भारत के चैंपियन बनने पर दो बार एशिया कप ट्रॉफी वाले ड्रामे के बाद अब एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के चेयरमैन के तौर पर मोहसिन नकवी के कार्यकाल की चर्चा शुरू हो गई. यानी अब यह देखना है कि क्या वह अगले एशिया कप के वक्त भी अपनी कुर्सी पर रहेंगे या फिर उनकी छुट्टी हो जाएगी. अगला एशिया कप 18 जून से 4 जुलाई के बीच खेला जाएगा. नकवी का कार्यकाल शायद अब आखिरी कुछ महीनों में है.उन्होंने पिछले दो सालों में किसी और अधिकारी को एशिया कप की ट्रॉफी जीतने वाली भारतीय टीम को सौंपने नहीं दिया.पाकिस्तान के गृह मंत्री नकवी का ACC चेयरमैन के तौर पर दो साल का कॉन्ट्रैक्ट अप्रैल 2027 में खत्म हो रहा है और उनके अगले कार्यकाल के लिए चुने जाने की संभावना कम है.
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ACC को पहले से पता था नकवी से ट्रॉफी ना लेने का भारत का फैसला
PTI के अनुसार भले ही नकवी के कॉन्ट्रैक्ट में कार्यकाल बढ़ाने का प्रावधान है, लेकिन उन्हें ACC सदस्यों से जरूरी समर्थन मिलने की संभावना कम है. यह साफ नहीं है कि BCCI क्या करेगा, लेकिन दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण रिश्तों को देखते हुए भारत के नकवी का समर्थन करने की कल्पना करना मुश्किल है.
पहले ही दे दी गई थी जानकारी
पहलगाम आतंकी हमले के बाद देश के बारे में दिए गए आपत्तिजनक बयानों की वजह से वे भारत में बहुत ज़्यादा नापसंद किए जाते हैं. BCCI ने 2025 पुरुष एशिया कप में उनसे ट्रॉफी न लेने का फैसला किया था, जिसके बाद वे दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम से ट्रॉफी लेकर चले गए.बीते दिन भी ऐसा ही हुआ. फ़ाइनल में श्रीलंका को 72 रनों से हराने के बाद महिला टीम ने नकवी से ट्रॉफी लेने से मना कर दिया था, जबकि ACC को पहले ही इस फैसले की जानकारी दे दी गई थी. इसके बाद भी नकवी ट्रॉफी देने के लिए स्टेज पर चढ़ गए.
ACC की प्रेसिडेंसी कैसे काम करती है?
ACC की प्रेसिडेंसी इसके सभी फुल मेंबर बोर्ड्स भारत, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका के बीच दो साल के कार्यकाल के लिए बारी-बारी से घूमती रहती है. इसका फेसला सालाना आम बैठक (AGM) में किया जाता है, इसलिए कोई भी देश लगातार दो बार यह पद नहीं संभालता. मौजूदा प्रेसिडेंट का कार्यकाल दो साल से ज़्यादा बढ़ाया जा सकता है, लेकिन ऐसा तभी हो सकता है जब कोई दूसरा मेंबर बोर्ड AGM में औपचारिक रूप से इसका प्रस्ताव रखे और सभी मेंबर बोर्ड सर्वसम्मति से इसका समर्थन करें. कार्यकाल को नए सिरे से शुरू करने के बजाय हर बार इसमें एक साल और जोड़ा जाता है.
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