कनाडा और मेक्सिको के बाद अब अमेरिका की टीम भी फीफा वर्ल्ड कप 2026 से बाहर हो गई है. यानी इस टूर्नामेंट के तीनों मेजबानों का सफर खत्म हो गया है. वर्ल्ड कप 2026 के तीनों मेजबानों का ही सफर राउंड ऑफ 16 से आगे नहीं बढ़ पाया. कनाडा को मोरक्को ने 3-0 से हराया तो मेक्सिको को इंग्लैंड के हाथों 3-2 से हार का सामना करना पड़ा. अब अमेरिका को बेल्जियम ने 4-1 से रौंदा. भारतीय समय के अनुसार मंगलवार को सिएटल स्टेडियम में सह मेजबान अमेरिका को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा. 2018 वर्ल्ड कप में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली बेल्जियम की टीम आसानी से क्वार्टर फ़ाइनल में पहुंच गई और अब सेमीफ़ाइनल में जगह बनाने के लिए उसका मुकाबला स्पेन से होगा.
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बेल्जियम की टीम पूरे मुकाबले काफी बेहतर दिखाई थी. उसने अमेरिका के मुकाबले ज़्यादा 'शॉट्स ऑन टारगेट' लगाए और 'एक्सपेक्टेड गोल्स' का स्कोर भी काफ़ी ज़्यादा रहा. बेल्जियम के लगातार हमलों का अमेरिकी टीम के पास कोई जवाब नहीं था. चार्ल्स डी केटेलेरे के शुरुआती दो गोल और US के खराब डिफेंस की वजह से हंस वनाकेन तीसरा गोल कर पाए. आखिरी पलों में रोमेलु लुकाकू के आखिरी गोल ने टीम के दबदबे वाले खेल को साबित किया. अमेरिका के लिए मलिक टिलमैन ने 31वें मिनट में गोल किया.
बेल्जियम ने अमेरिका को किया शर्मसार
इस मुकाबले में बेल्जियम ने अमेरिका को सिर्फ हराया ही नहीं है, बल्कि 3 गोल के अंतर से जीत हासिल करके शर्मसार कर दिया है. दरअसल इस मैच से पहले अमेरिका की टीम विवादों में फंस गई थी, जिसके बाद हर किसी की नजर उसके खेल पर थी. मैच से पहले अमेरिका के एक खिलाड़ी को लेकर FIFA ने ऐसा फैसला लिया, जिस पर विवाद हो गया. कुछ रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तीन फोन कॉल्स के बाद फीफा ने अपना फैसला बदल दिया था. बोस्निया और हर्जेगोविना के खिलाफ रेड कार्ड मिलने के बाद अमेरिकी खिलाड़ी फोलारिन बालोगुन पर ऑटोमैटिक एक मैच का बैन लगा दिया गया था. इससे स्ट्राइकर को गवर्निंग बॉडी के डिसिप्लिनरी कोड के आर्टिकल 27 के तहत खेलने का मौका मिला, मगर बेल्जियम ने इस विवाद पर ध्यान न देकर अपने खेल पर फोकस किया और क्वार्टर फाइनल में जगह पक्की कर ली.
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