FIFA World Cup 2026: इंग्लैंड और अर्जेंटीना के रेफरी एक-दूसरे के मैच में रेफरी क्यों नहीं बन सकते?

वर्ल्ड कप में सात मैचों में रेफरी की भूमिका निभाने के बावजूद इंग्लैंड के ओलिवर शायद 19 जुलाई को ईस्ट रदरफोर्ड के मेटलाइफ स्टेडियम में होने वाला फाइनल मैच न करा पाएं, अगर लियोनेल मेसी की टीम उसमें जगह बना लेती है.

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इंग्लैंड के रेफरी ओलिवर (PC: Getty)

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अर्जेंटीना और स्विट्जरलैंड के बीच क्वार्टर फाइनल मुकाबला.

इंग्लैंड क्वार्टर फाइनल में नॉर्वे से टकराएगा.

फीफा वर्ल्ड कप 2026 जैसे- जैसे नॉकआउट के आखिरी दौर की ओर बढ़ रहा है, रेफरी के फैसलों पर बहुत ज़्यादा ध्यान दिया जा रहा है और उनकी कड़ी जांच हो रही है. मंगलवार रात को वर्ल्ड चैंपियन अर्जेंटीना और इजिप्ट के बीच हुए रोमांचक राउंड ऑफ 16 मैच के दौरान यह मामला पीक पर पहुंच गया, जिसमें फ्रांसीसी रेफरी फ्रांस्वा लेटेक्सियर ने मैच का संचालन किया. 

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हालांकि वर्ल्ड फुटबॉल संस्था हर मैच के लिए अधिकारियों की निष्पक्षता पर नजर रखती है, लेकिन ऐसे सभी कॉम्बिनेशन वर्ल्ड स्टेज पर स्वीकार्य नहीं होते हैं. जैसे अगर इंग्लैंड फाइनल की ओर बढ़ता है तो अर्जेंटीना के अधिकारी टूर्नामेंट में बाद में शायद ही दिखाई दें.  इसका उल्टा भी उतना ही मुश्किल भरा है, क्योंकि अगर अर्जेंटीना क्वार्टर फाइनल में स्विट्जरलैंड को हराकर आगे बढ़ता है, तो अनुभवी इंग्लिश अधिकारी एंथनी टेलर और माइकल ओलिवर मैच के रेफरी नहीं होंगे. 

मैदान के बाहर की राइवलरी 

वर्ल्ड कप में सात मैचों में रेफरी की भूमिका निभाने के बावजूद इंग्लैंड के ओलिवर शायद 19 जुलाई को ईस्ट रदरफोर्ड के मेटलाइफ स्टेडियम में होने वाला फाइनल मैच न करा पाएं, अगर लियोनेल मेसी की टीम उसमें जगह बना लेती है.  यह अजीब  स्थिति दोनों देशों के बीच 44 साल पहले हुई उस लड़ाई की वजह से बनी है, जो साउथ अटलांटिक महासागर में मौजूद द्वीपों के समूह, फ़ॉकलैंड आइलैंड्स पर कब्ज़ा करने के लिए लड़ी गई थी. यह 74 दिनों तक चली थी. जून 1982 में अर्जेंटीना के आत्मसमर्पण के साथ यह लड़ाई  समाप्त हई थी. इसमें कुल 649 अर्जेंटीना के सैनिक, 255 ब्रिटिश सैनिक और तीन फ़ॉकलैंड निवासी मारे गए थे. 


नॉकआउट मैचों के लिए रेफरी कैसे चुनता है FIFA?

वर्ल्ड कप के बाकी मैचों के लिए रेफरी की निष्पक्षता और अधिकारियों के चयन में 'मैच-दर-मैच' वाली नीति ही अपनाई जाती है. इसमें रेफरी के प्रदर्शन और संबंधित टीमों से जुड़े भू-राजनीतिक (geo-political) कारकों को ध्यान में रखा जाता है. उन्हें उन देशों के मैचों में रेफरी बनने से भी रोका जाता है, जो उनके अपने देश वाले ब्रैकेट (ग्रुप) में हैं. जैसे अर्जेंटीना और स्विट्जरलैंड के बीच होने वाले क्वार्टर-फाइनल के लिए इंग्लैंड या नॉर्वे के रेफरी पर विचार नहीं किया जाएगा, क्योंकि माना जाता है कि ये टीमें सेमीफाइनल में एक-दूसरे से भिड़ सकती हैं और इसका उल्टा भी हो सकता है. 

इसी तरह अर्जेंटीना के रेफरी फैकुंडो टेलो पर केवल ब्रैकेट के ऊपरी हिस्से (जिसमें फ्रांस, मोरक्को, स्पेन और बेल्जियम शामिल हैं) के क्वार्टर-फाइनल मैचों के लिए ही विचार किया गया था. 

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