BCCI ने सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट के लिए खेला मास्टर स्ट्रोक, इंजर्ड होने से खिलाड़ी को नुकसान, जानें प्लान

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) अगले साल के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट का ऐलान करने से पहले खिलाड़ियों की मैच उपलब्धता को नया मानदंड बनाने पर विचार कर रहा है.

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BCCI finally invites applications for CoE Head of Sports Science to fill void since March 2025. (Getty)

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BCCI अगले साल के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट का ऐलान करेगा

पूरे सीजन खिलाड़ियों की उपलब्धता पर नजर रखी जा सकती है

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने अभी तक अगले साल के लिए खिलाड़ियों के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट का ऐलान नहीं किया है. अब बोर्ड ने इसका ऐलान करने से पहले एक बड़ा मास्टर स्ट्रोक खेलने का प्लान बनाया है. इसके तहत बीसीसीआई एक नया प्लान बना रही है, जिसमें अगर कोई खिलाड़ी तमाम मैचों के लिए उपलब्ध नहीं रह पाता है तो उसे हाई कॉन्ट्रैक्ट वाली कैटेगरी में नहीं रखा जाएगा. यानी बोर्ड का हाई लेवल कॉन्ट्रैक्ट पाने के लिए खिलाड़ी को मिनिमम कुछ मैच खेलने होंगे. यानी सब कुछ खिलाड़ी की उपलब्धता पर निर्भर होगा कि वह भारत के लिए कितने मैच खेलता है. उस आधार पर ही उसका सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट तय किया जाएगा.

बीसीसीआई का क्या है मास्टर प्लान?

बीसीसीआई के एक अधिकारी ने स्पोर्ट्स तक से खास बातचीत में कहा कि खिलाड़ियों की उपलब्धता को लेकर विचार जारी है. सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट के लिए पूरे सीजन खिलाड़ियों की उपलब्धता पर नजर रखी जाएगी. पूरी प्रक्रिया का प्रोसेस तैयार किया जा रहा है. जिसमें ये तय किया जाएगा कि सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट पाने के लिए खिलाड़ी को कितने मैच कम से कम खेलने होंगे. हालांकि ये सब कुछ अभी औपचारिक नहीं किया गया है और इससे जुड़े हर एक पहलू पर चर्चा की जाएगी. जिसके बाद आकलन किया जाएगा कि इसे लागू किया जाए या नहीं.

इंजर्ड खिलाड़ियों को कैसे होगा नुकसान?

बोर्ड के इस प्लान से साफ है कि टीम इंडिया के तमाम खिलाड़ी इंजरी के चलते साल भर में बहुत ही कम मैच खेल पाते हैं. अधिकतर मैचों के लिए वह उपलब्ध नहीं रहते हैं. अब बोर्ड ने खिलाड़ियों की इंजरी और उनकी समस्या को देखते हुए सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में नया विचार रखा है. इसके चलते अगर कोई खिलाड़ी इंजरी के चलते ज्यादातर बाहर रहता है तो शायद उसे सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट भी गंवाना पड़ सकता है. इसके लिए उसे मिनिमम मैच भारत के लिए खेलने ही होंगे.

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बोर्ड की कितनी कैटेगरी है?

पिछले साल बोर्ड ने ए प्लस कैटेगरी समाप्त की थी. अब सिर्फ ग्रेड ए, ग्रेड बी और ग्रेड सी इन तीन कैटेगरी के तहत ही खिलाड़ी बोर्ड से सालाना एक तय रकम प्राप्त करते हैं. ग्रेड ए में शुभमन गिल, जसप्रीत बुमराह और रवींद्र जडेजा का नाम है, जिनको बोर्ड आठ करोड़ सालाना देता है. इसके अलावा ग्रेड बी के प्लेयर्स को तीन करोड़ और ग्रेड सी के खिलाड़ियों को एक करोड़ सालाना मिलता है.

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