तिलक वर्मा ने बुधवार को 2026-27 दलीप ट्रॉफी फाइनल में साउथ जोन और ईस्ट जोन के बीच मुकाबले में रेड-बॉल क्रिकेट में अपना शानदार फॉर्म जारी रखा, लेकिन वे एक यादगार शतक बनाने से बहुत कम अंतर से चूक गए.इसी के साथ वह 61 दिन आउट हुए. 11 जुलाई के बाद से तिलक वर्मा आउट नहीं हुए थे.वे उस महीने ज़िम्बाब्वे के खिलाफ तीनों T20I और दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में नॉट आउट रहे थे, मगर फाइनल में वह 99 रन पर आउट हो गए.
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चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में ईस्ट ज़ोन ने पहली पारी में 708 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया था.इसके बाद बाएं हाथ के बल्लेबाज तिलक अपनी टीम के 336 रनों पर नौ विकेट गिरने के बावजूद टूर्नामेंट में लगातार अपना दूसरा शतक लगाने के करीब थे.अपने इस खास रन के लिए शॉट खेलने की कोशिश में तिलक ऑफ-स्पिनर कौनेन कुरैशी की गेंद पर कैच एंड बोल्ड हो गए. साउथ जोन को 336 रन पर समेटने और 372 रन की बढ़त हासिल करने के बाद ईस्ट जोन ने फ़ाइनल में खेल का एक दिन बाकी रहते हुए 14 साल में अपना पहला ख़िताब जीतना लगभग पक्का कर लिया है.
तिलक का प्रदर्शन
इस सीजन में पहली बार साउथ जोन की कप्तानी करने वाले तिलक ने 2023 में रेड-बॉल टूर्नामेंट में डेब्यू करने के बाद से सिर्फ छह मैचों में अपनी तीसरी दलीप ट्रॉफी सेंचुरी के करीब पहुंच रहे थे. इस महीने के आखिर में एशियन गेम्स के लिए भारत की T20I टीम के साथ उप-कप्तान के तौर पर जाने वाले तिलक ने इस टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया.इसकी शुरुआत साउथ जोन की नॉर्थ जोन पर सेमीफ़ाइनल जीत से हुई. सेमीफ़ाइनल की पहली पारी में साउथ जोन को मुश्किल से निकालने के लिए नाबाद 116 रन बनाने के बाद तिलक ने दूसरी पारी में 79 गेंदों पर नाबाद 51 रन बनाए.उनकी इस पारी की बदौलत उनकी टीम ने 181 रन का लक्ष्य हासिल किया और पिछले सप्ताह बेंगलुरु के BCCI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ग्राउंड 2 पर खेले गए मैच में फाइनल में जगह बनाई.
रेड-बॉल क्रिकेट में मजबूत दावेदारी
तिलक के लिए इन दो पारियों ने रेड-बॉल क्रिकेट में उनकी मजबूत दावेदारी पेश की. उन्होंने भारत के T20 सेटअप में तो अपनी जगह बना ही ली है, लेकिन बेंगलुरु में खेली गई उनकी दो पारियों ने उनकी बल्लेबाजी का एक और पहलू दिखाया.पहली पारी में उन्हें टीम को तब संभालना पड़ा,जब साउथ की टीम 80/5 पर संघर्ष कर रही थी.दूसरी पारी में उन्हें एंकर की भूमिका निभानी थी और यह सुनिश्चित करना था कि लक्ष्य का पीछा करना मुश्किल न हो जाए.
चेन्नई में इस बाएं हाथ के बल्लेबाज ने अपने फ़र्स्ट-क्लास रिकॉर्ड को और बेहतर बनाया.उन्होंने 24 मैचों में 58 से ज़्यादा की औसत से आठ शतक और सात अर्धशतक लगाए. इससे पहले फाइनल में तिलक की ईस्ट ज़ोन टीम के साथी इशान किशन ने 270 रन की अपनी करियर की सबसे बड़ी पारी खेलकर मैच की नींव रखी.इस पारी में उन्होंने 30 चौके और सात छक्के लगाए. इशान का यह स्कोर दलीप ट्रॉफी फ़ाइनल में किसी खिलाड़ी का दूसरा सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर था.उनसे आगे सिर्फ रमन लांबा हैं, जिन्होंने 1987 में नॉर्थ जोन के लिए 320 रन बनाए थे.
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