चीन से मिला पैसा, फुटबॉल ने बदली तकदीर, 5 लाख की आबादी वाले केप वर्डे ने स्पेन को रुलाकर जानें कैसे बनाई पहचान ?

केप वर्डे ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 में दुनिया की नंबर 2 टीम स्पेन को गोलरहित ड्रॉ पर रोककर बड़ा उलटफेर किया. 10 द्वीपों और केवल 5 लाख आबादी वाले इस छोटे देश ने अपने पहले ही वर्ल्ड कप मैच में इतिहास रच दिया.

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Vozinha #1 of Cabo Verde

केप वर्डे के झंडे के साथ उनके गोल कीपर वोजिन्हा

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केप वर्डे ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 में स्पेन को 0-0 ड्रॉ पर रोका

चीन की मदद से फुटबॉल इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा सुधार हुआ

फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में केप वर्डे ने जब स्पेन से ड्रॉ खेला, तो इसे अब तक के सबसे बड़े उलटफेरों में गिना जा रहा है. केप वर्डे एक ऐसा देश है, जिसका नाम फीफा वर्ल्ड कप से पहले तक बहुत कम लोग जानते थे. लेकिन जब इस देश के खिलाड़ी फुटबॉल के मैदान में उतरे, तो उन्होंने सीधे दुनिया की नंबर 2 टीम स्पेन को हिला दिया. केप वर्डे के खिलाड़ी स्पेन जैसी मजबूत टीम के खिलाफ अपने वर्ल्ड कप इतिहास का पहला मैच पूरी तरह एन्जॉय करने उतरे और बेहद निडर नजर आए. उनका अद्भुत साहस, खेल के प्रति समर्पण और कुछ कर गुजरने की चाहत ने देश को नई पहचान दिलाई. अब हर कोई स्पेन से ड्रॉ खेलने वाले केप वर्डे की बात कर रहा है. ऐसे में आइए जानते हैं कि दुनिया के नक्शे में केप वर्डे कहाँ है और कैसे उसने फीफा वर्ल्ड कप के पहले ही मैच में लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया.

केप वर्डे देश में कितने आइलैंड शामिल हैं?

केप वर्डे वेस्ट अफ्रीका में स्थित 10 आइलैंड्स (द्वीपों) का एक देश है. इसकी आबादी सिर्फ 5 लाख के करीब है और साल 1975 तक यह पुर्तगाल की कॉलोनी हुआ करता था. केप वर्डे को आजादी देकर पुर्तगाली तो चले गए, लेकिन वे इस देश को फुटबॉल की विरासत देकर गए. केप वर्डे की राजधानी प्राया में साल 1910 में पहले फुटबॉल क्लब 'स्पोर्टिंग क्लब दा प्राया' का गठन किया गया था. इसके बाद से फुटबॉल इस देश के लोगों की रगों में बस गया.

केप वर्डे ने फीफा की तरफ कैसे बढ़ाया कदम?

केप वर्डे ने अपने इतिहास में एक-दो नहीं, बल्कि चार बार अफ्रीका कप ऑफ नेशंस के लिए क्वालिफाई किया. लेकिन उसकी टीम अफ्रीका से बाहर अपनी पहचान नहीं बना पा रही थी. इसके लिए केप वर्डे फुटबॉल फेडरेशन ने एक अहम कदम उठाया. 1960 से 1970 के दशक में बड़ी संख्या में लोग केप वर्डे छोड़कर विदेशों में बस गए थे. ऐसे में केप वर्डे से बाहर फुटबॉल खेलने वाले खिलाड़ियों की सूची तैयार की गई. तब पता चला कि केप वर्डे से जुड़े 25 बेहतरीन खिलाड़ी क्लब स्तर पर 15 अलग-अलग देशों में फुटबॉल खेल रहे हैं. इनमें अमेरिका में मोरेरा, आयरलैंड में लोपेस और इज़राइल में ऐल्सन टैवारेस जैसे खिलाड़ी शामिल थे.

चीन से मिली सबसे बड़ी मदद

केप वर्डे ने इन सभी खिलाड़ियों को बुलाकर एक मजबूत टीम बनाई. वहीं, खेलों में सबसे जरूरी चीज़ वित्तीय सहायता की बात करें, तो फीफा के अलावा एक और देश उनकी मदद के लिए आगे आया. कभी पुर्तगाल की कॉलोनी रहा केप वर्डे को आर्थिक मदद पुर्तगाल से नहीं, बल्कि चीन से मिली. चीन ने देश में फुटबॉल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए बड़ा निवेश किया. इसकी बदौलत राजधानी प्राया में एक नए स्टेडियम का निर्माण किया गया. शुरुआत में इसका नाम पेले के नाम पर रखने की योजना थी, लेकिन बाद में यह तर्क दिया गया कि पेले कभी केप वर्डे नहीं आए थे. इसके बाद स्टेडियम का नाम 'एस्टाडियो नैशनल' रखा गया.

केप वर्डे ने वर्ल्ड कप के लिए कैसे किया क्वालिफाई?

केप वर्डे ने चीन की मदद से बने स्टेडियम में ही अपने देशवासियों को इतिहास की सबसे बड़ी खुशी 13 अक्टूबर 2025 को दी. जब उसकी टीम ने घरेलू मैदान पर इस्वातिनी को 3-0 से हराकर फीफा वर्ल्ड कप 2026 के लिए क्वालिफाई किया. यह पल केप वर्डे की आजादी के बाद देश के लिए सबसे गौरवपूर्ण क्षणों में से एक था. पूरे देश में जश्न मनाया गया और लोग सड़कों पर उतर आए थे. केप वर्डे के लिए खेलों की दुनिया का यह सबसे ऐतिहासिक दिन था. टीम ने अफ्रीकी क्वालिफायर्स के ग्रुप डी में आठ बार फीफा वर्ल्ड कप खेल चुकी कैमरून जैसी मजबूत टीम को भी पीछे छोड़ दिया. इसी प्रदर्शन के दम पर केप वर्डे ने पहली बार फीफा वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई किया.

केप वर्डे की टीम अमर हो गई 

अब वर्ल्ड कप के अपने पहले ही मैच में स्पेन के खिलाफ ड्रॉ खेलने के साथ ही टीम और उसके खिलाड़ियों ने इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है. फुटबॉल वर्ल्ड कप के इतिहास में सिर्फ 5 लाख की आबादी और 10 आइलैंड्स वाले केप वर्डे को फैंस लंबे समय तक सबसे बड़े उलटफेरों में से एक के लिए याद करते रहेंगे.

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