कौन हैं केप वर्डे की 'चट्टान' वोजिन्या ? जिसके तले दब गया स्पेन, मां को पैसों की कमी के चलते USA नहीं ला सके तो बयां किया दर्द

Vozinha inspirational football journey: फीफा वर्ल्ड कप 2026 में केप वर्डे के 40 वर्षीय गोलकीपर वोजिन्या ने स्पेन के खिलाफ ऐतिहासिक प्रदर्शन कर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. उन्होंने स्पेन के सात खतरनाक शॉट्स को रोककर मैच ड्रॉ कराया और टीम के सबसे बड़े हीरो बने.

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Cape Verde goalkeeper Vozinha

केप वर्डे के गोलकीपर वोजिन्या

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वोजिन्या ने स्पेन के खिलाफ सात शानदार बचाव किए

केप वर्डे ने दुनिया की नंबर-2 टीम स्पेन को ड्रॉ पर रोका

Vozinha Inspiring Journey: जो तूफ़ानों में पलते जा रहे हैं, वही दुनिया बदलते जा रहे हैं... हिंदी के मशहूर शायर जिगर मुरादाबादी की यह पंक्ति केप वर्डे की चट्टान कहे जाने वाले गोलकीपर वोजिन्या पर बिल्कुल फिट बैठती है. वोजिन्या (Vozinha) अपने दादा-दादी के साथ पले-बढ़े और केप वर्डे जैसे छोटे से देश में तमाम तूफ़ानों के बीच उन्होंने फुटबॉल खेलना नहीं छोड़ा. जिसकी बदौलत आज उन्होंने स्पेन को रुलाकर इतिहास बदल दिया है. जिस केप वर्डे (Cape Verde) को अभी तक बहुत कम लोग जानते थे, अब उसी देश का नाम इतिहास में दर्ज हो गया है. इतना ही नहीं, उनके हीरो वोजिन्या (Vozinha) को पूरी दुनिया सलाम कर रही है. इसका उदाहरण यह है कि मैच से पहले उनके इंस्टाग्राम पर 50 हजार फॉलोअर्स थे, जो अब 20 लाख (2 मिलियन) के पार पहुंच चुके हैं. यही कारण है कि जो तूफ़ानों में पलते हैं, वही दुनिया भी बदलते हैं. अब चलिए जानते हैं कि केप वर्डे जैसे छोटे देश से आने वाले वोजिन्या ने फीफा वर्ल्ड कप (FIFA World Cup 2026) तक का सफर कैसे तय किया और उन्होंने अपनी मां को लेकर क्या कहा.

वोजिन्या नाम के पीछे की दिलचस्प कहानी

दरअसल, पश्चिम अफ्रीका में स्थित केप वर्डे 10 द्वीपों (आइलैंड्स) का एक समूह है. इस देश में खेलों के नाम पर सबसे लोकप्रिय फुटबॉल है. पुर्तगाल की कॉलोनी रहने के कारण केप वर्डे (Cape Verde) के डीएनए में फुटबॉल बसती है और इसका उदाहरण अब पूरी दुनिया के सामने है.

इसी देश की गलियों में एक लड़का अपने से बड़ी उम्र के लड़कों के साथ फुटबॉल खेलता था, तो उसे अक्सर उनसे लातें भी खानी पड़ती थीं. इससे वह गुस्सा हो जाता था, तो बाकी खिलाड़ी मजाक में कहते थे, "जाओ, अब जाकर दादी से शिकायत करो."

उस लड़के का नाम तब वोजिन्या नहीं, बल्कि जोशिमार वलाडो (Josimar Alado) था. एक अन्य लड़के का नाम भी उससे मिलता-जुलता था, इसलिए उसकी दादी ने उसे "वोजिन्या" नाम दिया. वही नाम आज भी वह अपनी जर्सी पर लिखवाकर खेलते हैं. केप वर्डे की स्थानीय भाषा में वोजिन्या का मतलब "दादी" या "नानी" होता है.

 

वोजिन्या का सफर काफी लंबा और संघर्षों से भरा रहा

वोजिन्या के नाम से मशहूर इस फुटबॉलर को अफ्रीका क्षेत्र से बाहर पहचान बनाने में काफी समय लगा. उन्होंने अंगोला की क्लब टीम प्रोग्रेसो के लिए खेलने के लिए अपना घर छोड़ दिया. इसके बाद उन्होंने साइप्रस, स्लोवाकिया, मोल्दोवा और पुर्तगाल में फुटबॉल खेली, जहां वह अब सेकेंड-टियर क्लब चावेस के लिए खेलते हैं.

25 साल की उम्र में प्रोफेशनल फुटबॉलर बनने वाले वोजिन्या ने 15 साल तक लंबा संघर्ष किया, तब जाकर उन्हें फीफा वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच पर खेलने का मौका मिला. इस मंच पर उन्होंने अपने अनुभव और संघर्ष के दम पर स्पेन जैसी दिग्गज टीम के सामने चट्टान बनकर प्रदर्शन किया और एक भी बार दबाव में नहीं टूटे.

स्पेन के खिलाफ वोजिन्या ने क्या किया?

केप वर्डे के गोलकीपर के सामने स्पेन के स्टार खिलाड़ी लगातार आक्रमण करते रहे. स्पेन ने कुल 26 शॉट लगाए, जिनमें से गोलपोस्ट की दिशा में गए सात शॉट्स को वोजिन्या ने अपने शांत दिमाग, फुर्ती और बेहतरीन नियंत्रण के दम पर रोक दिया.

इस तरह वोजिन्या के सामने 90 मिनट तक स्पेन के खिलाड़ी और पूरा देश एक गोल के लिए तरसता रहा. यही वजह है कि वोजिन्या का नाम अब पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है और सोशल मीडिया पर उनके फॉलोअर्स लगातार बढ़ रहे हैं.

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ग्रैंडपेरेंट्स और मां की याद में निकले आंसू

40 साल की उम्र में वर्ल्ड कप में डेब्यू करने वाले वोजिन्या इस टूर्नामेंट में अब तक के सबसे उम्रदराज डेब्यू खिलाड़ियों में शामिल हैं. जब केप वर्डे ने दुनिया की नंबर-2 टीम स्पेन के खिलाफ ड्रॉ खेला, तो वोजिन्या की आंखों से बचपन से लेकर अब तक के संघर्षों का पूरा सफर आंसुओं के रूप में बाहर आ गया.

जिन दिवंगत दादा-दादी के साथ रहकर वह बड़े हुए, उन्हें याद कर वोजिन्या भावुक हो गए. इसके अलावा वह अपनी मां को भी इस ऐतिहासिक मैच में नहीं बुला सके. उन्होंने बताया कि वीजा फीस के लिए पैसों का इंतजाम देर से हो पाया, जिसके कारण उनकी मां इस खास पल में उनके साथ मौजूद नहीं थीं.

वोजिन्या ने कहा कि उन्हें अपनी मां की बहुत याद आ रही है. अब वह 21 जून को उरुग्वे के खिलाफ एक बार फिर मैदान में उतरेंगे और उम्मीद है कि उस समय उनकी मां उनके साथ होंगी.
 

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