भारत के दिग्गज स्पिनर आर अश्विन ने शुक्रवार को खुलासा किया कि अपने करियर के शुरुआती दौर में चैलेंजर ट्रॉफी में एमएस धोनी को आउट करने के बाद जरूरत से ज्यादा जश्न मनाने पर वह नाराज हो गए थे. जियोस्टार के ‘द रविचंद्रन अश्विन एक्सपीरियंस’ कार्यक्रम में इस ऑफ स्पिनर ने याद किया कि उन्हें लगा था कि धोनी को आउट करने से उन्हें आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) के लिए खेलने का मौका मिल सकता है.
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अश्विन ने कहा कि सीएसके की टीम में मुथैया मुरलीधरन थे. एक दिग्गज खिलाड़ी जो अपने कोटे के पूरे ओवर कर रहे थे. इसलिए उन्हें (सीएसके के लिए खेलने के) मौके नहीं मिल रहे थे. वह 2008 में नहीं खेले, लेकिन 2009 में उन्हें केपटाउन में मुंबई इंडियंस के खिलाफ सचिन तेंदुलकर के सामने अपना पहला मैच खेलने का मौका मिला. उन्हें 2009 और 2010 में भी ज्यादा मौके नहीं मिले.
अश्विन के जश्न से धोनी नाराज
क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास लेने वाले अश्विन ने कहा कि चैलेंजर ट्रॉफी में उन्हें धोनी को गेंदबाजी करने का मौका मिला. धोनी उनकी टीम के खिलाफ खेलते हुए दो बार आउट हुए. एक बार उन्होंने डीप कवर की तरफ शॉट खेला और अश्विन ने डाइव लगाकर कैच लपक लिया, जिसके बाद उन्होंने इतना जश्न मनाया कि वह सच में नाराज हो गए.
धोनी का विकेट लेना सपना
उन्होंने कहा कि धोनी ने उनसे पूछा कि इतना जश्न मनाने की क्या जरूरत है. जिसके बाद अश्विन ने कहा कि उनका विकेट लेना सपना था. शायद इससे उन्हें सीएसके में खेलने का मौका मिल जाए और इसके अगले साल अश्विन को वो मौका मिल गया. भारत की तरफ से टेस्ट क्रिकेट में 106 मैच में 537 विकेट लेने वाले अश्विन ने सीएसके के साथ अपने आईपीएल करियर का अंत किया, क्योंकि वह वहीं खत्म करना चाहते थे जहां से उन्होंने शुरुआत की थी.
उन्होंने कहा कि जब उन्हें वापस सीएसके के लिए खेलने का मौका मिला, तो सबसे पहला विचार यही आया कि वह उसी टीम के साथ अपने करियर को खत्म करेंगे, जिससे उन्होंने शुरुआत की थी. वह दो- तीन साल और खेलना चाहता था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि वह एक अलग कहानी है, इसके बारे में वह अभी बात नहीं करेंगे.
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