IND vs NZ: अभिषेक शर्मा के तूफान को क्यों नहीं रोक पा रहा न्यूजीलैंड? कीवी टीम के बॉलिंग कोच का खुलासा

IND vs NZ: अभिषेक इस सीरीज में जबरदस्त फॉर्म में हैं. उन्होंने तीन पारियों में 76 की शानदार औसत और 271.42 की जबरदस्त स्ट्राइक रेट से 152 रन बनाए हैं.

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अभ‍िषेक शर्मा ने तीन मैचों में 152 रन बनाए. (PC: Getty)

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अभ‍िषेक शर्मा ने तीन मैचों में 152 रन बनाए.

इस सीरीज में अभ‍िषेक का स्ट्राइक रेट 271.42 है.

न्यूजीलैंड के बॉलिंग कोच जैकब ओरम ने भारत के खिलाफ चल रही पांच T20I मैचों की सीरीज में अभिषेक शर्मा के अपनी टीम पर पड़े असर के बारे में बात की. उन्होंने बताया कि आख‍िर क्यों उनके गेंदबाज भारत के इस तूफान को नहीं रोक पा रहे. अभिषेक इस सीरीज में जबरदस्त फॉर्म में हैं. उन्होंने तीन पारियों में 76 की शानदार औसत और 271.42 की जबरदस्त स्ट्राइक रेट से 152 रन बनाए हैं. 

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अभिषेक ने सीरीज की शुरुआत 35 गेंदों पर 84 रनों की तूफानी पारी से की, जिसमें पांच चौके और आठ छक्के शामिल थे. इसके बाद उन्होंने तीसरे T20I में सिर्फ 20 गेंदों पर नाबाद 68 रन बनाए, जिससे भारत ने सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली. उनकी इस पारी के बाद कीवी खिलाड़ियों को मजाकिया अंदाज में उनका बल्ला चेक करते हुए भी देखा गया. 

बाएं हाथ के बल्लेबाज बने टेंशन

ओरम ने माना कि न्यूजीलैंड के गेंदबाजों के लिए बाएं हाथ के बल्लेबाज के खिलाफ अपनी योजनाओं को लागू करना बहुत मुश्किल रहा है, क्योंकि वे उसकी आक्रामक बल्लेबाजी के सामने शांत नहीं रह पाए हैं. चौथे मैच से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओरम ने एक सवाल के जवाब में कहा कि जब आप उनके स्ट्राइक रेट को देखते हैं, तो सबसे पहले उनके गेम में कोई असली कमजोरी ढूंढना मुश्किल होता है और फिर दूसरी बात उनके खिलाफ कोई प्लान लागू करना. क्रिकेट में प्लान को लागू करना सबसे मुश्किल काम है, चाहे आप बैटिंग कर रहे हों या बॉलिंग. 

सबक सीखने के लिहाज से सीरीज अहम 


ओराम ने आगे कहा कि यह सीरीज मुख्य रूप से सबक सीखने और उन अनुभवों को 2026 के T20 वर्ल्ड कप में आगे ले जाने के बारे में है. उन्होंने कहा कि साथ ही जब बीच मैदान में थोड़ा अफरा-तफरी होती है, गेंद इधर-उधर उड़ रही होती है तो शांत रहने, कंट्रोल में रहने, प्लान याद रखने और फिर उन्हें लागू करने के लिए असली धैर्य की जरूरत होती है, लेकिन यह सब सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा है. यह सीरीज बिल्कुल इसी बारे में थी और नतीजों के बावजूद, अगर हम इस अनुभव से बेहतर होकर निकलते हैं और मार्च में सुपर आठ, सेमी-फ़ाइनल और फाइइनल के कहीं आस-पास होते हैं, तो यह समय हमारे लिए बहुत कीमती होगा, क्योंकि हमने इससे बहुत कुछ सीखा होगा. 

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