बेन स्टोक्स ने ट्रेंट ब्रिज में न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज का फैसला करने वाले तीसरे टेस्ट मैच के चौथे दिन के बीच अचानक ही इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास का ऐलान करके हर किसी को चौंका दिया. इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने टी ब्रेक से ठीक 15 मिनट पहले आधिकारिक घोषणा की, जबकि 35 साल के स्टोक्स मैदान पर लगातार बॉलिंग कर रहे थे. स्टोक्स के अचानक रिटायरमेंट की घोषणा के बाद उनके इस फैसले की वजह को लेकर अटकलें शुरू हो गई. उनके संन्यास पर सवाल पूछा जाने लगा है कि क्या उन्हें इसके लिए मजबूर किया गया है. क्या अधिकारियों ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया था?
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दरअसल यह अटकलें उस घटना की वजह से लगाई जाने लगी, जिसके कारण उन्हें दूसरे टेस्ट से बाहर कर दिया गया था और उन्होंने तीसरे टेस्ट में वापसी की थी. अनुशासनात्मक कारणों से ओवल में खेले गए दूसरे टेस्ट से स्टोक्स को बाहर कर दिया गया था. न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टेस्ट में मिली जीत के बाद स्टोक्स और गस एटकिंसन ने कर्फ्यू नियमों का उल्लंघन किया था और नाइटक्लब गए थे, जहां उनकी एक रग्बी खिलाड़ी से बहस हो गई थी ECB और क्रिकेट रेगुलेटर ने उनके खिलाफ जांच शुरू की थी. हालांकि बाद में उन्हें किसी भी गंभीर गलती के आरोप से बरी कर दिया गया और ट्रेंट ब्रिज टेस्ट के लिए टीम में वापस बुला लिया गया, लेकिन ऐसी अफवाहें थीं कि गवर्निंग बॉडी अपने कप्तान को सजा देने की तैयारी कर रही थी, जिससे उनके बीच बड़ी दरार पैदा हो गई थी.
अनुशासनात्मक कार्रवाई का असर नहीं
यह खबर सामने आने के बाद स्काई स्पोर्ट्स से बात करते हुए स्टोक्स ने साजिश की थ्योरीज पर सीधे बात की और साफ किया कि यह फैसला पूरी तरह से उनका अपना था. उन्होंने इस बात से इनकार किया कि अनुशासनात्मक कार्रवाई या ओवल में मैच न खेल पाने का उनके शानदार 15 साल के इंटरनेशनल करियर को खत्म करने के फैसले पर कोई सीधा असर पड़ा था.
इसके बजाय स्टोक्स ने बताया कि उनके टीम छोड़ने की वजहें बहुत पहले से जुड़ी हुई थीं, जिनकी शुरुआत पिछली सर्दियों में ऑस्ट्रेलिया में एशेज सीरीज में मिली 4-1 की हार के दौरान हुई थी. स्टोक्स का कहना है कि लॉर्ड्स टेस्ट ने उनके मन में उनके करियर की स्थिति को लेकर नकारात्मक भावनाएं जगा दी थीं. उन्होंने बताया कि घर लौटने के बाद उन्होंने चीजों को ठीक करने के लिए बहुत मेहनत की थी. उन्होंने इसमें बहुत समय और मेहनत लगाई और आखिरकार वह पूरी तरह थककर टूट गए.
आग में घी का काम
हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि बोर्ड ने उन पर कोई दबाव नहीं डाला, लेकिन उन्होंने माना कि नाइटक्लब विवाद और उसके बाद मीडिया में मचे हंगामे ने पहले से सुलग रही आग में घी का काम किया.
दिलचस्प बात यह है कि दूसरे टेस्ट के लिए इंग्लैंड टीम से बाहर किए जाने से उन्हें वह स्पष्टता मिली जिसकी उन्हें ज़रूरत थी. सार्वजनिक रूप से ऐलान से पहले स्टोक्स ने ड्रेसिंग रूम में अपने साथियों को इकट्ठा किया और उनसे कहा कि वे मैच जीतने की आखिरी कोशिश के लिए अपनी भावनाओं को एक तरफ रख दें. उन्होंने खुले तौर पर अपने फ़ैसले को स्वार्थी लेकिन जरूरी बताया और यह भी माना कि उनका मौजूदा सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट 2027 की गर्मियों तक चलने वाला था.
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