जापान के आइची-नागोया में एशियन गेम्स 2026 का आधिकारिक आगाज 19 सितंबर से होना है. लेकिन इससे पहले ही भारत की एथलीट क्विम्सी डिसूजा चर्चा का विषय बनी हुई हैं. क्योंकि वह अपने मेडल से सिर्फ एक जीत दूर की दहलीज पर आ गई हैं. क्विम्सी अगर ऐसा करती हैं तो भारत को नए खेल टेकबॉल (टेबल टेनिस और फुटबॉल का मिश्रण) का मेडल एशियन गेम्स में दिलाने वाली वो पहली भारतीय महिला बन जाएंगी. यही कारण है कि अब सभी फैंस जानना चाहते हैं कि कौन हैं क्विम्सी डिसूजा और कैसे उन्होंने एशियन गेम्स तक का सफर इस नए खेल में तय किया.
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क्विम्सी डिसूजा का धमाल
टेकबॉल पहली बार एशियन गेम्स में शामिल किया गया है. इस खेल को पहली बार साल 2018 के जकार्ता एशियाई खेलों में प्रदर्शित किया गया था. लेकिन अब इसे आधिकारिक रूप से शामिल कर लिया गया है. टेकबॉल की महिला सिंगल्स स्पर्धा में भारत की क्विम्सी डिसूजा ने 2-0 से जीत दर्ज करके सेमीफाइनल में जगह बना ली है. अब वो एक और मैच जीतती हैं तो भारत के लिए कम से कम सिल्वर मेडल पक्का हो जाएगा. अगर वो सेमीफाइनल में हारती हैं तो फिर उनको कांस्य पदक के लिए अगले मैचों में फाइट करना होगा. इस लिहाज से क्विम्सी डिसूजा के पास ऐतिहासिक मेडल जीतने का सुनहरा मौका है.
क्विम्सी डिसूजा का सेमीफाइनल में किससे सामना होगा?
मुंबई में जन्मीं क्विम्सी डिसूजा ने एशियन गेम्स में पहली बार खेली जाने वाली टेकबॉल स्पर्धा में मेजबान जापान की पसंदीदा खिलाड़ी यूइना सकामोटो को 43 मिनट में 2-1 (10-12, 12-11, 13-11) से हराया. इसके बाद ग्रुप बी के अगले मुकाबले में उन्होंने कंबोडिया की कोएम्येन डी को 2-0 (12-9, 12-7) से मात देकर सेमीफाइनल में कदम रखा. अब सेमीफाइनल में क्विम्सी डिसूजा का सामना इंडोनेशिया की इमा सुमाया से होगा.
रोनाल्डिन्हो के वीडियो से बदली जिंदगी
वहीं क्विम्सी डिसूजा की बात करें तो वह मुंबई की रहने वाली हैं. 13 साल की उम्र तक वह मिडिल डिस्टेंस रनर थीं और उसके बाद उन्होंने फुटबॉल में अपना करियर बनाना चाहा. क्विम्सी ने फिर अंडर-19 स्टेज तक फुटबॉल भी खेला, लेकिन इसके आगे वो नहीं जा सकीं तो फिर स्पोर्ट्स मैनेजमेंट की डिग्री पूरी की. इस डिग्री के बाद क्विम्सी ने स्पोर्ट्स गुड्स रिटेलर डेकाथलॉन में जॉब भी की और ब्राजील के दिग्गज फुटबॉलर रोनाल्डिन्हो को जब इंस्टाग्राम पर टेकबॉल खेलते हुए देखा तो उनके अंदर इस खेल के प्रति जुनून जाग गया.
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रोनाल्डिन्हो के वीडियो के बाद क्विम्सी की जिंदगी पूरी तरह से बदल गई और उन्होंने टेकबॉल को अपनाया. भारत में जब टेकबॉल शुरू हो रहा था, तभी उन्होंने बेंगलुरु में अपनी अकादमी भी स्थापित की. क्विम्सी सात बार नेशनल चैंपियनशिप जीत चुकी हैं और अब भारत के लिए एशियन गेम्स में मेडल जीतकर इतिहास रचना चाहेंगी.
क्या है टेकबॉल?
टेबल टेनिस और फुटबॉल के मिश्रण टेकबॉल की बात करें तो इसे विशेष रूप से मुड़ी हुई टेबल पर खेला जाता है. इसमें खिलाड़ी फुटबॉल को छाती, सिर और पैर के इस्तेमाल से टेबल पर लगे नेट के दूसरी तरफ सामने वाले खिलाड़ी की साइड में गेंद को उस पार भेजता है. इसमें हाथों और बाहों का इस्तेमाल फुटबॉल की तरह सख्त रूप से मना है. इसमें एक मैच बेस्ट-ऑफ-3 सेट्स का होता है और प्रत्येक सेट को जीतने के लिए एक खिलाड़ी या टीम को 12 पॉइंट्स (अंक) बनाने होते हैं.
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