माराडोना के ‘हैंड ऑफ़ गॉड’ से लेकर जिदान के हेडबट तक, ये हैं FIFA वर्ल्ड कप इतिहास के सबसे बड़े विवाद

हर वर्ल्ड कप देशों और खिलाड़ियों को यादगार पल बनाने और इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कराने का मौका देता है, लेकिन कभी-कभी कोई ऐसी घटना सामने आती है, जो विवाद के चलते इतिहास में दर्ज है.

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डिएगो माराडोना ने 1986 में एक गोल हाथ से किया गया था (PC: Getty)

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डिएगो माराडोना का हैंड ऑफ गोल फीफा वर्ल्ड कप इतिहास का सबसे बड़ा विवाद है.

फीफा वर्ल्ड कप 2026 का आगाज हो चुका है. अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की मेजबानी में शुरू होने इस टूर्नामेंट में  48 टीमें वलर्ड चैंप‍ियन बनने के चुनौती पेश करेगी. इस बड़े टूर्नामेंट में 16 वेन्यू पर 104 मैच खेले जाएंगे और ईस्ट रदरफोर्ड, न्यू जर्सी का मेटलाइफ स्टेडियम 19 जुलाई को फाइनल की मेजबानी करेगा. हर वर्ल्ड कप देशों और खिलाड़ियों को यादगार पल बनाने और इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कराने का मौका देता है, लेकिन कभी-कभी कोई ऐसी घटना सामने आती है, जो विवाद के चलते इतिहास में दर्ज है. 

तीन रेड कार्ड, दो गोल, फीफा वर्ल्ड कप 2026 के पहले मैच में क्या हुआ?

फीफा वर्ल्ड कप के सबसे बड़े व‍िवाद 

हैंड ऑफ गॉड

1986 वर्ल्ड कप के क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड के ख़िलाफ डिएगो माराडोना का 'हैंड ऑफ गॉड' गोल अब तक के सबसे विवादित गोलों में से एक माना जाता है. दूसरे हाफ के छठे मिनट में इंग्लैंड के डिफ़ेंस से हुई एक कमज़ोर क्लीयरेंस गेंद को माराडोना की तरफ ले गई. उन्होंने उछलकर गेंद को गोलकीपर पीटर शिल्टन के ऊपर से नेट में पहुंचा दिया, जो उनके हाथ को टच करते हुए गोलपोस्ट में गई थी. अधिकारी हैंडबॉल को नहीं देख पाए और उस समय VAR जैसी कोई आधुनिक तकनीक उपलब्ध नहीं थी, इसलिए गोल को मान्यता मिल गई और अर्जेंटीना ने मैच 2-1 से जीत लिया. मैच के बाद हुई प्रेस कॉन्फ़्रेंस में माराडोना ने कहा कि यह गोल "थोड़ा माराडोना के सिर और थोड़ा भगवान के हाथ" से हुआ था. इसी के साथ यह वर्ल्ड कप के इतिहास का सबसे बड़ा विवाद बन गया. 

आंद्रेस एस्कोबार की हत्या

1994 वर्ल्ड कप में अमेरिका के ख़िलाफ ग्रुप-स्टेज मैच के दौरान कोलंबिया के डिफेंडर आंद्रेस एस्कोबार ने गलती से गेंद को अपनी ही टीम के गोल में डाल दिया था. इसके कुछ दिनों बाद ही मेडेलिन में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई. कोलंबिया वह मैच 2-1 से हार गया और टूर्नामेंट से बाहर हो गया. हालांकि हत्या की असल वजह पर अलग-अलग राय है, लेकिन इसे बड़े पैमाने पर कोलंबिया के निराशाजनक वर्ल्ड कप सफ़र और टीम की जीत पर लगाए गए भारी सट्टे से जोड़कर देखा गया. ड्रग कार्टेल के सदस्यों से जुडे एस्कोबार के हत्यारे बॉडीगार्ड को
43 साल की जेल की सज़ा सुनाई गई थी, लेकिन 11 साल की सजा काटने के बाद उसे रिहा कर दिया गया.


गिहोन का अपमान

अल्जीरिया वर्ल्ड कप की सबसे विवादित घटनाओं में से एक के शामिल रहा,  जिसमें वेस्ट जर्मनी और ऑस्ट्रिया पर आपसी फायदे वाला नतीजा निकालने के लिए खेलने का आरोप लगा था, हालांकि मैच-फिक्सिंग के आरोप कभी साबित नहीं हुए. अल्जीरिया ने 1982 के टूर्नामेंट की यादगार शुरुआत की और अपने पहले मैच में वेस्ट जर्मनी को 2-1 से चौंका दिया. इसके बाद उसे ऑस्ट्रिया से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन ग्रुप-स्टेज का अपना अभियान उसने चिली पर करीबी जीत के साथ खत्म किया. वेस्ट जर्मनी और ऑस्ट्रिया के बीच मैच होने से एक दिन पहले ही अल्जीरिया के मैच पूरे हो चुके थे, इसलिए दोनों यूरोपीय टीमों को क्वालिफिकेशन के समीकरण साफ पता थे. 


वेस्ट जर्मनी को आगे बढ़ने के लिए जीत की जरूरत थी, जबकि ऑस्ट्रिया भी तब आगे बढ़ सकता था जब वह दो से ज़्यादा गोल के अंतर से न हारे. स्पेन के गिहोन में एल मोलिनोन स्टेडियम में वेस्ट जर्मनी के लिए हॉर्स्ट ह्रुबेश ने 10वें मिनट में गोल किया. इसके बाद जो हुआ उसकी काफी आलोचना हुई, क्योंकि मैच की रफ्तार काफी कम हो गई और किसी भी टीम ने स्कोर बदलने की कोई खास जल्दबाजी नहीं दिखाई. मैच 1-0 पर खत्म हुआ और इस नतीजे से अल्जीरिया बाहर हो गया और दोनों टीमें आगे बढ़ गईं. इस मैच को 'गिहोन का अपमान' (Disgrace of Gijón) कहा गया और इसके बाद FIFA को अपने टूर्नामेंट के नियमों में बदलाव करना पड़ा. तब से हर ग्रुप में आखिरी ग्रुप-स्टेज मैच एक ही समय पर खेले जाते हैं ताकि टीमों द्वारा पहले के नतीजों के आधार पर मैच के परिणाम में हेरफेर करने की संभावना को कम किया जा सके. 

जिदान का हेडबट

जिनेदिन जिदान अपने शानदार करियर का बेहतरीन अंत करते हुए 2006 में फ्रांस को एक और वर्ल्ड कप फ़ाइनल तक पहुंचाया था. वहां भी उन्होंने जियानलुइगी बुफ़ोन के ख़िलाफ एक साहसी 'पानेन्का' पेनल्टी मारकर अपनी टीम को बढ़त दिलाई, लेकिन मार्को माटेराजी के मन में कुछ और ही चल रहा था. इटली के बराबरी करने के बाद माटेराजी ने जिदान को उकसाने वाली बातें कहीं. अल्जीरियाई मूल के फ्रांसीसी कप्तान ने एक्स्ट्रा टाइम में अपना आपा खो दिया और दुनिया भर के दर्शकों के सामने इतालवी डिफेंडर को सिर से टक्कर मार दी. जिदान को मैदान से बाहर भेज दिया गया और इसके साथ ही उनका वर्ल्ड कप जीतने का सपना भी टूट गया, क्योंकि इटली ने पेनल्टी शूटआउट में जीत हासिल की.

घोस्ट गोल

वर्ल्ड कप में इंग्लैंड को कई विवादित फैसलों का सामना करना पड़ा है, जिसमें 2010 टूर्नामेंट में जर्मनी के खिलाफ राउंड-ऑफ-16 मैच के दौरान फ्रैंक लैम्पार्ड का 'घोस्ट गोल' भी शामिल है. मिरोस्लाव क्लोज और लुकास पोडोलस्की के गोल ने 32 मिनट के बाद जर्मनी को 2-0 की बढ़त दिला दी, जिसके बाद मैथ्यू अपसन ने इंग्लैंड के लिए एक गोल किया. 

कुछ मिनट बाद लैम्पार्ड का शॉट गोलकीपर मैनुअल न्युअर के ऊपर से निकला, क्रॉसबार से टकराया और गोल लाइन के काफी पीछे गिरा. हालांकि न तो उरुग्वे के रेफरी जॉर्ज लैरिओंडा और न ही उनके सहायकों ने देखा कि गेंद लाइन पार कर गई थी और खेल जारी रहा. आखिरकार इंग्लैंड 4-1 से हार गया, जिसमें थॉमस मुलर ने दूसरे हाफ में दो गोल करके क्वार्टर फाइनल में जर्मनी की जगह पक्की कर दी. 

सुआरेज का हैंड ऑफ गॉड

हालांकि 'हैंड ऑफ गॉड' शब्द डिएगो माराडोना ने दिया था, लेकिन 2010 वर्ल्ड कप में घाना के खिलाफ हुए रोमांचक क्वार्टर-फाइनल मैच के बाद उरुग्वे के लुइस सुआरेज ने इसे अपना बता दिया. रेगुलर समय में सुले मुंतारी और डिएगो फ़ोरलान के गोल के बाद मैच एक्स्ट्रा टाइम में चला गया.एक्स्ट्रा टाइम के आखिर में डोमिनिक अडिय्याह के गोल की ओर जा रहे हेडर को सुआरेज ने गोल-लाइन पर शानदार तरीके से रोक दिया.उन्होंने जान-बूझकर गेंद को हाथ से छुआ था, जिसके लिए उन्हें रेड कार्ड दिखाया गया. हालांकि पेनल्टी के दौरान असमोआ ज्ञान की किक क्रॉसबार से टकरा गई, जिससे घाना सेमीफ़ाइनल में जगह नहीं बना पाया.इसके बाद उरुग्वे ने पेनल्टी शूटआउट में 4-2 से जीत हासिल की. सुआरेज को अपनी हरकत पर कोई पछतावा नहीं था.उन्होंने बाद में कहा कि अब 'हैंड ऑफ गॉड' मेरा है. 

वर्ल्ड कप ट्रॉफी की चोरी 

1930 से 1970 तक वर्ल्ड कप जीतने वालों को जो पहली ट्रॉफी दी गई, वह 'जूल्स रिमेट ट्रॉफी' थी.उस समय के FIFA प्रेसिडेंट के नाम पर रखी गई यह असली ट्रॉफी 'ग्रेट डिप्रेशन' और दो वर्ल्ड वॉर के दौरान भी सुरक्षित रही.14 इंच ऊंची इस ट्रॉफी में जीत की ग्रीक देवी 'नाइक' को एक कटोरा उठाए हुए दिखाया गया था और इसे 'विक्ट्री' कहा जाता था.

हालांकि 1966 के टूर्नामेंट से कुछ महीने पहले यह ट्रॉफी एक एग्ज़िबिशन से चोरी हो गई थी.उसी महीने के आखिर में 'पिकल्स' नाम के एक कुत्ते को यह ट्रॉफी बगीचे की बाड़ के नीचे अखबार में लिपटी हुई मिली. 1970 के टूर्नामेंट को ब्राज़ील ने जीता था.तीन बार वर्ल्ड कप जीतने वाला पहला देश बनने के कारण उन्हें यह ट्रॉफी हमेशा के लिए अपने पास रखने की इजाजत मिल गई. हालांकि 1983 में रियो डी जनेरियो में ब्राज़ीलियन फुटबॉल कॉन्फेडरेशन से यह ट्रॉफी एक बार फिर चोरी हो गई और कभी नहीं मिल पाई. 

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