भारत की स्टार महिला पहलवान विनेश फोगाट को बड़ी राहत मिली है. भारतीय कुश्ती महासंघ (भारतीय कुश्ती महासंघ) ने एशियन गेम्स के ट्रायल्स के लिए ऐसा नियम बनाया था, जिससे विनेश फोगाट का इसमें भाग लेना मुश्किल नजर आ रहा था. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अब दिल्ली हाई कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें ट्रायल्स में भाग लेने की अनुमति दे दी है.
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डब्ल्यूएफआई ने क्या नियम बनाया था?
6 मई को भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) ने एशियन गेम्स ट्रायल्स के लिए एक नया क्राइटेरिया जारी किया था. इसमें कहा गया था कि केवल वही खिलाड़ी ट्रायल्स में हिस्सा ले सकेंगे जिन्होंने 2025 सीनियर नेशनल कुश्ती चैंपियनशिप में मेडल जीता हो, 2026 सीनियर फेडरेशन कप में मेडल जीता हो, 2026 अंडर-20 नेशनल चैंपियनशिप में मेडल जीता हो.
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पेरिस ओलंपिक में क्या हुआ था?
विनेश फोगाट ने 2024 पेरिस ओलंपिक में महज 100 ग्राम अधिक वजन के कारण अपना पक्का सिल्वर मेडल गंवा दिया था. इसके बाद 1 जुलाई 2025 को उन्होंने एक बेटी को जन्म दिया और कुछ समय के लिए खेल से दूरी बना ली. बाद में उन्होंने रिटायरमेंट का फैसला वापस लेते हुए वापसी की घोषणा की.
विनेश फोगाट के पक्ष में फैसला क्यों गया?
विनेश फोगाट ने WFI के ट्रायल नियमों को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने आदेश दिया कि उन्हें 30–31 मई को होने वाले चयन ट्रायल्स में हिस्सा लेने की अनुमति दी जाए. कोर्ट ने कहा कि यह नीति भेदभावपूर्ण प्रतीत होती है क्योंकि यह अनुभवी खिलाड़ियों, विशेषकर मातृत्व अवकाश के कारण खेल से कुछ समय के लिए दूरी बनाई हो.
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