मोहम्मद शमी 36 की उम्र में भी टीम इंडिया की उम्मीद छोड़ने को नहीं तैयार, बोले- चाहे किसी भी...

मोहम्मद शमी पिछले डेढ़ साल से भारतीय क्रिकेट टीम से बाहर चल रहे हैं. वेे घरेलू क्रिकेट में खेल रहे हैं और अच्छा खेल दिखा रहे हैं. इसके बावजूद उन्हें किसी भी फॉर्मेट में नहीं चुना जा रहा है.

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Mohammed Shami in this frame. (Getty)

Mohammed Shami in this frame. (Getty)

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मोहम्मद शमी मार्च 2025 के बाद से भारतीय टीम से बाहर हैं.

मोहम्मद शमी भारत के लिए आखिरी बार 2023 में खेले थे.

मोहम्मद शमी 36 साल के हो चुके हैं लेकिन उन्होंने अभी तक भारतीय क्रिकेट टीम में वापसी की उम्मीद नहीं छोड़ी है. उनका कहना है कि उनकी प्रेरणा में कोई कमी नहीं आई है. मोहम्मद शमी दलीप ट्रॉफी 2026 जीतने वाली ईस्ट जोन का हिस्सा थे. उन्होंने फाइनल में दो विकेट निकाले. इससे पहले सेमीफाइनल में पांच विकेट लिए थे. शमी का कहना है कि वह अभी भी करियर के अगले लेवल की तरफ देख रहे हैं. 

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शमी मार्च 2025 के बाद से भारतीय टीम से बाहर हैं. वे आखिरी बार चैंपियंस ट्रॉफी जीतने वाली टीम इंडिया का हिस्सा थे. तब से उन्हें किसी भी फॉर्मेट में भारत के लिए दोबारा खेलने का मौका नहीं मिला. उनका आखिरी टेस्ट मैच 2023 वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल था. लेकिन शमी ने हार नहीं मानी है. उन्होंने दलीप ट्रॉफी फाइनल के बाद कहा, 'अगर आप देखेंगे तो बहुत सारे कारण हैं जिनके चलते प्रेरित हुआ जा सकता है. इस लेवल पर अगर खुद से प्रेरित नहीं हैं तो आपका रवैया गलत है. फिर चाहे किसी भी स्टेज पर आप खेल रहे हो, आपकी आंखें हमेशा अगले लेवल पर रहनी चाहिए.'

शमी ने दलीप ट्रॉफी में लिए थे अहम विकेट

शमी को दलीप ट्रॉफी फाइनल में महज दो ही विकेट मिले लेकिन ये रविचंद्रन स्मरण और शेख राशिद के थे. दोनों ही साउथ जोन के अहम बल्लेबाज थे. इन दोनों को आउट करने से ईस्ट जोन के लिए पहली पारी की बढ़त लेने का रास्ता खुला. जिस तरह से शमी ने इन दोनों को आउट किया वह भी दिखाता है कि किस तरह का अनुभव उनके पास है. इस बारे में शमी ने कहा, 'जहां तक संतुष्टि की बात है तो मेरे 100वें फर्स्ट क्लास मैच और दलीप ट्रॉफी फाइनल में ऐसा करना खास रहा. ईस्ट जोन काफी लंबे समय बाद जीता है.आपने देखा होगा हमने कैसा प्रदर्शन किया.' 

शमी बोले- गर्व से खेलो

शमी एक दशक से ज्यादा समय से क्रिकेट खेल रहे हैं. लेकिन अभी भी उनकी ऊर्जा में कमी नहीं आई. उन्होंने कहा, 'जब आप यह क्रेस्ट सीने पर पहनते हैं तो क्रिकेट का लेवल मतलब नहीं रखते. अगर आप बैज के लिए खेलते हैं तो उसकी भूख स्वाभाविक रूप से दिखती है. जब गर्व के साथ खेलते हैं तो लड़ने की इच्छा बढ़ जाती है. मेरा माइंडसेट सादा है- जहां भी मुझे खेलने का मौका मिलता है तो उसमें पूरा योगदान देना चाहता हूं.'

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