भारत के लिए कभी खेल नहीं पाए पिता, अब बेटा FIFA World Cup में मचाएगा, जानें कौन हैं कतर की वर्ल्ड टीम में जगह बनाने वाला केरल का धुरंधर

कतर स्टार्स लीग क्लब अल दुहैल के लिए खेलने वाले 19 साल के तहसीन केरल के रहने वाले हैं. वह थलास्सेरी के रहने वाले और कालीकट यूनिवर्सिटी के पूर्व फुटबॉलर जमशेद के बेटे हैं

Profile

SportsTak

अपडेट:

SportsTak Hindi

तहसीन मोहम्मद जमशेद को कतर की टीम में चुना गया है. (PC: Getty)

Story Highlights:

तहसीन मोहम्मद जमशेद को कतर की टीम में चुना गया है.

तहसीन केरल के रहने वाले हैं.

भारतीय मूल के खिलाड़ी तहसीन मोहम्मद जमशेद ने कतर की फीफा वर्ल्ड कप 2026 के स्क्वॉड में शामिल होकर इतिहास रच दिया. स्पेनिश कोच जुलेन लोपेटेगुई ने एशियाई चैंपियनों के मुख्य खिलाड़ियों पर आधारित टीम का ऐलान किया, तो उसमें तहसीन को भी जगह मिली. इसी के साथ वह फीफा वर्ल्ड कप का हिस्सा बनने वाले भारतीय मूल के पहले खिलाड़ी बन गए हैं.

कितनी टीमें लेंगी FIFA WC 2026 में हिस्सा, क्या हैं टूर्नामेंट का फॉर्मेट?

कतर स्टार्स लीग (QSL) क्लब अल दुहैल के लिए खेलने वाले 19 साल के तहसीन केरल के रहने वाले हैं. वह थलास्सेरी के रहने वाले और कालीकट यूनिवर्सिटी के पूर्व फुटबॉलर जमशेद के बेटे हैं, जो अपने प‍िता में फुटबॉल खेलते देख बड़े हुए हैं. जब तहसीन चार साल के थे, तो वे दोहा के लोकल स्टेडियमों में डग-आउट के पास बैठकर शुक्रवार के द‍िन अपने पिता को फुटबॉल खेलते हुए देखते थे. और यहीं से उनकी फुटबॉल का प्रेम भी शुरू हुआ. 

सब कुछ छोड़ दोहा चला गया था पर‍िवार


कालीकट के रहने वाले जमशेद थचनकंडी 1996 में अपनी पत्नी शाइमा के साथ दोहा चले गए थे. वहां वे अपना लकड़ी का कारोबार और चोट के कारण बीच में ही खत्म हुए फुटबॉल करियर पीछे छोड़ गए थे. कतर में शुक्रवार को छुट्टी होती है. जमशेद अपनी छुट्टियां दोस्तों और सहकर्मियों के साथ स्थानीय स्टेडियमों में बिताते थे और उनका छोटा बेटा भी उनके साथ जाता था.  इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार जमशेद याद करते हुए बताते हैं कि उनका बेटा डग-आउट एरिया के पास बैठा करता था. बाद में वह उनये और उनके दोस्तों से उसके साथ ड्रिबल करने और फुटबॉल सिखाने के लिए कहता था. यही उनका पहला कदम था. 

भारत के लिए खेलने का मौक़ा हाथ से निकला

1992 में जमशेद को इंडिया यूथ फ़ुटबॉल कैंप के लिए चुना गया था, लेकिन वह नहीं गए. कालिकट यूनिवर्सिटी को सर आशुतोष मुखर्जी शील्ड के लिए उनकी ज़रूरत थी, उन्हें अपनी डिग्री पूरी करनी थी और अपनी ज़िंदगी बनानी थी. उन्होंने अपना फ़ैसला कर लिया था. वह उस दौर के केरल के सबसे बेहतरीन खिलाड़ी पॉल एंचेरी के साथ भी खेले थे, मगर भारत के लिए खेलने का मौक़ा उनके हाथ से निकल गया. 

तीस साल से भी ज़्यादा समय बाद जमशेद के 19 साल के बेटे को FIFA वर्ल्ड कप के लिए कतर की 26-सदस्यीय टीम में शामिल किया गया.  2006 में विकास धोरासू के फ़्रांस के लिए खेलने के बाद यह पहली बार है जब भारतीय मूल का कोई खिलाड़ी इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेगा. 

FIFA World Cup 2026 से पहले बदले फुटबॉल से जुड़े 8 नियम, जानिए क्या-क्या बदला

    यह न्यूज़ भी देखें

    Share