का पहला टेस्ट भारत के खिलाफ ही होने जा रहा है.
रिचर्ड पायबस ने क्या कहा?
अफगानिस्तान के अनियमित टेस्ट शेड्यूल को लेकर रिचर्ड पायबस ने भारत के खिलाफ मैच से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा,
जब किसी देश को फुल मेंबरशिप मिलती है तो उसे नियमित फिक्स्चर की भी जरूरत होती है. एक टेस्ट मैच खेलना और फिर अगले टेस्ट के लिए चार से छह महीने तक इंतजार करना सही नहीं है. टीम जो कुछ भी सीखती और विकसित करती है, उसे बनाए रखने के लिए लगातार क्रिकेट जरूरी है. यह सवाल अफगानिस्तान से नहीं, बल्कि आईसीसी से पूछा जाना चाहिए.
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अफगानिस्तान ने पिछला टेस्ट कब खेला था?
अफगानिस्तान की टीम भारत के खिलाफ जून 2026 में एकमात्र टेस्ट मैच खेलने के बाद अगस्त में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी एकमात्र टेस्ट मैच खेलेगी. इसके बाद टीम को अगला टेस्ट मार्च 2027 में जिम्बाब्वे के खिलाफ खेलना है. यही वजह है कि अफगानिस्तान के हेड कोच ने टीम के टेस्ट शेड्यूल को लेकर आईसीसी की आलोचना की है. अफगानिस्तान ने अपना पिछला टेस्ट मैच अक्टूबर 2025 में खेला था. यानी भारत के खिलाफ मौजूदा मुकाबले से पहले टीम करीब आठ महीने तक टेस्ट क्रिकेट से दूर रही है.
भारत- अफगानिस्तान के बीच खेले गए पिछले टेस्ट में क्या हुआ था?
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