क्रिकेट में कितने ही ऐसे उदाहरण हैं जहां पर चोट ने करियर बिगाड़ दिया. इनमें से एक नाम क्रेग कीजवेटर का भी शामिल है. इस खिलाड़ी ने बेहतर विकल्पों के लिए देश छोड़ा. फिर जहां गया वहां पर परदेसी होने के ताने सुने लेकिन खेल से ध्यान नहीं हटाया. तीन महीने के अंदर इस खिलाड़ी ने सिक्का जमा लिया और अनजाने नाम से विश्व विजेता खिलाड़ी बन गया. फिर एक दिन चेहरे पर गेंद लगी और करियर खत्म हो गया. अब बहुत कम लोग क्रेग कीजवेटर और उनके खेल के बारे में जानते हैं.
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कीजवेटर ने एक ऐसा काम किया था जो इंग्लैंड के लिए पहले हो नहीं पाया था. इंग्लिश टीम ने 2010 वर्ल्ड टी20 (टी20 वर्ल्ड कप) जीता था. इसके नायक कीजवेटर थे. उन्होंने टूर्नामेंट में सात मैच में 222 रन बनाए थे. फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के सामने 49 गेंद में 63 रन की पारी खेली और प्लेयर ऑफ दी मैच बने. यह इंग्लैंड का पहला आईसीसी ग्लोबल खिताब था. इससे पहले उसने कभी ऐसी सफलता हासिल नहीं की थी और अगली आईसीसी ट्रॉफी जीतने में नौ साल लगे.
कीजवेटर का कमाल का डेब्यू
कीजवेटर इस टूर्नामेंट के शुरू होने से तीन महीने पहले तक इंग्लिश टीम का हिस्सा तक नहीं थे. घरेलू क्रिकेट में कमाल करने के चलते वे इंग्लैंड लॉयंस में खेल रहे थे. वहां पर भी अच्छा खेलने के बाद फरवरी 2010 में बांग्लादेश दौरे के जरिए इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखा. इसके बाद अगले तीन महीने में क्रिकेट जगत में उनका नाम हरेक फैन की जुबान पर था. कीजवेटर के लिए लेकिन रास्ता आसान नहीं था. वे 2006 में साउथ अफ्रीका की ओर से अंडर 19 वर्ल्ड कप खेले थे. मगर वहां भविष्य नहीं दिखा तो इंग्लैंड चले गए. उनकी मां स्कॉटलैंड से थी इसलिए उनके पास ब्रिटिश पासपोर्ट था. 2010 में वह इंग्लैंड की ओर से खेलने के लिए क्वालिफाई हुए और अगले कुछ दिनों में इंग्लिश टीम में शामिल कर लिए गए.
कीजवेटर का साउथ अफ्रीका कनेक्शन
तब साउथ अफ्रीकी मूल के बहुत से क्रिकेटर इंग्लैंड की ओर से खेल रहे थे. इनमें केविन पीटरसन, जॉनाथन ट्रॉट, माइकल लंब, एंड्रयू स्ट्रॉस, मैट प्रायर, जेड डर्नबैक जैसे नाम शामिल थे. ऐसे में इंग्लैंड में आवाजें उठ रही थीं कि इस संख्या को नियंत्रित करने की जरूरत है. मगर कीजवेटर ने इस पर ध्यान नहीं दिया. उन्होंने समरसेट के लिए खेलते हुए रनों की बारिश की और इंग्लिश टीम के लिए दावा पेश किया. फरवरी 2010 में उन्होंने इंग्लैंड की सीनियर टीम के खिलाफ 81 रन की पारी खेली. इससे बांग्लादेश दौरे के लिए चुने गए. वहां तीसरे ही वनडे में शतक जड़ दिया. इसने उन्हें जमा दिया.
वह चोट जिसने खत्म कर दिया कीजवेटर का करियर
कीजवेटर को 2010 वर्ल्ड टी20 के बाद दिक्कतें हुईं. लगातार रन उनके बल्ले से नहीं आए. इससे दबाव बढ़ता गया. 2013 का भारत दौरा उनके लिए इंग्लैंड की ओर से आखिरी रहा. बाद में टीम में चुने गए मगर खेल नहीं सके. 2014 में फिर ऐसी घटना हुई जिसने उनके करियर को तगड़ी चोट पहुंचाई. वे काउंटी चैंपियनशिप में समरसेट की ओर से नॉर्थम्पटनशर के खिलाफ खेल रहे थे. डेविड विली की एक छोटी लैंथ की गेंद उनके हेलमेट की जाली में से अंदर गई. इससे नाक की हड्डी और आंख के नीचे की हड्डी फ्रेक्चर हो गई. इसके बाद उनके देखने की क्षमता पर बुरा असर पड़ा. वे खेल के मैदान पर लौटे लेकिन गेंद को सही से देख नहीं पाते थे. ऐसे में 2015 में संन्यास ले लिया.
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